Friday, August 19, 2022
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Agriculture

केले के कूड़े को बनाया कमाई का जरिया

बिहार के सुपौल जिले के गणपतगंज नामक क्षेत्र में स्थित विष्णु मंदिर की तुलना चेन्नई के प्रसिद्ध विष्णु मंदिर से की जाती है। आज...

कहीं बारिश, कहीं सूखा – बदलते मौसम से सीमांचल के किसानों पर आफत

50 वर्षीय अशोक यादव हफ्तेभर से बारिश का इंतजार कर रहे थे। लेकिन, बारिश नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरी में डीजल चालित पंप सेट...

बिजली की घोर किल्लत ने बढ़ाई किसानों, आम लोगों की समस्या

कटिहार: चमड़ी जला देने वाली धूप में मो. नदीम अख्तर का कपड़ा पसीने से भीगा हुआ है। आज वह अपने खेत में एक पुराना...

बारिश नहीं होने से खेती पर असर, 30% से कम हुई धान की बुआई

बिहार के किशनगंज जिले के सत्तर फीसदी लोग खेती पर निर्भर हैं। लेकिन राज्य सरकार का ध्यान यहां के किसानों पर नहीं है। किसान...

बर्मा से आये लोगों ने सीमांचल में लाई मूंगफली क्रांति

अररिया: बर्मा से आये रिफ्यूजियों ने अररिया जिला सहित सीमांचल के किसानों को एक नई फसल उगाने की तरकीब देकर कृषि क्रांति ला दी...

किशनगंज में हाथियों का उत्पात जारी, मंत्री के आश्वासन के बावजूद समाधान नहीं

किशनगंज के दिघलबैंक प्रखंड क्षेत्र के सीमावर्ती धनतोला के मुलाबारी सहित अन्य गांवों में हाथियों का उत्पात रुकने का नाम ही नहीं ले रहा...

WATCH: अज्ञात बीमारी से दो महीने में सैकड़ों सूअरों की मौत

कोरोना महामारी के बीच किशनगंज में पालतू सूअरों की मौत से लोगों में दहशत है। पिछले दो माह में जिले में पांच सौ से ज्यादा सुअरों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों सुअर अभी भी इस अज्ञात बीमारी की चपेट में हैं।

सीमांचल में बढ़ रहा हाथियों का उत्पात, घरों और फसलों को पहुंचा रहे नुकसान

किशनगंज में हाथियों का उत्पात जारी है। सोमवार की अहले सुबह हाथियों के झुंड ने जिले की दिघलबैंक पंचायत अंतर्गत रामपुर काॅलोनी बस्ती में उत्पात मचाया। हाथियों ने रामपुर काॅलोनी के लखीराम सोरेन, बुध रॉय, राजू दास, लक्ष्मी देवी सहित कुल छह परिवारों के कच्चे घरों को तोड़ दिया है जबकि घर अंदर रखा अनाज जिसमें चावल, धान, सब्जी आदि को बर्बाद कर दिया। हाथियों ने फसलों को भी नुकसान पहुंचाया।

सीमांचल में खाद की किल्लत बरकरार, किसान सड़कों पर उतरने को विवश

पिछले दिनों सीमांचल में खाद के लिए भगदड़ मच जाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि सरकार इलाके में खाद की किल्लत को जल्द दूर कर देगी। मगर, यहां खाद की किल्लत अब भी बरकरार है।

‘ऐसी खाद की किल्लत हमने पहले कभी नहीं देखी’

गौरतलब हो कि भारत की लगभग 33 निजी व सार्वजनिक कंपनियां तथा को-ऑपरेटिव मिलकर हर साल 24 से 25 मिलियन टन यूरिया का उत्पादन करते हैं और 9 से 10 मिलियन टन यूरिया का निर्यात किया जाता है। इस साल भारत में रबी सीजन में कुल 179.001 लाख मैट्रिक टन यूरिया की जरूरत थी। 

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