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Climate Change

बदलते मौसम में समस्तीपुर के किसानों का फलों की ओर बढ़ता कदम

बिहार में क्यों बढ़ रही हैं कुत्ता काटने की घटनाएं

वैशाली में केले के कूड़े से कैसे बनाया जा रहा रेशा

Climate Change की अन्य ख़बरें

बदलते मौसम और सड़ते मुनाफे के बीच पिसते भागलपुर के केला किसान

कभी अत्यधिक उत्पादन तो कभी जलवायु परिवर्तन के चलते उत्पादन पर भारी असर ने केला किसानों को दोराहे पर खड़ा कर दिया।

बिहार के अररिया में क्यों बढ़ रही अजगरों की आबादी

पिछले 20 वर्षों से रानीगंज वृक्ष वाटिका में काम कर रहे वनकर्मी रामजी पासवान बताते हैं कि इस क्षेत्र में पहले कभी अजगर नहीं देखा गया था।

भागलपुर: अवैध रेत खनन से गंगा की पारिस्थितिकी व डॉल्फिन पर गहराता संकट

गंगा नदी के विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य के किनारे बसे कहलगांव के मलदह गांव में रात का अंधेरा निस्तब्धता नहीं, ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट और जेसीबी की गरज लाता है। इन दैत्याकार उपकरणों की मदद से गंगा से अवैध तरीके से रेत का खनन किया जाता है। स्थानीय मछुआरे रामाश्रय मंडल बताते हैं, “रात में बालू […]

क्या जलवायु परिवर्तन के चलते बिहार में बढ़ रहीं सर्पदंश की घटनाएं?

सांप बाह्यतापी जीव है, इसलिए उसपर जलवायु परिवर्तन का सीधा असर पड़ रहा है। बाह्यतापी जीव वे होते हैं, जिनका शारीरिक तापमान सूर्य की रौशनी, पृथ्वी की गर्माहट जैसे बाहरी तत्वों पर निर्भर होता है। बाह्यतापी जीव के शरीर से गर्मी पैदा नहीं होती। यही बजह है कि ऐसे जीवों का रक्त ठंडा होता है।

रामसर साइट बनने के बाद भी बक्सर के गोकुल जलाशय की सूरत नहीं बदली

गोकुल जलाशय केवल एक ऑक्सबो झील नहीं, बल्कि दियारा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जलवायु बफर है। लेकिन संरक्षण की कमी, अवैध निर्माण, प्लास्टिक कचरे और घटते जलस्तर ने इसकी पारिस्थितिकी को कमजोर कर दिया है।

भोजपुर: अवैध रेत खनन, जलवायु परिवर्तन से जूझ रही सोन नदी

स्थानीय किसानों और विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध बालू खनन इस क्षेत्र के पर्यावरणीय पतन में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। सोन में पाये जाने वाली पीली रेत के खनन के कारण नदी तल का अत्यधिक गहरा होना तटवर्ती क्षेत्रों में भूजल स्तर को अप्रत्याशित रूप से नीचे खींच रहा है।

रामसर साइट गोगाबिल झील में प्रवासी पक्षियों का हो रहा शिकार!

उल्लेखनीय हो कि रामसर साइट (Ramsar Site) का दर्जा उन आर्द्रभूमियों (Wetland) को दिया जाता है, जिनका अंतरराष्ट्रीय महत्व होता है। ये दर्जा रामसर कॉन्वेंसन के तहत दिया जाता है, जिसकी शुरुआत 1975 में हुई थी। रामसर साइट का दर्जा देने का असल उद्देश्य महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को संरक्षित करना है।

सोलर आधारित कृषि में क्यों पिछड़ा है बिहार का सीमांचल?

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के नवम्बर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, बिहार में कुल 435.34 मेगावाट सोलर ऊर्जा उत्पन्न हो रहा है, जो देश के कुल सोलर ऊर्जा उत्पादन का सिर्फ 0.33 प्रतिशत है।

सिवान के गांवों में पॉलिथीन कचरे का बढ़ता अंबार, बिहार सरकार का प्रतिबंध ताक पर

पॉलिथीन के इस्तेमाल का असर दोहरा है। अव्वल तो पॉलिथीन निर्माण में जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ग्रीनहाउस गैस निकलता है। ये ग्रीनहाउस गैस, जलवायु परिवर्तन की सबसे बड़ी वजह है। वहीं, पॉलिथीन कचरे के निपटान से भी ग्रीनहाउस गैस निकलती है।

बिहार की खेती पर जलवायु परिवर्तन की मार, अररिया से ग्राउंड रिपोर्ट

अररिया जिले में अनियमित बारिश और बढ़ते तापमान ने किसानों की नींद उड़ा दी है। धान की खेती में दाने कम बन रहे हैं और मखाना उत्पादन भी घटा है, जबकि लागत लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से खेती की उत्पादकता और मिट्टी की गुणवत्ता दोनों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

बिहार में बाढ़ से कैसे जूझ रहे बेज़ुबान मवेशी

बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ के दौरान मवेशियों को नाव पर ले जाना, अस्थायी टेंटों में महीनों तक गुज़ारा करना और बीमारियों से जूझना पशुपालकों की मजबूरी बन जाती है। इसी वजह से इंसानों के साथ-साथ मवेशी भी गहरे मानसिक और शारीरिक संकट से गुजरते हैं।

कोसी कटान से लाचार सहरसा के लोगों का दुःख-दर्द कौन सुनेगा?

बिहार के सहरसा जिले में दर्जनों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

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