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Climate Change

कोसी कटान में उजड़े आशियाने, दशकों से पुनर्वास के इंतज़ार में बाढ़ विस्थापित

लीची पर फ्लाई ऐश की मार, मशरूम बना मुजफ्फरपुर के किसानों का सहारा

किशनगंज में मक्के की खेती कैसे बन रही है मानव-हाथी संघर्ष की वजह?

Climate Change की अन्य ख़बरें

रामसर दर्जा मिलने से बिहार के वेटलैंड्स की स्थिति में क्या बदलाव आया है?

वेटलैंड पोर्टल पर बिहार के 71 हेल्थ कार्ड अपलोड किए गए हैं। बिहार में मौजूद छह रामसर स्थलों में से, पोर्टल पर केवल दो स्थलों कबरताल और गोगाबिल के हेल्थ कार्ड उपलब्ध हैं।

हर साल ग्रीन बजट लाने वाला बिहार आंकड़ों में कितना ‘ग्रीन’ है?

बिहार में खुले वन (लगभग 4.1 प्रतिशत) सबसे अधिक हैं, इसके बाद मध्यम घने वन (करीब 3.5 प्रतिशत) आते हैं, जबकि अत्यंत सघन वन केवल लगभग 0.4 प्रतिशत ही हैं। यानी राज्य में ज्यादातर वन ऐसे हैं जहां पेड़ों की सघनता कम है, जबकि घने और बेहतर गुणवत्ता वाले जंगल बहुत सीमित हैं।

जलवायु संकट की मार झेलते बिहार के किसान, प्री-मानसून ओलावृष्टि से तबाह खरीफ फसल

बिहार के किशनगंज जिले के किसान मोहम्मद नइमुद्दीन ने तीन एकड़ जमीन में मक्का की खेती की थी, जिस पर करीब तीन लाख रुपये का खर्च आया। यह रकम उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिए कर्ज लेकर लगाई थी। फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन एक रात आई आंधी और बारिश ने सब […]

नाव, नदी और नसीब: कोसी के गांवों में मातृत्व की अधूरी कहानियाँ

बेलागोठ के नवदम्पत्ति ओमप्रकाश और रिंकू देवी ने दो मौकों पर, जब कोसी में पानी का स्तर ऊपर था, तब नाव के अस्पताल पहुंचने में विलम्ब की वजह से अपने दो अजन्मे बच्चों को खो दिया। 

चरम मौसमी घटनाएं रोक रही बच्चों की शिक्षा की रफ्तार

यूनिसेफ़ की रिपोर्ट द स्टेट ऑफ वर्ल्ड चिल्ड्रेन 2024 कहती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चों के सामने गंभीर जोखिम पैदा हो रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनसांख्यिकीय बदलाव, जलवायु संकट और तकनीकी प्रगति का असर 2050 तक दुनिया भर के अनुमानित 2.3 अरब बच्चों के जीवन को प्रभावित कर सकता है। 

बेगूसराय की कांवर झील से क्यों मुंह मोड़ रहे प्रवासी पक्षी

साल 2010 में कांवर झील में लगभग 60 हजार पक्षी दर्ज किए गए थे, जो 2023 तक घटकर महज 8 हजार पर आ गये।

गयाजी के किसानों पर मौसम की मार, मोटर बनी मजबूरी

दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में अभी गेहूँ, सरसों और चने की फसल लहलहा रही है और पकने की अवस्था में है। अगर तेज हवा और बेमौसम बरसात हुई तो फसल पर असर पड़ेगा।

बिहार में केंद्र सरकार की मिशन अमृत सरोवर योजना कितनी सफल है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2022 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर देश के प्रत्येक जिले में 75 तालाबों के निर्माण और पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए मिशन अमृत सरोवर योजना शुरू करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकायों का पुनरुद्धार और नए सरोवरों का निर्माण कर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन, बिहार में इस योजना का क्रियान्वयन सवालों के घेरे में है।

बिहार के जलवायु पत्रकारों के लिए ऑनलाइन रिपॉजिटरी

बिहार के ग्रामीण इलाकों में क्लाइमेट पर काम कर रहे हिंदी पत्रकारों की सहूलियत के लिए हमने यह ऑनलाइन रिपॉजिटरी बनाया है। इसमें समय-समय पर बिहार से जुड़े क्लाइमेट संबंधी शोध और आंकड़ों को अपडेट किया जाता रहेगा।

प्रदूषण की गिरफ्त में बचपन, बिहार में बढ़ती सांस की बीमारियां

ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि बिहार के पटना ज़िले के अस्पतालों में जनवरी 2025 में न्यूमोनिया और छाती में संक्रमण के 20-25% केस दर्ज किये गये थे । बिहार राज्य में तीव्र श्वसन संक्रमण की व्यापकता दर 6.8% है जो कि राष्ट्रीय औसत दर (2.7-2.8%) से कहीं गुना ज़्यादा है।

क्या बिहार को एथनॉल हब बनाने का सपना बेपटरी हो रहा है?

राज्य का पहला इथेनॉल प्लांट साल 2022 में पूर्णिया में खुला, जिसकी उत्पादन क्षमता 65 किलोलीटर प्रति दिन है। इसके बाद एक-एक कर कई फ़ैक्टरियाँ लगीं। फिलहाल, बिहार में कुल 19 एथनॉल फैक्टरियां चल रही हैं, जिनके साथ  तेल मार्केटिंग कंपनियों का करार है।  इन फ़ैक्टरियों से वादे के मुताबिक़, एथनॉल का उठाव होने लगा।

बदलते मौसम और विकास कार्यों के बीच संघर्ष करते बिहार के काले हिरण

काले हिरण की जब बात होती है, तो मुख्य तौर पर राजस्थान व अन्य राज्यों का जिक्र होता है, लेकिन तथ्य ये है कि बिहार में भी काले हिरण पाये जाते हैं। काले हिरण खुले मैदान, घास के मैदान व कम झाड़ियां वाली जगहों में रहना पसंद करते हैं।

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