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Flood

इस मुस्लिम-आदिवासी गांव को नदी कटान से कौन बचाएगा?

महानंदा बेसिन परियोजना: फ़ेज -2 को लेकर इंजीनियरों की कमेटी का क्षेत्र मुआयना

क्या है कोसी-मेची लिंक परियोजना, जिसे केंद्रीय बजट में मिले करोड़ों, फिर भी हो रहा विरोध?

Flood की अन्य ख़बरें

पूर्णिया के बैसा में नदी में समा गये सैकड़ों घर, जुग्गी-झोपड़ी में हो रहा गुज़ारा, नहीं मिला मुआवज़ा

बिहार में सैलाब से हर साल लाखों लोग प्रभावित होते हैं। हज़ारों लोगों को दूसरी जगह घर लेकर जाना होता है। आंकड़े बताते हैं कि सैलाब से वर्ष 2018 में डेढ़ लाख लोग प्रभावित हुए। साथ ही 1,074 घर बर्बाद हुए, जिसकी क़ीमत तक़रीबन 42 लाख रुपये है। इसमें लगभग एक हज़ार लोगों की जान चली गई।

बिहार: कटिहार में बाढ़ के बीच नाव से पहुँची बारात

भौनगर पंचायत के आलापोखर गांव में महानंदा नदी से हो रहे कटाव के कारण सैकड़ों बीघा कृषि योग्य उपजाऊ भूमि नदी में समा रही है। तो वहीं ग्रामीणों को गांव के नजदीक नदी के आ जाने का डर सता रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि गांव को बचाने के लिए सरकार जरूरी कदम उठाए।

सिक्किम में तीस्ता ने मचाई तबाही, देसी-विदेशी 1200 पर्यटक फंसे, राहत अभियान युद्ध स्तर पर

सिक्किम में यूं तो कई दिनों से ही गाहे-बगाहे मौसमी बारिश हो रही थी लेकिन बीते बुधवार की रात लगातार हुई बारिश काल साबित हुई। एक ही रात में 220 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई। उसकी वजह से तीस्ता नदी खतरे के स्तर से भी ऊपर उफन गई। इसे इसी से समझा जा सकता है कि गहरी खाई में बहने वाली नदी कई जगहों पर राजमार्ग के बराबर आ गई। यहां तक कि कई सड़कों पर भी चढ़ गयी। पहाड़ों पर जगह-जगह भूस्खलन होने लगे।‌ कई घर नदी में समा गये।

कोसी की समस्याओं को लेकर सुपौल से पटना तक निकाली गई पदयात्रा

कोसी नव निर्माण मंच ने बीते 30 जनवरी को सुपौल के बैरिया मंच से सत्याग्रह पदयात्रा की शुरुआत की जिसमें दर्जनों लोग ढाई सौ किलोमीटर पैदल चलकर राजधानी पटना पहुंचेंगे।

सहरसा में बाढ़ राहत राशि वितरण में धांधली का आरोप, समाहरणालय के बाहर प्रदर्शन

प्रदर्शन में शामिल भाकपा माले के नेता कुंदन यादव ने बताया कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को मिलने वाली बाढ़ सहायता राशि में अंचल कर्मियों द्वारा जमकर धांधली कर हजारों राशन कार्डधारी लोगों को राशि से वंचित कर दिया है, जो बाढ़ पीड़ित परिवार के साथ सरासर अन्याय है।

पूर्णिया : महानंदा नदी के कटाव से सहमे लोग, प्रशासन से कर रहे रोकथाम की मांग

महादलित बिनटोला में रह रहे कई परिवार लगातार हो रहे कटाव से चिंतित हैं। एक स्थानीय युवक ने बताया कि एक-डेढ़ महीने पहले अंचलाधिकारी ने कटावस्थल का निरीक्षण करने के बाद कहा था कि जल्द ही इसकी रोकथाम को लेकर काम शुरू किया जायेगा, लेकिन इतने दिन गुज़रने के बाद भी कुछ नहीं हुआ।

किशनगंज: रमज़ान नदी का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

किशनगंज शहर के धर्मगंज, हॉस्पिटल रोड, रुईधासा, धोबी पट्टी और कजलामनी जैसे निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं। गृहिणी निरमा देवी ने बताया कि उनके घर में काफी पानी आ चुका है जिस कारण घर का सामान भीग चुका है और खाने पीने की कुछ व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

सुपौल- बाढ़ पीड़ितों को पुनर्वासित करने को लेकर ‘कोशी नव निर्माण मंच’ का धरना

मंच ने अपनी 17 मांगों को लेकर इस धरना प्रदर्शन का आयोजन किया था। प्रदर्शन के बाद मंच ने डीएम के उपस्थित नहीं रहने की स्थिति में अंचल पदाधिकारी को अपना मांग पत्र सौंपा।

सहरसा के नौहट्टा में आधा दर्जन से अधिक पंचायत बाढ़ की चपेट में

बाढ़ का पानी लोगों के मिट्टी के चूल्हों में घुस गया है, जिससे महिलाओं को खाने बनाने में काफी दिक्कत हो रही है। हर साल लोगों को अपना आशियाना छोड़ कर दूसरी जगह पलायन करना पड़ता है।

Araria News: बरसात में झील में तब्दील स्कूल कैंपस, विभागीय कार्रवाई का इंतज़ार

पानी में मोहल्ले का कूड़ा करकट रहता है जिससे बीमारी फैलने का खतरा रहता है। उन्होंने आगे कहा कि इस बात की जानकारी प्रशासन को दी गई थी, जिसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी ने खुद आकर स्कूल कैंपस में मिट्टी भरवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इस पर कार्यवाई नहीं हुई।

‘हमारी किस्मत हराएल कोसी धार में, हम त मारे छी मुक्का आपन कपार में’

कोसी बराज से 4 लाख 62 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण व्यथा का यह गीत लोगों की जुबां पर फिर से आ गया है। बराज से पानी छोड़े जाने से कोसी दियारा क्षेत्र में बाढ़ की प्रबल आशंका बन गई है। कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।

पूर्णिया: बारिश का पानी घर में घुसने से पांच माह की बच्ची की मौत

स्थानीय लोगों ने बताया कि मुसलाधार बारिश से सैकड़ों लोगों के घरों में पानी घुस गया है। पानी का निकास नहीं होने से इलाके में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जलजमाव से ही पानी लोगों के घरों में घुस रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि अगर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न नहीं होती तो यह हादसा टल सकता था।

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