
यूनिसेफ़ की रिपोर्ट द स्टेट ऑफ वर्ल्ड चिल्ड्रेन 2024 कहती है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बच्चों के सामने गंभीर जोखिम पैदा हो रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनसांख्यिकीय बदलाव, जलवायु संकट और तकनीकी प्रगति का असर 2050 तक दुनिया भर के अनुमानित 2.3 अरब बच्चों के जीवन को प्रभावित कर सकता है।

साल 2010 में कांवर झील में लगभग 60 हजार पक्षी दर्ज किए गए थे, जो 2023 तक घटकर महज 8 हजार पर आ गये।

दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में अभी गेहूँ, सरसों और चने की फसल लहलहा रही है और पकने की अवस्था में है। अगर तेज हवा और बेमौसम बरसात हुई तो फसल पर असर पड़ेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2022 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर देश के प्रत्येक जिले में 75 तालाबों के निर्माण और पुराने तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए मिशन अमृत सरोवर योजना शुरू करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल निकायों का पुनरुद्धार और नए सरोवरों का निर्माण कर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन, बिहार में इस योजना का क्रियान्वयन सवालों के घेरे में है।

बिहार के ग्रामीण इलाकों में क्लाइमेट पर काम कर रहे हिंदी पत्रकारों की सहूलियत के लिए हमने यह ऑनलाइन रिपॉजिटरी बनाया है। इसमें समय-समय पर बिहार से जुड़े क्लाइमेट संबंधी शोध और आंकड़ों को अपडेट किया जाता रहेगा।

ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि बिहार के पटना ज़िले के अस्पतालों में जनवरी 2025 में न्यूमोनिया और छाती में संक्रमण के 20-25% केस दर्ज किये गये थे । बिहार राज्य में तीव्र श्वसन संक्रमण की व्यापकता दर 6.8% है जो कि राष्ट्रीय औसत दर (2.7-2.8%) से कहीं गुना ज़्यादा है।

राज्य का पहला इथेनॉल प्लांट साल 2022 में पूर्णिया में खुला, जिसकी उत्पादन क्षमता 65 किलोलीटर प्रति दिन है। इसके बाद एक-एक कर कई फ़ैक्टरियाँ लगीं। फिलहाल, बिहार में कुल 19 एथनॉल फैक्टरियां चल रही हैं, जिनके साथ तेल मार्केटिंग कंपनियों का करार है। इन फ़ैक्टरियों से वादे के मुताबिक़, एथनॉल का उठाव होने लगा।

काले हिरण की जब बात होती है, तो मुख्य तौर पर राजस्थान व अन्य राज्यों का जिक्र होता है, लेकिन तथ्य ये है कि बिहार में भी काले हिरण पाये जाते हैं। काले हिरण खुले मैदान, घास के मैदान व कम झाड़ियां वाली जगहों में रहना पसंद करते हैं।

मुज़फ्फ़रपुर जिले के कटरा प्रखंड के उमेश सहनी पिछले 50 वर्ष से मछली कारोबार से जुड़े हैं। बताते हैं कि खेतों में यूरिया, फॉस्फेट और क्लोरपाइरीफॉस जैसे कीटनाशकों का छिड़काव बाढ़ के पानी के साथ बहकर चौरों में पहुंच जाता है। घोंघा बेहद संवेदनशील प्राणी है। पानी का पीएच थोड़ा बदल जाए या ऑक्सीजन का स्तर गिर जाए, तो वह तुरंत मर जाता है।

पिछले साल अगस्त में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, 1901 से 2022 तक के अधिकतम तापमान और बारिश के आंकड़े सभी जिलों में अधिकतम तमापन में बढ़ोतरी के संकेत देते हैं। वहीं, बारिश के पैटर्न में आम तौर पर गिरावट दिख रही है। जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल के जलवायु अनुमान बताते हैं कि 2070 तक ज़्यादातर जिलों में अधिकतम तापमान में 2 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही मानसून और सर्दियों में बारिश के पैटर्न में भी उतार-चढ़ाव होगा।

बिहार के राजगीर के ऐतिहासिक और बहु-धार्मिक महत्व वाले गर्म जलकुंड आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं। घटती जलधाराएँ, गिरता भूजल स्तर, कम होती वर्षा और बढ़ते बोरवेल इन प्राकृतिक तापीय स्रोतों के लिए खतरा बन गए हैं। वैज्ञानिक अध्ययन भी संकेत दे रहे हैं कि यदि स्थानीय स्तर पर भूजल रिचार्ज नहीं हुआ, तो इन पवित्र कुंडों का भविष्य असुरक्षित हो सकता है।

इंडियन बर्ड कंजर्वेशन नेटवर्क के बिहार के को-ऑर्डिनेटर व बर्ड एक्सपर्ट अरविंद मिश्रा ने बताया कि इस बार भागलपुर के कदवा दियारा में गरुड़ के 130 घोंसले मिले हैं। गरुड़ का अंतिम आंकड़ा कुछ दिनों में जारी किया जाएगा। घोंसलों की बात करें, तो पिछली बार के मुकाबले इस बार उनकी संख्या कम है। पिछली बार की गणना में 160 घोंसले मिले थे।

कटिहार के शाज़ फाउंडेशन के संस्थापक इन्तेसार आलम कहते हैं कि बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य की जांच तक की सुविधा नहीं होने के कारण ये समस्या अक्सर अनदेखी रह जाती है।

वित्तवर्ष 2023-2024 में बिहार में 42.7 हेक्टेयर में केले की खेती हुई जिससे 1903 टन केले का उत्पादन हुआ। वहीं, समस्तीपुर की बात करें, तो यहां 2.41 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों ने केले की खेती की, जिससे 111.34 टन केला उत्पादित हुआ, जो राज्य के कुल उत्पादन का 5.9% है।

बिहार की ताज़ा आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के आँकड़ों के मुताबिक, राज्य में पिछले पांच वर्षों में कुत्तों के काटने के मामले दस गुना बढ़ गए हैं। वर्ष 2021-22 में 28,725 लोग कुत्तों के हमले में ज़ख़्मी हुए थे, साल 2024-25 में बढ़कर 2,83,274 हो गया। यानी राज्य में हर दिन औसतन 776 लोगों को कुत्ते काट रहे हैं।