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अररियाः पुल व पक्की सड़क न होने से पेरवाखोरी के लोग नर्क जैसा जीवन जीने को मजबूर

लोगों ने बताया कि बारिश के मौसम में लगभग 1 किलोमीटर पानी में घुसकर लोगों को आना-जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा दिक्कत यहां के बच्चों को स्कूल जाने में होती है।

ved prakash Reported By Ved Prakash |
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बिहार के अररिया में तरोना भोजपुर पंचायत स्थित पेरवाखोरी गांव के वार्ड संख्या 11 में पुल व सड़क नहीं होने की वजह से लोगों को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, थोड़ी ही दूर पर लगभग हर जगह सड़क बनी हुई है। लेकिन, वार्ड नंबर 11 के लोगों के लिए ना तो सड़क है ना ही पुल।

मुख्य सड़क से वार्ड नंबर 11 जाने के लिए बीच में एक छोटा सा धार पड़ता है, जिसमें साल भर पानी लगा रहता है। आने-जाने के लिए लोगों ने आपसी सहयोग से बांस की चचरी का पुल बनाया हुआ है। स्थानीय वार्ड सदस्य दिलीप कुमार बताते हैं कि वार्ड नंबर 11 के लोग नर्क जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि जनप्रतिनिधियों को इन सबसे कोई मतलब नहीं है।

यहां के लोगों की समस्या तब बढ़ जाती है, जब आने-जाने का एकमात्र साधन चचरी पुल भी टूट जाता है। राशन-पानी से लेकर मवेशियों के चारा तक लाने में दिक्कत होने लगती है। छोटे बच्चों के डूबने का खतरा हमेशा बना रहता है। स्थानीय ग्रामीण रंजीत पासवान बताते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी मरीज व गर्भवती महिलाओं को होती है, क्योंकि यहां एंबुलेंस का आना भी मुश्किल हो जाता है।


लोगों ने बताया कि सड़क व पुल बन जाने से पलासी, कूढ़ेली, धरमगंज कालियागंज, कांखुड़िया और बकानिया घाट जाने में लोगों को काफी सुविधा हो जायेगी। इस कच्ची सड़क की लगभग लंबाई 5 किलोमीटर है। सड़क बन जाने से लोगों को लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।

वार्ड संख्या 11 के ही दलाल सिंह और सरयू प्रसाद ने बताया कि चुनाव के वक्त नेता आते हैं और झूठा आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है।

लोगों ने बताया कि बारिश के मौसम में लगभग 1 किलोमीटर पानी में घुसकर लोगों को आना-जाना पड़ता है। बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा दिक्कत यहां के बच्चों को स्कूल जाने में होती है।

समस्या को लेकर अररिया विधायक के कार्यालय ने मैं मीडिया को बताया कि इलाके में आस-पास लगभग कई सड़क बन चुकी है। उन्होंने कहा कि वार्ड संख्या 11 के ग्रामीणों की समस्या भी उनके संज्ञान में है, जल्द ही वहां भी निर्माण कार्य किया जाएगा।

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अररिया में जन्मे वेद प्रकाश ने सर्वप्रथम दैनिक हिंदुस्तान कार्यालय में 2008 में फोटो भेजने का काम किया हालांकि उस वक्त पत्रकारिता से नहीं जुड़े थे। 2016 में डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कदम रखा। सीमांचल में आने वाली बाढ़ की समस्या को लेकर मुखर रहे हैं।

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