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कोसी में मक्का की शानदार उपज, लेकिन मक्का आधारित उद्योग नहीं होने से किसान मायूस

कृषि नवाचार की मिसाल बने सहरसा के विधानचंद्र, थाईलैंड सेब सहित कई फलों की खेती में पाई बड़ी सफलता

किशनगंज में तेज़ आंधी से उड़े लोगों के कच्चे मकान, लाखों की फसल बर्बाद

Agriculture की अन्य ख़बरें

कटिहार में गेहूं की फसल में लगी भीषण आग, कई गांवों के खेत जलकर राख

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि आग बेलवा पंचायत के एक गांव में लगी और फैलकर मादरगाछी गांव होते हुए आबादपुर पंचायत के मिस्त्री टोला तक पहुंच गई। तेज़ हवा के कारण आग बहुत तेज़ी से बढ़ती गई और कई बीघा जमीन में फैली फसलों को तबाह कर गई जिससे किसानों को लाखों का नुकसान हुआ है।

किशनगंज: तेज़ आंधी व बारिश से दर्जनों मक्का किसानों की फसल बर्बाद

देर रात आए तूफ़ान और तेज़ बारिश ने खुश मोहम्मद की मक्का फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। खुश मोहम्मद ने बताया कि उन्होंने 1 लाख की लागत से 5 बीघा जमीन पर मक्के की खेती की थी। तूफान और बारिश से साढ़े तीन से चार बीघे में लगायी गयी मक्के की फसल बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है।

नीतीश कुमार ने 1,028 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र, कई योजनाओं की दी सौगात

मुख्यमंत्री कृषि विभाग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए और सांकेतिक रूप से 10 नवनियुक्त सहायक प्राध्यापक सह कनीय वैज्ञानिकों को नियुक्ति प्रमाण पत्र प्रदान किए।

किशनगंज के दिघलबैंक में हाथियों ने मचाया उत्पात, कच्चा मकान व फसलें क्षतिग्रस्त

तीन दिन पूर्व आठगछिया पंचायत के तलवार बंधा में भी हाथियों ने उत्पात मचाते हुए एक कच्चे मकान को क्षतिग्रस्त कर दिया था और खेतों में घुसकर मक्के की फसल और केले के पेड़ों को नष्ट कर दिया था। सीमावर्ती इलाकों में हाथियों के डर से लोगों में डर फैला हुआ है और वे रतजगा कर रात गुजारने पर मजबूर हैं।

“किसान बर्बाद हो रहा है, सरकार पर विश्वास कैसे करे”- सरकारी बीज लगाकर नुकसान उठाने वाले मक्का किसान निराश

किशनगंज के कोचाधामन प्रखंड अंतर्गत हल्दीखोड़ा पंचायत के धर्मटोला वार्ड संख्या 4 के निवासी सद्दाम हुसैन पिछले चार सालों से मक्के की खेती कर रहे हैं। उन्होंने नवंबर महीने में अनुमंडल कार्यालय से मक्के के बीज लिए थे जिन्हें लगाने के हफ़्तों बाद भी पौधे नहीं आए।

धूप नहीं खिलने से एनिडर्स मशीन खराब, हाथियों का उत्पात शुरू

किशनगंज जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में हाथियों को रोकने के लिए वन विभाग द्वारा लगाई गई एनिडर्स मशीन भी बेकार साबित होने लगी है।

“यही हमारी जीविका है” – बिहार के इन गांवों में 90% किसान उगाते हैं तंबाकू

किसानों ने बताया कि तंबाकू का बीज बाज़ार में उपलब्ध नहीं होता। इसे पौधे में मौजूद छोटे से फल से निकाला जाता है और काट कर सुखाया जाता है। फिर बीज तैयार होता है। बीज लगाने के एक महीने बाद तंबाकू की पली निकाल कर उनकी रोपाई की जाती है। कमोबेश तीन महीने के बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है।

सीमांचल के जिलों में दिसंबर में बारिश, फसलों के नुकसान से किसान परेशान

बिहार के अररिया जिला स्थित सिमराहा के किसान श्यामदेव ने बताया कि कटाई के बाद खेत में रखा धान बारिश के पानी में सड़ने लगा है। मक्के की रोपाई के लिए खेतों में दिया गया खाद भी बारिश के कारण खराब हो चुका है।

चक्रवात मिचौंग : बंगाल की मुख्यमंत्री ने बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की घोषणा की

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के लिए मुआवजे की मांग को लेकर मुख्य सचिव एच.के. द्विवेदी को पत्र लिखा था। इसके एक दिन बाद सीएम ने यह घोषणा की है।

बारिश में कमी देखते हुए धान की जगह मूंगफली उगा रहे पूर्णिया के किसान

चिन्मयानंद ने इस सीज़न करीब 1 हेक्टेयर ज़मीन में मूंगफली लगाई थी। उनके अनुसार एक हेक्टेयर ज़मीन पर खेती में करीब 12 से 13 हजार रुपये की लागत आती है। आम तौर पर 1 क्विंटल बीज लगाने पर 7 से 8 क्विंटल फसल की उपज होती है।

ऑनलाइन अप्लाई कर ऐसे बन सकते हैं पैक्स सदस्य

वोटर्स की संख्या कम होने के कारण ज्यादा प्रभाव वाले ऐसे-ऐसे लोग पैक्स चेयरमैन बन जाते हैं जो किसान से धान खरीदने के बजाय गाँव के पैकारों (स्थानीय व्यापारी) से धान खरीद कर मोटा मुनाफ़ा कमाने लगते हैं।

‘मखाना का मारा हैं, हमलोग को होश थोड़े होगा’ – बिहार के किसानों का छलका दर्द

बिहार में मखाना का सबसे ज़्यादा उत्पादन आज सीमांचल के चार जिलों पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और अररिया में हो रहा है। इसी को देखते हुए अगस्त 2020 में भारत सरकार ने 'मिथिला मखाना' को GI टैग दिया है।

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