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Literature

दर्द, मोहब्बत और सादगी के शायर बशीर बद्र की बिहार वाली दास्तान

“बख़्तियार ख़िलजी ने नालंदा यूनिवर्सिटी को खत्म नहीं किया”- इतिहासकार प्रो. इम्तियाज अहमद

क्रांतिकारी शायरी को वायरल करने वाले गायक डॉ हैदर सैफ़ से मिलिए

Literature की अन्य ख़बरें

“मुशायरों में फ्री एंट्री बंद हो” – शायर अज़हर इक़बाल से ख़ास बातचीत

19 फरवरी को मशहूर शायर अज़हर इक़बाल, अररिया लिटररी फेस्टिवल धनक 2024 के लिए बिहार के अररिया आए। उन्होंने अखिल भारतीय कवि सम्मलेन व मुशायरा का संचालन किया। मुशायरा में नाज़िम (संचालक) के तौर पर उन्होंने समां बांधे रखा। इसी दौरान उन्होंने अपनी पंक्तियां भी सुनाईं जिसे अररिया के नेताजी सुभाष स्टेडियम में मौजूद दर्शकों ने खूब सराहा।

अररिया में लिटररी फेस्टिवल शुरू, साहित्य जगत की मशहूर हस्तियां होंगी शरीक

फेस्टिवल में 17 फरवरी को लिटररी सेशन होगा। इस सेशन में सीमांचल में उर्दू अफसानानिगारी का इतिहास, हिंदी साहित्य का वर्तमान परिदृश्य, रेणु साहित्य की विशेषताओं पर चर्चा होगी।

फरवरी में होगा तीन दिवसीय अररिया लिटररी फेस्टिवल, वसीम बरेलवी सहित ये बड़े नाम होंगे शामिल

साहित्य और कला की दुनिया से मशहूर शायर वसीम बरेलवी, नवाज़ देवबंदी, अज़हर इक़बाल और स्टैंडअप कॉमेडियन रेहमान खान भी इस साहित्योत्सव में शामिल होने अररिया पहुंचेंगे।

मशहूर शायर मुनव्वर राणा का निधन, मां के ऊपर लिखी नज़्म ने दिलाई थी शोहरत

अपने पूरे करियर के दौरान मुनव्वर राणा को कई पुरस्‍कार मिले, जिनमें उनकी काव्य पुस्तक 'शाहदाबा' के लिए 2014 में प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार भी शामिल है। हालांकि, देश में बढ़ती असहिष्णुता से खिन्‍न होकर उन्होंने बाद में यह पुरस्कार लौटा दिया था।

किशनगंज की मिली कुमारी ने लिखा पहला सुरजापुरी उपन्यास ‘पोरेर बेटी’

किशनगंज जिला पदाधिकारी श्रीकांत शास्त्री ने पुस्तक विमोचन समारोह में मिली कुमारी की प्रशंसा की और कहा, ''यह कार्य बहुत ही सरहानीय है कि कोई हमारी बेटी आगे आई और अपनी संस्कृति को जगाना चाही।

उर्दू अदब और हिन्दी साहित्य का संगम थे पूर्णिया के अहमद हसन दानिश

अहमद हसन दानिश ने उर्दू में शायरी के अलावा उपन्यास, विश्लेषण और समालोचना के मैदान में अपना योगदान दिया। उन्होंने हिंदी में भी कुछ कविताएं लिखीं जो काफी पसंद की गईं । उनकी कविताएं ''शिवाला'', ''कारगिल'' और ''हम आज़ाद हुए हैं क्या'' ने उन्हें राष्ट्रभक्त कवि के तौर पर पेश किया। उनकी मृत्यु पर सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि पेश करते हुए कई लोगों ने उन्हें 'देशभक्त कवि' कह कर याद किया।

हारुन रशीद ‘ग़ाफ़िल’: सामाजिक मुद्दों पर लिखने वाला कुल्हैया बोली का पहला शायर

हारुन रशीद का जन्म 5 मई 1965 में अररिया जिले के कुकुड़वा बसंतपुर में हुआ। कुकुड़वा बसंतपुर उनका नानिहाल हुआ करता था और उनके पिता मोहम्मद नईमुद्दीन और उनका परिवार अररिया के गैयारी में रहता था। हारुन रशीद ने गैयारी में ही तालीम हासिल की। उस समय वह हारुन रशीद हुआ करते थे, लेकिन जब वह शायरी करने लगे तो उन्होंने "ग़ाफ़िल" का तखल्लुस ले लिया।

वफ़ा मालिकपुरी: वह शायर जो वैश्विक उर्दू साहित्य में था सीमांचल का ध्वजधारक

वफ़ा मालिकपुरी का जन्म 1922 में दरभंगा जिला के मालिकपुरी नामक गांव में हुआ। कहा जाता है कि उन्होंने महज़ 13 साल की उम्र से शायरी शुरू कर दी थी।

मौत पर राहत इंदौरी के कहे 20 उम्दा शेर

राहत इंदौरी को उनके शेर कहने के तरीके और अपने फक्कड़पन के लिए खास तौर पर याद किये जाएंगे। उनकी शायरी का सबसे खास बात ये था कि वे उर्दू या हिंदी के नही बल्कि हिंदुस्तान के शायर थे। वह आसान जबान के मानीखेज़ शायर थे। जिस वजह से उनकी शायरी जेहन में लंबे वक्त तक तैरती रहती है।

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