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सीमांचल को साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की प्रयोगशाला बना रहे हिन्दुत्ववादी संगठन!

बिहार के सीमांचल को लम्बे समय से हिन्दुत्ववादी संगठन साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए उर्वर जमीन मानते रहे हैं। गाहे-ब-गाहे ध्रुवीकरण की कोशिश होती भी रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व फिलहाल केंद्र में मंत्री नित्यानंद राय ने साल 2018 में अररिया लोकसभा के लिए हुए उपचुनाव में कहा था कि अगर राजद उम्मीदवार जीत जाता है, तो अररिया आईएसआई का गढ़ बन जाएगा। इस चुनाव में राजद की तरफ से सरफराज आलम चुनाव लड़ रहे थे।

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By: नील माधव, तंज़ील आसिफ और उमेश कुमार राय

बिहार के सीमांचल को लम्बे समय से हिन्दुत्ववादी संगठन साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए उर्वर जमीन मानते रहे हैं। गाहे-ब-गाहे ध्रुवीकरण की कोशिश होती भी रही है। भाजपा के वरिष्ठ नेता व फिलहाल केंद्र में मंत्री नित्यानंद राय ने साल 2018 में अररिया लोकसभा के लिए हुए उपचुनाव में कहा था कि अगर राजद उम्मीदवार जीत जाता है, तो अररिया आईएसआई का गढ़ बन जाएगा। इस चुनाव में राजद की तरफ से सरफराज आलम चुनाव लड़ रहे थे।

इसी चुनाव में राजद की जीत के बाद राजद समर्थकों के जश्न का एक एडिटेड वीडिया वायरल कर ये अफवाह भी फैलाई गई थी कि वहां पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाये गये थे। अब एक बार फिर सीमांचल दक्षिणपंथी संगठनों के निशाने पर आ गया है।    

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विश्व हिन्दू परिषद के बिहार-झारखंड के क्षेत्र संपर्क प्रमुख अशोक कुमार ने रविवार को बिहार के एक मात्र मुस्लिम बाहुल जिले किशनगंज में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा,


किशनगंज में रोहिंग्या मुसलामानों की संख्या बढ़ रही है, बांग्लादेशी घुसपैठ यहां बढ़ रहे हैं।

अशोक कुमार, विश्व हिन्दू परिषद

वे यहीं तक नहीं रुके बल्कि जिले के पूरे मुस्लिम समुदाय को ही कटघरे में खड़ा दिया। उन्होंने कहा,

यहां के स्थानीय मुसलमान उनको (घुसपैठियों) को ज़मीन मुहैया करा रहे हैं। साथ ही उनका पहचान पत्र बनवा कर नागरिकता दिलवाने का काम कर रहे हैं।

अशोक कुमार, विश्व हिन्दू परिषद
Hindutva organizations making Seemanchal a laboratory of communal polarization

आम दिनों में हिन्दुत्ववादी नेता अगर ऐसे बयान देते, तो उसे महत्वहीन टिप्पणी समझ कर नकारा जा सकता था। लेकिन, ये टिप्पणी एक सोची-समझी गहरी रणनीति का हिस्सा लगती है। बिहार की नीतीश सरकार में मंत्री राम सूरत राय ने भी कुछ ऐसी ही टिप्पणी की थी। ऐसे में हाल में दक्षिणपंथी संगठनों की तरफ से सीमांचल में बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को उछालने की अनदेखी नहीं की जा सकती है। ऐसा करना धीमी रफ्तार से आ रहे तूफ़ान को नकारना होगा। मैं मीडिया इस मुद्दे पर सिलसिलेवार स्टोरी प्रकाशित करने जा रहा है। आज इस स्टोरी में हम बताएंगे कि हिन्दुत्ववादी संगठन अचानक इस मुद्दे पर क्यों अतिसक्रिय हो गये हैं।   

पटना हाईकोर्ट का आदेश

दरअसल, पटना हाईकोर्ट ने अपने 18 अगस्त के एक ऑर्डर में बिहार सरकार से कहा है कि उसे डिटेंशन सेंटर बनाने की एक विस्तृत योजना बतानी होगी। साथ ही बिहार में एक ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिससे आम लोग किसी भी संदिग्ध अवैध प्रवासी, खास कर बंगलदेशी के बारे में सुचना दे सकें। इसके साथ ही सरकार को इस मुद्दे पर, खास तौर से सीमावर्ती इलाके में स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों, अखबार और डिजिटल मीडिया की मदद से जागरूकता अभियान चलाना होगा।

Patna High Court Order
Patna High Court Order
Patna High Court Order

इस आदेश के बाद दो दस्तावेज उभर के सामने आए हैं, जो आदेश के सरकार द्वारा अनुपालन की ओर इशारा करते हैं। पहला, किशनगंज के डी.एम. की ओर से जारी चिट्ठी, जो डीआरपीओ को लिखी गई है। इस चिट्ठी में कोर्ट ऑर्डर का हवाला देते हुए यह कहा गया है कि डिजिटल और प्रिंट मीडिया के माध्यम से जिला अंतर्गत विभिन्न स्थानों, खास कर सीमावर्ती इलाकों में निवास कर रहे संदेहास्पद/अवैध प्रवासी व्यक्तियों के बारे में आम लोगों में जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस चिट्ठी को अति आवश्यक समझने का भी निर्देश दिया गया है।

Kishanganj DM's letter

दूसरा, एक आम नोटिस है, जो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर हो रहा था। 29 अगस्त को जारी इस नोटिस पर सिवान के एसपी के हस्ताक्षर थे। इस आम नोटिस में लोगों को यह कहा गया है की अवैध रूप से विदेशी नागरिकों, खासकर बांग्लादेशी नागरिक यदि उनके आसपास रह रहे हैं या किसी प्रकार की ऐसी सूचना हो,  तो वे अपने नजदीकी थाने में सूचित करें।

Siwan SP's notice

कोर्ट के आदेश का बैकग्राउंड

यह आदेश पटना हाईकोर्ट ने एक रिट पिटीशन की सुनवाई करने के क्रम में दिया है। पिटीशन एक बांग्लादेशी महिला की तरफ से वकील उपेंद्र कुमार सिंह ने हाईकोर्ट में अक्टूबर 2020 में दाखिल किया था। पिटीशन के अनुसार, वह महिला साल 2015 में मानव तस्करी के जाल में फंस बांग्लादेश से मुंबई ले जाई जा रही थी, तभी पटना स्टेशन पर जीआरपी ने उसे पकड़ लिया था। उस समय से वह पटना में नारी निकेतन रिमांड होम में रखी गई थी।

Petition in Patna High Court

दिसंबर 2020 से पटना हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शुरू की और उसे वापस बांग्लादेश भेजने का आदेश दिया। दो महिलाओं को जुलाई, 2021 में वापस बांग्लादेश भेज दिया गया। उन दोनों महिलाओं के बांग्लादेश भेज देने के बाद भी यह केस चल रहा है। कोर्ट इसी केस के माध्यम से बिहार सरकार से डिटेंशन सेंटर बनवाना चाहती है।

Deportation

पटना हाईकोर्ट क्यों नहीं खत्म कर रहा मामला?

कानून के जानकार बताते हैं कि जब उन महिलाओं को वापस भेज दिया गया, तो केस को उसी वक्त खत्म हो जाना चाहिए था। इस याचिका में कहीं भी डिटेंशन सेंटर की न मांग की गई थी और न ही ऐसी कोई समस्या पर कोर्ट को ध्यान देने का अनुरोध किया गया था। कलकत्ता हाईकोर्ट के वकील हर्षित आनंद अनुसार, इस केस में जिस दिन उन महिलाओं को वापस भेज दिया गया,  उसके बाद इस केस के चलने का कोई औचित्य नहीं बनता है। उधर, उपेंद्र कुमार सिंह से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस केस के चलने की जानकारी नहीं है।

उपेंद्र कुमार सिंह ने कहा,

दो बांग्लादेशी महिलाएं थीं, जिनमे से एक वापस जाना चाहती थी और एक यहीं रहना चाहती थी। ये बात जब मैंने कोर्ट में कही, तो कहा गया कि अगर वह महिला हिंदू होती, तो उसे यहां रहने देने की संभावना हो सकती थी, लेकिन वह एक मुस्लिम है, इसलिए उसे वापस बांग्लेदेश भेजना होगा।

अवैध प्रवासी, सीमांचल और राजनीति

AIMIM सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी ने कोर्ट के आदेश के बाद ट्वीट कर कहा था – “बिहार सरकार चोर-दरवाज़े से बिहार में NRC लागू कर रही है। अधिकारी आम लोगों से कह रहे हैं कि वो आस-पास रहने वाले ‘विदेशी नागरिक’ और “अवैध प्रवासियो” की सूचना नज़दीकी पुलिस स्टेशन को दें। असम में भी ऐसे ही कानूनी कार्रवाई का दुरूपयोग बड़े पैमाने पर हुआ है।

आगे ओवैसी लिखते हैं –

याद रखिये! ऐसी नीति सिर्फ और सिर्फ समाज में मतभेद, शक और दुश्मनी फैलाने की वजह बनेगी। समाज में अमन को मज़बूत करने के बजाय सरकार उसे कमज़ोर करने में लगी है।

रविवार के प्रेस कॉन्फ्रेंस में विश्व हिन्दू परिषद ने किशनगंज में एक महा हिन्दू पंचायत करने की भी बात कही है। अशोक कुमार ने कहा –

किशनगंज की स्थिति कश्मीर जैसी होती जा रही है, इसके विरोध में आने वाले दिनों में हम एक महा हिन्दू पंचायत का आयोजन करेंगे, जिसमें हजारों की संख्या में हिन्दू किशनगंज की सड़कों पर होगा।  

अशोक कुमार, विश्व हिन्दू परिषद

उधर, बिहार सरकार के राजस्व और भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय ने भी पिछले हफ्ते कहा कि

सीमांचल इलाके में बड़ी संख्या में घुसपैठिए आ रहे हैं। वे यहां बसते जा रहे हैं। स्थानीय दलालों के जरिए बाहरी लोगों को लाकर जमीनें बेची जा रही हैं। सीमांचल में समीक्षा बैठक के दौरान जानकारी मिली थी। बड़ी संख्या में घुसपैठी विदेशी पैसे का इस्तेमाल जमीन खरीदने में कर रहे हैं।

रामसूरत राय, मंत्री, बिहार सरकार

जुलाई में बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान अररिया के फॉरबिसगंज से भाजपा विधायक विद्यासागर केशरी ने कहा था

सीमांचल क्षेत्र में बढ़ते बांग्लादेशी घुसपैठियों के चलते नहरों, सड़कों, तालाबों सहित गैर मजरुआ आम (सरकारी सड़क, पहाड़ आदि की जमीन जिसकी खरीद फरोख्त नहीं हो सकती है) व खास भूमि (सरकारी जमीन जिसकी खरीद फरोख्त हो सकती है) पर अवैध निर्माण कर कब्ज़ा किया जा रहा है। इससे निकट भविष्य में भारी विवाद उत्पन्न हो सकता है। अवैध कब्जा की गई जमीन मुक्त कराने की मांग सदन से करता हूँ।

विद्यासागर केशरी, भाजपा विधायक

ओवैसी की पार्टी के बिहार अध्यक्ष व विधायक अख्तरुल ईमान कहते हैं

ऐसे अनाप शनाप बोलना इनकी नई आदत नहीं है। पूर्व सांसद मरहूम तस्लीमुद्दीन और पूर्व विधायक मरहूम मोहम्मद हुसैन आजाद को भी बांग्लादेशी कहा जाता था। ऐसी अफवाह फैलाने वालों पर प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।

अख्तरुल ईमान, AIMIM विधायक

कटिहार निवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव तौकीर आलम इसे भाजपा का राजनीतिक हथकंडा मानते हैं और साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके मंत्री राम सूरत राय को बर्खास्त करने की मांग करते हैं। तौकीर बताते हैं –

भाजपा ने 20-30 साल पहले भी सीमांचल-कोसी क्षेत्र में ऐसा अभियान चलाया था,  तब तत्कालीन मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे की अध्यक्षता में कांग्रेसी नेताओं ने कटिहार में इसके खिलाफ एक सम्मलेन किया था।  

तौकीर आलम, कांग्रेस

वहीं, जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक मुजाहिद आलम कहते हैं –

सरकार या प्रशासन अगर किसी वैध नागरिक को तंग करेगी, तो हम उसके खिलाफ हैं।” मुजाहिद आगे कहते हैं – “जिन्हें इस आदेश से डर लगता है, उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

मुजाहिद आलम, जदयू

बिहार में भाजपा की महात्वाकांक्षा 

बिहार में भाजपा आज तक अपने दम पर सरकार नहीं बना सकी है। साल 2005 से वह जदयू के साथ गठबंधन सरकार चला रही है और नीतीश कुमार लगातार सीएम बनते रहे हैं। साल 2020 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का एक गुट लगातार मांग कर रहा था कि भाजपा को चुनाव अकेले लड़ना चाहिए। लेकिन, भाजपा में सक्रिय नीतीश लॉबी के मजबूत होने के चलते भाजपा को जदयू के साथ चुनाव लड़ना पड़ा।

हालांकि भाजपा ने लोजपा की मदद से जदयू को कमजोर किया और इसका नतीजा ये निकला कि चुनाव में जदयू की सीटें काफी कम आईं। भाजपा बड़ी पार्टी बनकर उभरी। उस दौरान भी भाजपा नेताओं के एक गुट ने खुलेआम कहना शुरू किया कि भाजपा को सीएम का पद मिलना चाहिए।

इधर, नीतीश कुमार साल 2020 के चुनाव में कह चुके हैं कि ये उनका आखिरी चुनाव है, तो माना जा रहा है कि 2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव में जदयू के पास सीएम का कोई मजबूत चेहरा नहीं होगा। ऐसे में भाजपा अपने उम्मीदवार को आगे बढ़ाएगी और जदयू के साथ इस पर बात नहीं बनती है, तो भाजपा अकेले चुनाव मैदान में उतर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो भाजपा को ऐसी रणनीति पर काम करना होगा, जिससे हिन्दुओं का ध्रुवीकरण हो।

जानकार बताते हैं कि साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए ऐसी जमीन बेहद उर्वरा होती है, जहां मुस्लिम आबादी अधिक है। बिहार के सीमांचल के किशनगंज में मुस्लिमों की तादाद अच्छी खासी है। इसके अलावा दूसरे जिलों में भी ठीकठाक आबादी है। यही वजह है कि हिन्दुत्ववादी संगठनों ने सीमांचल को प्रयोगशाला के तौर पर चुना है। अगर आने वाले दिनों में सीमांचल में भाजपा नेतओं की आवाजाही तेज हो जाए और घुसपैठ का मुद्दा केंद्र में आ जाए, तो कोई आश्चर्य नहीं।

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