
इसी साल अप्रैल में तौसीफ आलम असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM में शामिल हुए। पार्टी में शामिल होते ही ओवैसी ने उन्हें बहादुरगंज से उम्मीदवार घोषित कर दिया।

भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 24 जून को बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पूर्व मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषणा की। हालांकि ये पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का एक नियमित हिस्सा होते हैं, लेकिन इस बार इसके साथ 2003 की मतदाता सूची में नाम न होने वालों के लिए […]

आकंड़ों के अनुसार बिहार की बिजली वितरण कंपनी एनबीपीडीसीएल को 2022 में 6,881 करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा हुआ था जो 2023 में बढ़कर 7,089 करोड़ रुपये हो गया।

RJD पर पार्टी तोड़ने का आरोप लगाते लगाते अब गठबंधन की गुहार कर रही AIMIM

बिहार का किशनगंज विधानसभा क्षेत्र कांग्रेस के बचे हुए चंद गढ़ों में से एक है। पिछले कुछ चुनावों में हुए उलटफेर के बावजूद पार्टी ने इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखी है।

विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक तीन-चार महीने पहले ये गहन प्रक्रिया क्यों शुरू की जा रही है, जिसमें बड़े स्तर पर लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटने की आशंका है।

मंगनी लाल मंडल खुद उत्तर बिहार के मधुबनी जिले से आते हैं और वह जिस धानुक जाति से ताल्लुक रखते हैं, उनकी आबादी उत्तर बिहार में ठीक ठाक है।

इंटरव्यू में उन्होंने पत्नी और भाई के मनरेगा कार्ड, विरोधी को पेशाब पिलाने जैसे गंभीर आरोपों से लेकर अपनी पार्टी बदलने की राजनीति (25 साल में 6 बार दल परिवर्तन), राजद में टिकट की दावेदारी और क्षेत्र की अधूरी सड़क-पुल परियोजनाओं पर खुलकर बात की।

गौरतलब हो कि बिहार में इसी साल अक्टूबर-नवम्बर में विधानसभा चुनाव होने वाला है। ऐसे में रोडशो के दौरान ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े पोस्टर, मिसाइलों के कट आउट्स लगाने को विपक्षी पार्टियां सैन्य कार्रवाई का राजनीतिकरण और इस अभियान का बिहार में चुनाव लाभ लेने की कवायद मान रही हैं।

बब्बन वर्ष 2002 से 2006 और 2012 से 2017 तक भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे हैं। उनकी पत्नी नीलम देवी अररिया जिला परिषद क्षेत्र संख्या 8 और 9 से कई बार चुनाव जीत चुकी हैं। वर्तमान में वह क्षेत्र संख्या 9 का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

जानकारों का करना है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विरोधी पार्टियां इसे मुद्दा बनाती, इसी वजह से पार्टी ने पहले ही तेज प्रताप को बाहर का रास्ता दिखा दिया।

बहादुरगंज के मौजूदा विधायक अंजार नईमी ने 'मैं मीडिया' से एक बेबाक इंटरव्यू में कई अहम सवालों के जवाब दिये।

कांग्रेस के एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, “आनेवाले दिनों में भी राहुल गांधी का बिहार आना जारी रहेगा। बिहार चुनाव परिणाम हमें बताएगा कि दलित व अतिपिछड़ा समाज कांग्रेस के साथ आया कि नहीं।”

गौरतलब है कि तौसीफ आलम के ससुर इज़हार असफी भी 2020 में AIMIM के टिकट पर कोचाधामन से विधायक चुने गए थे, लेकिन बाद में उन्होंने भी राजद का दामन थाम लिया।

बिहार चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी पार्टी जदयू के मुस्लिम नेता लगातार पार्टी छोड़ रहे हैं। वे वक़्फ़ एक्ट को लेकर पार्टी से नराज़ चल रहे हैं। पार्टी छोड़ने वालों में सबसे बड़ा नाम मास्टर मुजाहिद आलम का है।