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पलायन का दर्द बयान करते वायरल गाना गाने वाले मज़दूर से मिलिए

इन दिनों एक मजदूर की दर्द भरी आवाज में पलायन के ऊपर गाए गए इस गाने को खूब पसंद किया जा रहा है। इसका वायरल वीडियो आपने किसी ना किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जरूर देखा होगा जिसमें यह मजदूर दो ट्रेनों के बीच खड़ा होकर इस गाने के माध्यम से अपना दुख व्यक्त कर रहा है।

ved prakash Reported By Ved Prakash |
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इन दिनों एक मजदूर की दर्द भरी आवाज में पलायन के ऊपर गाए गए इस गाने को खूब पसंद किया जा रहा है। इसका वायरल वीडियो आपने किसी ना किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जरूर देखा होगा जिसमें यह मजदूर दो ट्रेनों के बीच खड़ा होकर इस गाने के माध्यम से अपना दुख व्यक्त कर रहा है।

इसके बारे में ‘मैं मीडिया’ ने पड़ताल की तो पता चला की यह मजदूर अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड के बिशनपुर पंचायत के बिशनपुर वार्ड नं0 12 का रहने वाला है। इसकी जिंदगी के बारे में और जानने के लिए मैं मीडिया की टीम उसके घर पहुंची।

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इस मजदूर का नाम मोहम्मद मुहर्रम है। इसकी आवाज में जो दर्द है वह दरअसल इसकी असल जिंदगी की कहानी को ही बयां करता है। मुहर्रम ने आठवीं तक कि पढ़ाई की है। उसके पिता की मृत्यु एक सड़क दुर्घटना में हो गई जिसके बाद मोहर्रम के कंधों पर तीन छोटे भाई बहन की जिम्मेदारी आ गई। उसको परिवार का भरण पोषण करने के लिए मजबूरन हरियाणा के सोनीपत के मुरथल गांव में मजदूरी करने जाना पड़ा।


पटरी पर गाने वाले वायरल वीडियो के बारे में पूछने पर मोहम्मद मोहर्रम ने बताया कि वह हाल में ही हरियाणा से अपने घर सिमराहा स्टेशन पहुंचा था जहां पर हजारों की संख्या में ट्रेन में उसको अपने जैसे प्रवासी मजदूर दिखे और उनका दर्द उसे बिल्कुल अपने जैसा महसूस हुआ। उसी समय उसने गाने के माध्यम से इसको बाकी जनता और सरकार तक पहुंचाने का फैसला किया।

वहीं बिशनपुर के मुखिया सत्य नारायण सिंह से हमने इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि उनके इलाके में पलायन बहुत बड़ी समस्या है। उनका कहना है कि इस इलाके में सबसे बड़ी कैश क्रॉप मकई है और यह रॉ मैटीरियल के रूप में महाराष्ट्र पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य में जाती है, क्योंकि यहां कोई फैक्ट्री नहीं है। अगर यहीं पर फैक्ट्री खुल जाए तो हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। वह चिंता जताते हुए कहते हैं कि गांव बहुत तेज रफ्तार से समाप्त हो रहा है क्योंकि यहां लगभग 70% लोग मजदूरी पर ही निर्भर है जिनको काम के लिए शहर पलायन करना पड़ता है।

बरहाल मजदूर मोहम्मद मोहर्रम के दर्द भरी आवाज वाला गाना फिलहाल तो लोगों को खूब पसंद आ रहा है, जो कि बिहार से हो रहे पलायन की असली कहानी बयां करता है, लेकिन पलायन का यह दर्द असल में कब दूर होगा फिलहाल इसका किसी के पास कोई ठोस जवाब नहीं है।

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अररिया में जन्मे वेद प्रकाश ने सर्वप्रथम दैनिक हिंदुस्तान कार्यालय में 2008 में फोटो भेजने का काम किया हालांकि उस वक्त पत्रकारिता से नहीं जुड़े थे। 2016 में डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में कदम रखा। सीमांचल में आने वाली बाढ़ की समस्या को लेकर मुखर रहे हैं।

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