
क्या जन सुराज ने महागठबंधन से ज़्यादा मुसलमानों को टिकट दिया?

साल 2015 के विधानसभा चुनाव में भी सात महिलाओं को टिकट दिया था, लेकिन साल 2020 के विधानसभा चुनाव में महज एक महिला को टिकट मिला था। लेकिन कोई भी महिला जीत नहीं सकी।

गोपाल पिछले तीन विधानसभा चुनावों में लगातार हार का सामना कर चुके हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में 5वीं तक की पढ़ाई कर पाने वाले बच्चों की संख्या कुल आबादी का महज 22.67 प्रतिशत है। वहीं, महज 14.71 प्रतिशत लोग ही 10वीं तक पढ़ पा रहे हैं।

अनूप लाल मंडल, केवर्त समाज से आते हैं, जिनकी बिहार में अनुमानित आबादी लगभग 2.65 लाख है। हालांकि, केवर्त समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि नीतीश सरकार ने जातिगत सर्वेक्षण में केवर्त समाज को कई हिस्सों में बांट दिया, जिसकी वजह से उनकी आबादी कम दिख रही है।

बीजद और राजद नेताओं की प्रतिक्रिया में थोड़ा अंतर है। जहां बीजद के वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर पांडियन की तीखी आलोचना की, वहीं, राजद के भीतर से संजय यादव के खिलाफ बयानबाजी सिर्फ लालू यादव के परिवार से ही हो रही है। उनके कुनबे के बाहर के नेताओं की तरफ से अब तक उनके खिलाफ सार्वजनिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

29 अगस्त को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू करने का ऐलान किया।

बिहार में SIR की प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं, जहां कटिहार के नेटू आलम जैसे जीवित लोग आधिकारिक रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिए गए हैं। रौशनी जैसी मजदूर महिलाएं कागज़ात बनवाने के लिए हफ़्तों भटक रही हैं, बदरुद्दीन को डर है कि कहीं उन्हें विदेशी न करार दे दिया जाए, और मजुना खातून डेढ़ महीने से प्रपत्र खोज रही हैं।

इन दोनों मामलों में जिस तरह सत्ताधारी दल से नजदीकी होते ही उच्च अदालत ने संगीन मामलों में भी संदेह का लाभ देते हुए दोनों नेताओं को बरी कर दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सत्ताधारी पार्टियां न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं?

कैम्प के बाहर खड़े 75 साल के अनिसुर रहमान घुसपैठ वाले बयान से खासा नाराज नजर आये। कटिहार के सिम्हारिया निवासी अनिसुर रहमान सवाल पूछते हैं, "हमलोगों के दादा-परदादा यहीं रहते रहते गुज़र गए... अभी हमलोग कैसे घुसपैठी बन गए?"

इसी साल अप्रैल में तौसीफ आलम असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM में शामिल हुए। पार्टी में शामिल होते ही ओवैसी ने उन्हें बहादुरगंज से उम्मीदवार घोषित कर दिया।

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 24 जून को बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पूर्व मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषणा की। हालांकि ये पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का एक नियमित हिस्सा होते हैं, लेकिन इस बार इसके साथ 2003 की मतदाता सूची में नाम न होने वालों के लिए […]