Main Media

Seemanchal News, Kishanganj News, Katihar News, Araria News, Purnea News in Hindi

Support Us

किशनगंज: सऊदी अरब में सड़क दुर्घटना में मृत कोचाधामन के शाह आलम की लाश गांव पहुंची

मृतक के परिजनों को मुआवजे के सवाल पर उन्होंने कहा कि दुर्घटना का शिकार हुए श्रमिकों को राज्य सरकार के श्रम संसाधन विभाग की तरफ से 1 लाख 25 हज़ार रुपये दिये जाते हैं। जल्द ही पीड़ित परिवार को यह रकम दिलाने का प्रयास करेंगे। साथ ही नाडेक कंपनी की तरफ से इंश्योरेंस की रकम भी मिलने की उम्मीद है।

Avatar photo Reported By Amit Singh |
Published On :

सऊदी अरब के शहर जेद्दाह में सड़क दुर्घटना का शिकार हुए किशनगंज के शाह आलम की लाश उनके गांव रसूलगंज लाइ गई। बीते 31 अक्टूबर को कोचाधामन प्रखंड अंतर्गत नज़रपुर पंचायत के रसूलगंज निवासी शाह आलम की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। लाश को भारत लाने में करीब 17 दिनों का समय लगा। मृतक शाह आलम सऊदी अरब में नाडेक नाम की कंपनी में काम करते थे।

परिजनों ने बताया कि मृतक का विवाह डेढ़ साल पहले ही हुआ था और उनकी 9 महीने की एक बेटी है। शाह आलम मृत्यु के 25 दिनों पहले ही सऊदी अरब गए थे। मृतक के भाई ज़ुलक़रनैन ने बताया कि उनके भाई ने सऊदी अरब जाने से पहले काफी क़र्ज़ लिया था। घर में अब पत्नी और छोटी बेटी है जिसके भरण पोषण और बाकी खर्चों के लिए परिवार वाले राज्य सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगा रहे हैं।

शाह आलम की मौत की खबर मिलने पर परिजनों ने पूर्व विधायक मुजाहिद आलम से संपर्क किया और लाश को गांव लाने के लिए उनसे मदद मांगी। परिजनों ने बताया कि मुजाहिद आलम ने तत्परता दिखाते हुए लाश को निजी खर्च पर एयरपोर्ट से मृतक के पैतृक गांव मंगवाया।


कोचाधामन के पूर्व विधायक और जदयू नेता मुजाहिद आलम ने बताया कि रसूलगंज निवासी शाह आलम की मौत की सूचना मिलने पर उन्होंने जेद्दाह में रह रहे इलाके के कुछ लोगों से बात की और सऊदी अरब में मौजूद भारतीय दूतावास के सहयोग से लाश किशनगंज के रसूलगंज गांव लाइ गई।

मृतक के परिजनों को मुआवजे के सवाल पर उन्होंने कहा कि दुर्घटना का शिकार हुए श्रमिकों को राज्य सरकार के श्रम संसाधन विभाग की तरफ से 1 लाख 25 हज़ार रुपये दिये जाते हैं। जल्द ही पीड़ित परिवार को यह रकम दिलाने का प्रयास करेंगे। साथ ही नाडेक कंपनी की तरफ से इंश्योरेंस की रकम भी मिलने की उम्मीद है।

Also Read Story

“बिहार में कुत्ता और नेता एक बराबर है”- सहरसा जंक्शन पर बिहार के प्रवासी मज़दूरों ने सरकार से नाराज़गी की वजह बताई

कर्नाटक के विजयपूरा गोदाम हादसे में समस्तीपुर के 7 लोगों की मौत

क्रिकेट वर्ल्ड कप के गम के बीच मत भूलिए कि आठ दिन से 41 मज़दूर सुरंग में फंसे हैं

कम मजदूरी, भुगतान में देरी – मजदूरों के काम नहीं आ रही मनरेगा स्कीम, कर रहे पलायन

किशनगंज: रेलवे स्टेशन से सुरक्षा बलों ने तीन नाबालिग बच्चों को किया रेस्क्यू

बिहार से पलायन का दर्दनाक मंज़र, ट्रेन में ठुंस कर जा रहे दिल्ली-पंजाब

बंगाल के श्रीकांत दो भयंकर हादसों में बाल-बाल बचे, ट्रेन हादसे में हुए घायल

ओडिशा ट्रेन हादसे में बचकर आई नाबालिग बच्ची से अधिकारी ने पूछे ऊल-जुलूल सवाल

अररिया के बच्चे जा रहे थे मदरसा, महाराष्ट्र पुलिस ने बताया तस्करी

सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

Support Us

Amit Kumar Singh, a native of Kishanganj, Bihar, holds a remarkable 20-year tenure as a senior reporter. His extensive field reporting background encompasses prestigious media organizations, including Doordarshan, Mahua News, Prabhat Khabar, Sanmarg, ETV Bihar, Zee News, ANI, and PTI. Notably, he specializes in covering stories within the Kishanganj district and the neighboring region of Uttar Dinajpur in West Bengal.

Related News

सुडान में मौत से नजर मिलाकर लौटे सपन ने सुनाई हैरतअंगेज दास्तां

जीवन यापन के लिए अररिया में ड्राम बेच रहे मध्यप्रदेश के बंजारे

“2-4 नारियल कम बिकेगा, पर जान तो बची रहेगी”

नागालैंड में कटिहार के चार मजदूरों की मौत

Pune में स्लैब गिरने से Katihar के पांच मजदूरों की मौत

कश्मीर में मजदूरों की हत्या: बेहतर जिंदगी, मकान का सपना रह गया अधूरा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Posts

Ground Report

क़र्ज़, जुआ या गरीबी: कटिहार में एक पिता ने अपने तीनों बच्चों को क्यों जला कर मार डाला

त्रिपुरा से सिलीगुड़ी आये शेर ‘अकबर’ और शेरनी ‘सीता’ की ‘जोड़ी’ पर विवाद, हाईकोर्ट पहुंचा विश्व हिंदू परिषद

फूस के कमरे, ज़मीन पर बच्चे, कोई शिक्षक नहीं – बिहार के सरकारी मदरसे क्यों हैं बदहाल?

आपके कपड़े रंगने वाले रंगरेज़ कैसे काम करते हैं?

‘हमारा बच्चा लोग ये नहीं करेगा’ – बिहार में भेड़ पालने वाले पाल समुदाय की कहानी