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BPSC में 77वां रैंक हासिल कर ऑडिट ऑफ़िसर बनी अररिया की बेटी शादमा शौकत

अररिया जिले के जोकीहाट प्रखंड स्थित काशीबाड़ी गांव की शादमा शौकत ने बीपीएससी ऑडिटर परीक्षा में 77वां रैंक लाया है और उनका चयन ऑडिट ऑफ़िसर के पद पर हुआ है। सादमा शौकत ने जेनरल कैटेगरी में यह रैंक हासिल किया है।

syed jaffer imam Reported By Syed Jaffer Imam |
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shadma shaukat

अररिया जिले के जोकीहाट प्रखंड स्थित काशीबाड़ी गांव की शादमा शौकत ने बीपीएससी ऑडिटर परीक्षा में 77वां रैंक लाया है और उनका चयन ऑडिट ऑफ़िसर के पद पर हुआ है। सादमा शौकत ने जेनरल कैटेगरी में यह रैंक हासिल किया है।


शादमा, शौकत अली की बेटी और बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के पूर्व मंत्री मंजर आलम की भतीजी हैं।

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उनके पिता शौकत अली ने बताया कि उसकी प्राथमिक पढ़ाई जोकीहाट में ही हुई है। उसने प्रोजेक्ट कन्या विद्यालय से मैट्रिक फर्स्ट डिवीजन से पास किया था। वह उस स्कूल से मैट्रिक पास करने वाली पहली छात्रा थी। उसके बाद सादमा ने अररिया स्थित मिलिया कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की और वहां भी फर्स्ट डिवीजन हासिल किया। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए सादमा ने पटना यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और 2020 में बीकॉम किया। ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी से उसने एमकॉम किया है।


इसके साथ ही शादमा ने पटना यूनिवर्सिटी से B.Ed की भी शिक्षा हासिल की है। पिता ने बताया कि अभी बीपीएससी द्वारा आयोजित शिक्षक प्रतियोगिता की परीक्षा भी वह दे रही है।

उन्होंने आगे बताया कि साधना बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज है। अपने सात भाई बहनों में वह तीसरे नंबर पर है। शादमा के दो भाई इंजीनियर हैं और एक छोटी बहन पीएचडी कर रही है।

वह कहते हैं, “हमारा परिवार राजनीतिक माहौल से जुड़ा है। लेकिन, मैं शुरू से ही खेती-बाड़ी से जुड़ा हुआ हूं और किसान के रूप में मैं अभी तक कार्यरत हूं। मैंने बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता दी है।”

उन्होंने बताया कि शादमा यूपीएससी की तैयारी भी कर रही है।

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सैयद जाफ़र इमाम किशनगंज से तालुक़ रखते हैं। इन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से जन संचार एवं पत्रकारिता में ग्रैजूएशन करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता (पीजी) की पढ़ाई की। 'मैं मीडिया' के लिए सीमांचल के खेल-कूद और ऐतिहासिक इतिवृत्त पर खबरें लिख रहे हैं। इससे पहले इन्होंने Opoyi, Scribblers India, Swantree Foundation, Public Vichar जैसे संस्थानों में काम किया है। इनकी पुस्तक "A Panic Attack on The Subway" जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई थी। यह जाफ़र के तखल्लूस के साथ 'हिंदुस्तानी' भाषा में ग़ज़ल कहते हैं और समय मिलने पर इंटरनेट पर शॉर्ट फिल्में बनाना पसंद करते हैं।

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