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निर्माण के दो वर्षों में ही जर्जर हुई सड़क और पुलिया हादसों को दे रही दावत

करीब 4 किलोमीटर लंबी यह सड़क सदापुर गल्लाकट्टा चौक से शेखपुरा गांव तक जाती है। 10 से अधिक गांवों के लोग इस सड़क का इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत यह सड़क 2018 में ही बनकर तैयार होनी थी लेकिन इसे 2021 में बनाया गया।

पुल न बनने पर तीन गांव के ग्रामीणों ने किया लोकसभा चुनाव के बहिष्कार का एलान

कटिहार जिले के गोगरा, ललगांव और पीरगंज गांव के लोग सालों से एक अधूरे पल के निर्माण की आस में बैठे हैं। नेताओं के खोखले वादों से तंग आकर ग्रामीणों ने पुल न बनने की सूरत में आने वाले लोकसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करने की ठान ली है।

नदी पर पुल नहीं, नेपाल की फायर बिग्रेड गाड़ी ने बुझायी किशनगंज में लगी आग

किशनगंज जिले के दिघलबैंक प्रखंड में एक गांव है, जिसका नाम वोटरलिस्ट से लेकर मतदान केंद्रों की संख्या से संबंधित सरकारी कागजों में पहले नंबर पर आता है। मगर, यह गाँव आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण नेपाल से अपनी जरूरतों को पूरा करता है।

सीमांचल की बसों में यात्री बेनामी बस टिकट से यात्रा करने को मज़बूर

यात्री बसें सीमांचल की अर्थव्यवस्था का मज़बूत पाया हैं। इससे एक जिले से दूसरे जिले तक की पहुँच आसान होती है। लेकिन, इन बसों पर किराये के बदले दी जाने वाली बेनामी यात्रा टिकट एक अलग कहानी बयाँ करती है।

15 साल पहले बना शवगृह आज तक नहीं खुला, खुले में होता है अंतिम संस्कार

सहरसा नगर निगम क्षेत्र के सुबेदारी टोला में स्थित मुक्तिधाम विद्युत शव दाह गृह का निर्माण 15 साल पहले उस समय के विधायक रहे संजीव झा ने कराया था। इसमें तीन बड़े-बड़े कमरे, 6 बर्निंग शेड, ट्यूबवेल, सोलर पैनल व लाइट जैसी सभी सुविधाओं के लिए लाखों रुपये खर्च किये गये। ‌

नई पशु जन्म नियंत्रण नियमावली के लिए कितना तैयार है पूर्णिया

बीते दिनों केन्द्र सरकार ने पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 अधिसूचित कर दी है। यह नियमावली उच्चतम न्यायालय में दायर रिट याचिका में जारी दिशा-निर्देशों के आलोक में अधिसूचित की गई है।

विकास को अंगूठा दिखा रही अररिया की यह अहम सड़क

अररिया चांदनी चौक से लेकर कोर्ट रेलवे स्टेशन तक जाने वाली इस सड़क के बीच कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय भी हैं। लेकिन, सरकारी उदासीनता के कारण यह सड़क पिछले डेढ़ दशकों से टूटी फूटी हालत में है।

सुपौल: 16 साल से रास्ते का इंतजार कर रहा विद्यालय, सीएम का दौरा भी बेअसर

सुपौल जिले की माल्हनी पंचायत के वार्ड नंबर 10 यानी सिमरा टोला स्थित प्राथमिक विद्यालय में जाने के लिए पगडंडी वाला रास्ता है। बरसात के मौसम में उस रास्ते से जाने में काफी कठिनाई होती है।

अररिया: दशकों से बाँसुरी बेच रहे ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से वंचित

कोसी की पुरानी धार के किनारे बसा लहटोरा गांव बांसुरी वाले मोहल्ले के रूप में जाना जाता है। यहां लगभग 20 परिवार रहते हैं, ये लोग बाँसुरी बनाकर घूम घूम कर बेचते हैं।

बिहार में 45,793 जल स्रोत, लेकिन 49.8 % इस्तेमाल के लायक नहीं

बिहार में कुल 45,793 जल स्रोत हैं, जिनमें तालाब, टैंक, झील, रिजर्वायर आदि शामिल हैं, लेकिन इनमें से 49.8 प्रतिशत यानी 22799 जलाशयों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

कटिहार: चार सालों से पुल का काम अधूरा, बरसात में डूब जाता है पुल का ढांचा

कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड अंतर्गत महेशपुर पंचायत में एक पुल पिछले तीन सालों से अधूरे ढाँचे पर खड़ा है।

अररिया नगर परिषद क्षेत्र में आवास योजना के सैकड़ों मकान अधूरे

अररिया नगर परिषद के वार्ड नंबर 20 के रहने वाले मो मंजूर आलम आवास योजना के लाभुक हैं, लेकिन उन्हें दो साल में सिर्फ एक किस्त मिली है।

पूर्णिया बस स्टैंड पर टॉप क्लास यात्री सुविधा दूर की कौड़ी

बस स्टैंड का प्रबंधन स्थानीय स्वशासी संस्थाएँ जैसे नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम की जिम्मेदारी है। ये सभी संवैधानिक संस्थाएँ हैं, जिसका संविधान के भाग नौ (अ) में प्रावधान किया गया है।

एक अदद सड़क के लिए तरसता नेपाल सीमा पर बसा यह गांव

नेपाल सीमा पर बसा अररिया जिले का महादलित गाँव ग्वारपुछरी आज भी एक अदद सड़क के लिए तरस रहा है, इस गाँव में जाने के लिए गड्ढों से भरी करीब ढाई किलोमीटर लम्बी कच्ची सड़क ही एक मात्र साधन है।

भरगामा का 39 वर्ष पहले बना महाविद्यालय खंडहर में तब्दील

जिले के भरगामा प्रखंड स्थित एक मात्र महाविद्यालय अब खंडहर में तब्दील हो गया है। साथ ही, महाविद्यालय की जमीन पर भूदाता के परिजनों ने कब्जा कर रखा है।

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बिहार-बंगाल सीमा पर वर्षों से पुल का इंतज़ार, चचरी भरोसे रायगंज-बारसोई

अररिया में पुल न बनने पर ग्रामीण बोले, “सांसद कहते हैं अल्पसंख्यकों के गांव का पुल नहीं बनाएंगे”

किशनगंज: दशकों से पुल के इंतज़ार में जन प्रतिनिधियों से मायूस ग्रामीण