Thursday, August 18, 2022

Exclusive: शादी की आतिशबाजी को पाक की जीत से जोड़ने के पीछे बजरंग दल

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Umesh Kumar Ray
Umesh Kumar Ray started journalism from Kolkata and later came to Patna via Delhi. He received a fellowship from National Foundation for India in 2019 to study the effects of climate change in the Sundarbans. He has bylines in Down To Earth, Newslaundry, The Wire, The Quint, Caravan, Newsclick, Outlook Magazine, Gaon Connection, Madhyamam, BOOMLive, India Spend, EPW etc.

24 अक्टूबर को भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच था, लेकिन दक्षिणपंथी पार्टी के समर्थक और ट्रोल्स के लिए ये मुसलमानों की वफादारी की परीक्षा का भी दिन था।

क्रिकेट मैच में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान ने भारत को हरा दिया, तो देश की क्रिकेट प्रेमी जनता उदास हो गई। लेकिन इन्हीं में से कुछ अतिवादियों के कान खड़े हो गये। वे उन मोहल्लों की शिनाख्त करने लगे, जहां किन्हीं कारणों से आतिशबाजी हो रही थी।

ऐसे कुछ अतिवादी किशनगंज में भी सक्रिय थे। इन्हीं में से एक था गणेश झा। गणेश झा किशनगंज शहर का निवासी है।

उसने रात 11 बजकर एक मिनट से 11 बजकर 11 मिनट के बीच यानी 10 मिनट के अंदर चार फेसबुक पोस्ट लिख मारा। पहला पोस्ट उसने रात 11.01 बजे डाला, जिसमें लिखा- “कुछ अभी बाप की जीत के जश्न में पटाखे फोड़ रहे हैं।”

Bajrang Dal worker Ganesh Jha's facebook post

दूसरा पोस्ट उसने 11.04 बजे डाला। इस पोस्ट में लिखा – “चिंता मत करो, जहां जहां पटाखे फूट रहे हैं, वहीं एनआरसी सबसे पहले लागू होगा।”

रात 11.06 बजे उसने तीसरा पोस्ट लिखा- “आज साबित कर दिये कि उस रात पड़ोस वाला ही आया था, जिस रात तुम (तुम्हारा जन्म हुआ था) हुए थे।”

आखिरी पोस्ट गणेश ने रात 11.11 बजे लिखा – “जिस बाप की जीत का जश्न मना रहे हो बोलो कैसे स्वीकार करें तुम लोगों को।”

ऐसा ही पोस्ट किशनगंज हलचल और किशनगंज टाइम्स न्यूज़ नाम के एक फेसबुक ग्रुप में भी हुआ। किशनगंज हलचल ग्रुप में लगभग 82 हज़ार मेंबर हैं और पेज के फॉलोअर्स की संख्या लगभग 38 हजार है। 

Kishanganj Halchal Facebook group

अब आप समझिए किशनगंज हलचल पेज और गणेश के कनेक्शन को। दरअसल, गणेश झा किशनगंज हलचल पेज का एडमिन है। झा के साथ एक और शख्स राजेश श्यामसुखा भी इस पेज का एडमिन है। 

बजरंग दल का सक्रिय कार्यकर्ता है गणेश झा

गणेश झा दक्षिणपंथी संगठन बजरंग दल का सक्रिय सदस्य है और पूर्व में बजरंज दल का जिला संयोजक रह चुका है। गणेश ने भी बातचीत में स्वीकर किया कि वह बजरंग दल से जुड़ा हुआ है।

किशनगंज हलचल और गणेश झा के निजी फेसबुक अकाउंट पर जब ये आपत्तिजनक पोस्ट किया गया, तो उसे लोगों ने हाथोंहाथ लिया और लाइक, शेयर और कमेंट बढ़ते गये। किशनगंज में इसको लेकर कानाफूसी भी शुरू हो गई। बात पुलिस तक पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत इस पर संज्ञान लिया और किशनगंज हलचल पेज चलाने वाले और उन सभी लोगों को थाने में तलब कर लिया। पुलिस ने भी अपने स्तर से इसकी जांच शुरू कर दी। 

जांच में जो बात सामने आई, उससे पता चलता है कि ऐसे लोग किस तरह बिना किसी तथ्य के कुछ भी लिखकर एक समुदाय की ईमानदारी, देशभक्ति को सिरे से खारिज कर सकते हैं।

पुलिस ने जब जांच की, तो मालूम चला कि गणेश ने जिस मोहल्ले में आतिशबाजी की आवाज सुनी थी, वहां शादी थी। जिस वक्त पाकिस्तान ने भारत को हराया था, उस वक्त बारात दुल्हन के घर पहुंची थी और बारात वाले आतिशबाजी कर रहे थे।

मैं मीडिया को इस बात की पुष्टि शाहीद ने की, जिसके मामा की शादी थी और बारात किशनगंज शहर की चूड़ी पट्टी पहुंची थी।

शाहीद बताते हैं

“24 तारीख को मेरे मामा की शादी थी। बारात रात 9 बजे निकली थी और 11 बजे के आसपास चूड़ीपट्टी पहुंची थी। वहां हमलोगों ने खूब आतिशबाजी की। हमें नहीं पता था कि हमारी आतिशबाजी को पाकिस्तान की जीत से जोड़ दिया गया है। बाद में हमें ये मालूम चला। ये दावा पूरी तरह गलत है कि हमलोगों ने पाकिस्तान की जीत पर आतिशबाजी की थी।”

डीएसपी अजीत सिंह ने इस मामले में प्रेस कांन्फ्रेंस कर बताया कि जिन लोगों ने वो पोस्ट किया था, उनसे माफीनामा लिया गया है और साथ ही जुर्माना भी ठोंका गया है।

लेकिन, इस मामले में ज्यादा जानकारी देने से पुलिस अधिकारी बचते रहे। हमने जब किशनगंज थाने में फोन कर इस बारे में जानने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा कि वे मीडिया के साथ बातचीत करने के लिए अधिकृत नहीं हैं। हमने डीएसपी को फोन किया तो, उन्होंने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वे सारी बात पहले ही बता चुके हैं। जब हमने उनसे पूछा कि जिन लोगों से माफीनामा लिया गया, वे कौन हैं, तो उन्होंने उनकी पहचान जाहिर करने से इन्कार कर लिया। ये हमने पूछा कि क्या उन लोगों में गणेश झा भी था, तो उन्होंने न इनकार किया और न ही पुष्टि की। हमने जब उनसे ये पूछा कि इस मामले में माफीनामे की जगह FIR दर्ज क्यों नहीं की गई, तो उन्होंने किसी काम में व्यस्त होने का हवाला देकर फोन काट दिया।

लेकिन, गणेश झा ने स्वीकार किया कि उन्हें थाने बुलाकर माफ़ीनामा लिखवाया गया है। लेकिन, गणेश ने अपनी गलती नहीं मानी। झा ने कहा आ,

“हमने ये नहीं लिखा था कि पाकिस्तान के समर्थक ने पटाखा फोड़ा, लेकिन पटाखे तो फूटे थे। हमने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन आपलोगों ने खुद पर ले लिया। हम कल भी कह रहे थे, आज भी कह रहे हैं कि हमारा पोस्ट किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं था, लेकिन देश और समाज के लिए हमने उसे हटा दिया।”

ये पूछने पर कि क्या आप ये मानते हैं कि ग़लत पोस्ट किया था, गणेश ने ज़वाब दिया, “अगर मुझे लगता कि ग़लत पोस्ट किया है, तो मैं पोस्ट करता ही नहीं।”

बजरंग दल कार्यकर्ता पहले भी कर चुका है भड़काऊ पोस्ट

स्थानीय लोग बताते हैं कि गणेश झा के निजी फेसबुक अकाउंट और किशनगंज हलचल पेज से पूर्व में भी इस तरह के भड़काऊ पोस्ट होते रहे हैं।

किशनगंज हलचल फेसबुक पेज से 16 अक्टूबर को बिना किसी आधिकारिक पुष्टि के पोस्ट किया गया था कि आतंकवादी गतिविधियों के आरोप में दिल्ली से गिरफ्तार किये गये व्यक्ति का फर्जी आई कार्ड बनवाने में किशनगंज के एक सरपंच ने मदद की थी। हालांकि हमने जब एसपी किशनगंज से बात की थी, तो उन्होंने ऐसी किसी सूचना से इनकार किया था।

Kishanganj Halchal's old posts

इसी साल 23 मई को किशनगंज के बहादुरगंज थाना अंतर्गत देशियाटोली हरिजन टोला निवासी लालचंद हरिजन की हत्या कर दी थी, तो किशनगंज ज़िले के दिघलबैंक प्रखंड के बजरंग दल संयोजक गणेश कुमार सिंह ने इसे साम्प्रदायिक रंग देते हुए अपने फेसबुक पेज पर लिखा था – “ये शांतिदूत आराम से किसी हिन्दू की हत्या करने के उपरान्त सभी मामलों को जमीनी मामला बना देते हैं।” बहादुरगंज विधानसभा के AIMIM विधायक के तरफ इशारा करते हुए उसने आगे लिखा था – “आखिर इस प्रकार का मामला पतंग वाले विधायकों के विधानसभा में ही क्यों।”

बाद में पुलिस ने जांच में पाया था कि आशनाई में हत्या को अंजाम दिया गया था, और आरोपित हिन्दू समुदाय के थे। इसके बाद पुलिस ने गणेश सिंह को तलब कर माफीनामा लिखवाया था और मामले को रफा-दफा कर दिया था। आश्चर्य ये भी था कि एसपी कुमार आशीष ने ट्वीट कर माफीनामे की जानकारी दी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया था।

इन मामलों में पुलिसिया कार्रवाई बेहद ढीली रही। इस बार भी पुलिस ने कठोर कार्रवाई की जगह महज माफीनामा लेकर मामले को खत्म कर दिया। इससे जाहिर होता है कि पुलिस खुद भी इस तरह के संवेदनशील मामलों को लेकर गंभीर नहीं है।

यहां ये भी बता दें कि किशनगंज बिहार का इकलौता ज़िला है जहां मुस्लिम आबादी 50 प्रतिशत से अधिक है। सीमांचल का ये जिला दशकों से दक्षिणपंथी संगठनों के निशान पर रहा है।

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