
वेटलैंड पोर्टल पर बिहार के 71 हेल्थ कार्ड अपलोड किए गए हैं। बिहार में मौजूद छह रामसर स्थलों में से, पोर्टल पर केवल दो स्थलों कबरताल और गोगाबिल के हेल्थ कार्ड उपलब्ध हैं।

बिहार में खुले वन (लगभग 4.1 प्रतिशत) सबसे अधिक हैं, इसके बाद मध्यम घने वन (करीब 3.5 प्रतिशत) आते हैं, जबकि अत्यंत सघन वन केवल लगभग 0.4 प्रतिशत ही हैं। यानी राज्य में ज्यादातर वन ऐसे हैं जहां पेड़ों की सघनता कम है, जबकि घने और बेहतर गुणवत्ता वाले जंगल बहुत सीमित हैं।

बिहार के किशनगंज जिले के किसान मोहम्मद नइमुद्दीन ने तीन एकड़ जमीन में मक्का की खेती की थी, जिस पर करीब तीन लाख रुपये का खर्च आया। यह रकम उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिए कर्ज लेकर लगाई थी। फसल कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन एक रात आई आंधी और बारिश ने सब […]

बेलागोठ के नवदम्पत्ति ओमप्रकाश और रिंकू देवी ने दो मौकों पर, जब कोसी में पानी का स्तर ऊपर था, तब नाव के अस्पताल पहुंचने में विलम्ब की वजह से अपने दो अजन्मे बच्चों को खो दिया।

यूनिसेफ़ की रिपोर्ट द स्टेट ऑफ वर्ल्ड चिल्ड्रेन 2024 कहती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चों के सामने गंभीर जोखिम पैदा हो रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनसांख्यिकीय बदलाव, जलवायु संकट और तकनीकी प्रगति का असर 2050 तक दुनिया भर के अनुमानित 2.3 अरब बच्चों के जीवन को प्रभावित कर सकता है।

साल 2010 में कांवर झील में लगभग 60 हजार पक्षी दर्ज किए गए थे, जो 2023 तक घटकर महज 8 हजार पर आ गये।

दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में अभी गेहूँ, सरसों और चने की फसल लहलहा रही है और पकने की अवस्था में है। अगर तेज हवा और बेमौसम बरसात हुई तो फसल पर असर पड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2022 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर देश के प्रत्येक जिले में 75 तालाबों के निर्माण और पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए मिशन अमृत सरोवर योजना शुरू करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकायों का पुनरुद्धार और नए सरोवरों का निर्माण कर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन, बिहार में इस योजना का क्रियान्वयन सवालों के घेरे में है।

बिहार के ग्रामीण इलाकों में क्लाइमेट पर काम कर रहे हिंदी पत्रकारों की सहूलियत के लिए हमने यह ऑनलाइन रिपॉजिटरी बनाया है। इसमें समय-समय पर बिहार से जुड़े क्लाइमेट संबंधी शोध और आंकड़ों को अपडेट किया जाता रहेगा।

ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि बिहार के पटना ज़िले के अस्पतालों में जनवरी 2025 में न्यूमोनिया और छाती में संक्रमण के 20-25% केस दर्ज किये गये थे । बिहार राज्य में तीव्र श्वसन संक्रमण की व्यापकता दर 6.8% है जो कि राष्ट्रीय औसत दर (2.7-2.8%) से कहीं गुना ज़्यादा है।

राज्य का पहला इथेनॉल प्लांट साल 2022 में पूर्णिया में खुला, जिसकी उत्पादन क्षमता 65 किलोलीटर प्रति दिन है। इसके बाद एक-एक कर कई फ़ैक्टरियाँ लगीं। फिलहाल, बिहार में कुल 19 एथनॉल फैक्टरियां चल रही हैं, जिनके साथ तेल मार्केटिंग कंपनियों का करार है। इन फ़ैक्टरियों से वादे के मुताबिक़, एथनॉल का उठाव होने लगा।

काले हिरण की जब बात होती है, तो मुख्य तौर पर राजस्थान व अन्य राज्यों का जिक्र होता है, लेकिन तथ्य ये है कि बिहार में भी काले हिरण पाये जाते हैं। काले हिरण खुले मैदान, घास के मैदान व कम झाड़ियां वाली जगहों में रहना पसंद करते हैं।