Thursday, October 6, 2022

क्या अग्निपथ प्रदर्शन में जलाया गया बुलडोज़र?

Must read

Tanzil Asif
Tanzil Asif is a multimedia journalist-cum-entrepreneur. He is the founder and the CEO of Main Media. He occasionally writes stories from Seemanchal for other publications as well. Hence, he has bylines in The Wire, The Quint, Outlook Magazine, Two Circles, the Milli Gazette etc. He is also a Josh Talks speaker, an Engineer and a part-time poet.

India Today ग्रुप की बिहार केंद्रित डिजिटल चैनल ‘बिहार तक’ ने अपने YouTube चैनल पर 16 जून को बिहार के पूर्णिया ज़िले से एक खबर चलाई – “प्रदर्शनकारियों ने फूंका Bulldozer तो मच गया हाहाकर, Agnipath पर भड़के छात्र”।

1:19 मिनट के इस वीडियो पर खबर लिखने तक सिर्फ YouTube पर 20,000 से ज़्यादा व्यूज थे।

‘बिहार तक’ के YouTube चैनल पर 2.5 मिलियन यानी 25 लाख सब्सक्राइबर्स हैं। चैनल ने इसी हैडलाइन के साथ हाजीपुर का एक वीडियो अपने फेसबुक पेज पर डाला। हाजीपुर के वीडियो में Bulldozer जैसा कुछ नहीं है, लेकिन इस पर भी 33,000 से ज़्यादा व्यूज हैं। हालांकि ‘बिहार तक’ के दर्शकों ने YouTube पर कमेंट कर चैनल को सच्चाई बताने की कोशिश भी की। एक दर्शक ने लिखा – “ये गलत न्यूज है”, एक दूसरे व्यूअर लिखते हैं – “बिहार तक वाले आप लोग कुछ भी चला देते हैं यह आंदोलन की घटना नहीं है। आपलोग ही ग़लत खबर चला के माहौल गर्म करवा रहे हैं। और छात्रों को बदनाम और प्रेरित कर रहे हैं। हमलोग विचार किए हैं कि बिहार तक पर गलत खबर प्रसारित करने को लेकर FIR होनी चाहिए।”

‘बिहार तक’ के इस खबर के बाद Twitter और Facebook पर जमकर अफवाह फैली और लोग इसे हकीकत मान कर इस पर मीम तक बनाने लगे। TEESRI JUNG नामक एक वेबसाइट ने खबर चलाई – “अग्निवीरों ने बुलडोज़र भी जला दिया, ये किस मदरसे से पढ़े है, या नमाज़ पढ़कर निकले है। @azizkavish नाम के एक ट्विटर यूजर ने ‘बिहार तक’ के वीडियो को शेयर करते हुए लिखा – “अग्नि वीरों ने बुलडोजर भी जला दिया, यह किस मदरसे के लोग हैं, कौन सी नमाज पढ़कर निकले हैं”, खबर लिखने तक Twitter पर इस वीडियो के लगभग 90,000 व्यूज थे। समाजवादी पार्टी की एक नेत्री Rachna Singh, Bulldozer के जलने का वीडियो Twitter पर शेयर करते हुए लिखती हैं – “अग्निवीरों ने बुलडोजर में ही आग लगा दिया, ना रहेगा बॉस ना बजेगी बाँसुरी।”

मामले की हकीकत जानने के लिए हमने पूर्णिया सदर एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार सरोज से बात की, उन्होंने हमें बताया कि यह मामला कहीं से भी अग्निपथ स्कीम विरोधी प्रदर्शन से जुड़ा नहीं है। बल्कि, यह मामला 16 जून को हुए एक सड़़क हादसे से जुड़ा है, जबकि पूर्णिया में अग्निपथ स्कीम के विरोध में पहला प्रदर्शन युवाओं ने उसके दूसरे दिन 17 जून को किया था।

दरअसल, 16 जून यानी गुरुवार को पूर्णिया में नेशनल हाईवे 31 स्थित दमका चौक पर एक ही जगह दो भीषण सड़क हादसे हुए थे। दो घंटे के अंदर दो ट्रक और दो बाइक की टक्कर हुई, जिसमें दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मरने वालों में एक महिला और एक युवक शामिल थे।

पहले हादसे में नेशनल हाईवे पर तेज़ रफ़्तार ट्रक ने दादी पोती को कुचल डाला, जिसमें पोती की मौत हो गयी और दादी अस्पताल में ज़िंदगी और मौत से लड़ रही है। मृत महिला की पहचान अररिया जिले के कोचगामा निवासी रिंकी मुर्मू के रूप में हुई। घटना के संबंध में मृतका के भाई करण मुर्मू ने बताया कि वह घर से बाइक पर अपनी दीदी रिंकी मुर्मू और दादी पार्वती मुर्मू को सवार कर अपनी फुआ के यहाँ बाँसवाड़ी जा रहा था। ईसी क्रम में दमका चौक गुलाबबाग के पास पीछे से आ रही बेलगाम तेज़ रफ़्तार ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद बाइक सवार रिंकी मुर्मू और पार्वती मुर्मू को ट्रक ने कुचल दिया। आनन फानन में दोनों को इलाज़ के लिए मेडिकल कॉलेज पूर्णिया भेजा गया। जहाँ डॉक्टर ने रिंकी मुर्मू को मृत घोषित कर दिया।

इसके ठीक 2 घटने के अंदर दूसरा हादसा हुआ। बाइक सवार एक युवक को ट्रक ने कुचल दिया, जिसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृत युवक की पहचान पूर्णिया सदर थाना क्षेत्र के पतिलिया बरसौनी निवासी 25 वर्षीय दीपक सिंह के रूप में की गई। दीपक सिंह अपने छोटे भाई और माँ को बाइक में बिठाकर घर जा रहा था, उसी क्रम में दमका चौक गुलाबबाग के पास सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया।

2 घण्टे के अंदर हुए दो भीषण हादसे से लोग काफी आक्रोशित हो गए। गुस्साई भीड़ ने सड़क जामकर जमकर बवाल काटा और आगजनी कर दी। लोग इतने आक्रोशित थे कि जिस ट्रक से हादसा हुआ था, उस ट्रक को भी आग के हवाले कर दिया। उसी ट्रक पर बुलडोज़र लदा था। ट्रक बुरी तरह जल गया, लेकिन बुलडोज़र को नुकसान पहुँचने से पहले आग बुझा लिया गया था।

इस अफवाह की आड़ में जिस परिवार का दर्द छुपाया गया है, उनके आँगन में मृतक दीपक सिंह का छोटा भाई मिथिलेश सिंह सदमे में कुछ बोल नहीं पा रहा, बूढ़ी माँ सरोसुंदर देवी उस मंज़र को बयान करते करते रो पड़ती हैं।

चार भाइयों में दीपक तीसरा था, पिछले साल नवंबर में ही उसकी शादी हुई थी। दीपक के बड़े भाई अरुण बताते हैं परिवार का गुज़र बसर खेती और मज़दूरी से ही होता है।


क्या पुलिस की पिटाई से हुई शराब के आरोपित की मौत?

SDRF की एक टीम के भरोसे सीमांचल के 1.08 करोड़ लोग


- Advertisement -spot_img

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisement -spot_img

Latest article