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महानंदा बेसिन की नदियों पर तटबंध के खिलाफ क्यों हैं स्थानीय लोग

सीमांचल और पूर्वोत्तर बिहार को बाढ़ के बचाने के मक़सद से सरकार महानंदा बेसिन की नदियों पर 1200 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाने की तैयारी कर रही है।

Aaquil Jawed Reported By Aaquil Jawed |
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Mahananda river

सीमांचल और पूर्वोत्तर बिहार को बाढ़ के बचाने के मक़सद से सरकार महानंदा बेसिन की नदियों पर 1200 किलोमीटर लंबा तटबंध बनाने की तैयारी कर रही है। दैनिक भास्कर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार यह सूबे का सबसे बड़ा तटबंध नेटवर्क होगा, जो पांच चरणों में पूरी होगा। फेज-1 के तहत महानंदा बेसिन के निचले हिस्से में पहले से बने 95 किलोमीटर तटबंध को मजबूत किया गया है, जबकि फेज-2 के तहत महानंदा, रतवा व नागर नदियों पर लगभग 200 किलोमीटर तटबंध का निर्माण किया जाना है। इसी तरह फेज-3, फेज-4 और फेज-5 में 1000 किलोमीटर नये तटबंधों का निर्माण किया जाना है।


लेकिन, कटिहार के कदवा, बलरामपुर और प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र के लोग इन दिनों फेज-2 के तहत निर्माण होने वाले तटबंध के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। स्थानीय नेताओं ने ‘सीमांचल बांध रोको संघर्ष समिति’ और ‘तटबंध रोको संघर्ष समिति फेज-2’ बनाया है। वहीं, एक दूसरा पक्ष भी है, ‘बांध बनाओ संघर्ष समिति’, जो इस प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने के लिए स्थानीय लोगों को जागरूक करने का दावा करता है।

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कदवा प्रखंड की जाजा पंचायत निवासी बुज़ुर्ग मुज़फ्फर हुसैन कहते हैं कि फेज-2 के तहत तटबंध निर्माण होने से उनका गाँव कुरहेला सैलाब में पूरी तरह डूब जाएगा।


गाड़ीवान दिनेश का छह लोगों का परिवार एक बीघा खेत पर निर्भर है। कुछ महीने पहले उनके खेत में लाल झंडा लगा दिया गया। तटबंध उनके खेत से होकर गुज़रेगा। उन्हें नहीं पता कि खेत चले जाने के बाद आगे वह परिवार का गुजारा कैसे करेंगे। वही हाल ग्रामीण शमशीर आलम का है। शमशीर की मोबाइल की दुकान और उनका 40 डिसमिल खेत तटबंध में चला जाएगा।

बीते रविवार, 19 फ़रवरी को स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने ‘तटबंध रोको संघर्ष समिति फेज-2’ के बैनर तले कुजीबना घाट पर इसको लेकर एक विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों के अलावा कांग्रेस विधायक शकील अहमद खान, AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान, पूर्व राजद विधायक अब्दुस सुब्हान पहुंचे। इस प्रदर्शन में आए स्थानीय लोग कहते हैं कि तटबंध से ज़्यादा इलाके को कुजीबना और रईंयाँपुर ब्रिज की ज़रूरत है।

2017 के प्रलयकारी बाढ़ में 24 घंटे के अंदर महानंदा तटबंध सात जगह टूटने की घटना सामने आई थी। कदवा प्रखंड के कचौड़ा और शिवगंज गांव के पास ग्रामीणों द्वारा बांध को काट दिया गया था जिसके बाद दो गांव के लोग आमने-सामने हो गए थे।

कदवा के झौव्वा-गुठैली, मीनापुर, आजमनगर प्रखंड के मरही, कटगांव पंचायत के धबौल, प्राणपुर प्रखंड के शिशियाबाड़ी गांव में तटबंध टूट जाने की घटना सामने आई थी। तटबंध टूट जाने से बड़ै पैमाने पर फसल और जानमाल का नुक़सान हुआ था।

जिसके बाद सभी जगहों पर तटबंधों को दोबारा बना दिया गया लेकिन कचौड़ा और शिवगंज में ग्रामीणों ने दोबारा तटबंध का निर्माण होने नहीं दिया।

सीमांचल बांध रोको संघर्ष समिति के इंजीनियर शाह फैसल और डॉ. एम. आर. हक़ कहते हैं कि क्षेत्र में पहले से ही तटबंध बना हुआ है, लेकिन इससे बाढ़ का कोई निदान नहीं हुआ है, फिर आगे तटबंध बनाने की क्या ज़रूरत है।

वहीं, कांग्रेस से कदवा के विधायक शकील अहमद खान कहते हैं कि इस प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया है और यह प्रदर्शन जागरूकता के मक़सद से किया गया है। उनके अनुसार, सोमवार 20 फ़रवरी को इसका जायज़ा लेने एक टीम आनी थी, लेकिन बुधवार को खबर की तैयारी तक ऐसे कोई टीम नहीं आई।

दूसरी तरफ, बांध बनाओ संघर्ष समिति के सचिव आशीष कुमार सिंह मानते हैं कि बांध बनना जनता के लिए हितकारी साबित होगा और यह सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है। यह योजना सीमांचल के विकास के लिए हितकारी साबित होगी।

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Aaquil Jawed is the founder of The Loudspeaker Group, known for organising Open Mic events and news related activities in Seemanchal area, primarily in Katihar district of Bihar. He writes on issues in and around his village.

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