Friday, August 19, 2022
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Climate Change

कहीं बारिश, कहीं सूखा – बदलते मौसम से सीमांचल के किसानों पर आफत

50 वर्षीय अशोक यादव हफ्तेभर से बारिश का इंतजार कर रहे थे। लेकिन, बारिश नहीं हुई, तो उन्हें मजबूरी में डीजल चालित पंप सेट...

बिजली की घोर किल्लत ने बढ़ाई किसानों, आम लोगों की समस्या

कटिहार: चमड़ी जला देने वाली धूप में मो. नदीम अख्तर का कपड़ा पसीने से भीगा हुआ है। आज वह अपने खेत में एक पुराना...

आधा दर्जन से ज्यादा बार रूट बदल चुकी है नेपाल सीमा पर स्थित नूना नदी

अररिया ज़िले के सिकटी प्रखंड में नूना नदी ने पिछले कई वर्षों से कहर ढा रखा है। नेपाल के पहाड़ी इलाके से निकली नुना...

Deputy CM Tarkishore Prasad के शहर कटिहार की हवा सांस लेने लायक नहीं

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से 23 मार्च को जारी वायु गुणवत्ता सूचकांक रिपोर्ट में सीमांचल के कटिहार शहर को लेकर चौंकाने वाला...

सीमांचल में बढ़ रहा हाथियों का उत्पात, घरों और फसलों को पहुंचा रहे नुकसान

किशनगंज में हाथियों का उत्पात जारी है। सोमवार की अहले सुबह हाथियों के झुंड ने जिले की दिघलबैंक पंचायत अंतर्गत रामपुर काॅलोनी बस्ती में उत्पात मचाया। हाथियों ने रामपुर काॅलोनी के लखीराम सोरेन, बुध रॉय, राजू दास, लक्ष्मी देवी सहित कुल छह परिवारों के कच्चे घरों को तोड़ दिया है जबकि घर अंदर रखा अनाज जिसमें चावल, धान, सब्जी आदि को बर्बाद कर दिया। हाथियों ने फसलों को भी नुकसान पहुंचाया।

बिहार के इन गांवों में क्यों मिल रहे हैं इतने अजगर?

अररिया जिले के रानीगंज और कुसियारगंज में अब तक कई बार अजगर सांप देखा जा चुका है, जिससे लोगों में खौफ है।

किशनगंज: भयावह बाढ़ की चपेट में टेढ़ागाछ प्रखंड, चुनाव पर आशंका के बादल

नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार मूसलाधार बारिश होने से किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड की 12 पंचायतों में होने वाले निकाय चुनाव को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। दरअसल ज़िले से होकर बहनेवाली महानंदा, कनकई, डोंक, मेची और रतुआ नदियां भारी बारिश के चलते उफान पर हैं। भारी बारिश से जिले के चार प्रखंड बुरी तरह से प्रभावित हैं।

असमय आंधी और बारिश से सीमांचल में फसलों की तबाही

पूर्णिया जैसी ही स्थिति किशनगंज और अररिया के साथ-साथ समस्तीपुर, सुपौल और बेगूसराय के किसानों की भी है। बारिश के कारण इन जिलों की फसल भी ख़राब हो गई है।

दल्लेगांव: यहां लाशों को भी मुक्ति के लिए नदी पार करना पड़ता है

देश की आजादी के 70 साल से ज्यादा वक्त गुजर चुका है। इन 70 सालों में कितनी ही सरकारें आईं और चली गईं। इन...

“मैं कभी आठ एकड़ जमीन का मालिक था, अभी फेरी लगाता हूं”

तीखापन थोड़ा कम है, लेकिन धूप पूरी खिली हुई है। अपनी उम्र के लिहाज से काफी दुबले और उम्रदराज दिख रहे 58 साल के अब्दुल मजीद अपनी खटारा साइकिल पर सामान लादकर घर से निकल पड़े हैं। साइकल के अगले हिस्से में दो झोले टंगे हुए हैं और पिछले हिस्से में तीन झोले हैं। सभी में सामान भरा हुआ है।

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