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सहरसा का बाबा कारू खिरहर संग्रहालय उदासीनता का शिकार

आजादी से पहले बना पुस्तकालय खंडहर में तब्दील, सरकार अनजान

सरकारी उदासीनता से सदियों पुराना जलालगढ़ किला खंडहर में तब्दील

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सहरसा का बाबा कारू खिरहर संग्रहालय उदासीनता का शिकार

बिहार के सहरसा में रक्त काली मंदिर स्थित बाबा कारू खिरहर संग्रहालय का बुरा हाल है। इस संग्रहालय में जितनी भी मूर्तियां रखी हुई थीं, सभी जमींदोज होती जा रही हैं।

आजादी से पहले बना पुस्तकालय खंडहर में तब्दील, सरकार अनजान

सरस्वती पुस्तकालय देश की आजादी से भी पहले बना था और किसी जमाने में यह पुस्तकालय आसपास के जिलों का शिक्षा व कला के साथ सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों का भी केंद्र हुआ करता था।

सरकारी उदासीनता से सदियों पुराना जलालगढ़ किला खंडहर में तब्दील

कोसी नदी के किनारे बना जलालगढ़ किला जहां स्थित है, वह जगह पहले एक टापू नुमा ज़मीन थी। धीरे धीरे नदी के सिमटने से सूखी रेतीली ज़मीन उभर आई और फिर सत्रहवीं सदी में यहां इस विशाल किले का निर्माण करवाया गया।

किशनगंज के बड़ीजान में ‘आठवीं शताब्दी’ की सूर्य मूर्ति उपेक्षा का शिकार

बिहार के किशनगंज जिले में एक रहस्यमयी आठवीं शताब्दी की भगवान सूर्य की प्रतिमा उपेक्षित है। यह प्रतिमा ज़िले के कोचाधामन प्रखंड अंतर्गत बड़ीजान पंचायत में मौजूद है।

अररिया का वह शिव मंदिर, जहां पांडव ने किया था जलाभिषेक

अररिया के सुंदरनाथ धाम शिव मंदिर की, जो अररिया जिले के कुर्साकाटा प्रखंड की डुमरी पंचायत में स्थित है। इस मंदिर में रोजाना भारी संख्या में नेपाली श्रद्धालुओं के साथ भारतीय लोग भी जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।

पूर्णिया का वह लाल जो कहलाता था विश्व फुटबॉल का “जादूगर”

1930 के दशक में भारतीय फुटबॉल टीम एशिया की सबसे धारदार टीमों में से एक थी। उन्हीं दिनों भारत XI की टीम इंडोनेशिया XI से एक मैच खेल रही थी। मैच के आखिरी कुछ मिनट बचे थे, तब तक दोनों टीम कोई भी गोल नहीं कर सकी थी। मैच ड्रा की तरफ बढ़ ही रहा […]

गृहमंत्री ने जिस पूरण देवी मंदिर का जिक्र किया, उसका क्या है इतिहास

गत 23 सितंबर को देश के गृह मंत्री अमित शाह पूर्णिया आए थे। यहां उन्होंने ‘जन भावना रैली’ को संबोधित किया। गृह मंत्री ने ‘पूरण देवी मंदिर’ की ‘मां पूरण देवी’ को श्रद्धा के साथ प्रणाम कर अपने संबोधन की शुरुआत की थी। इसके बाद से इस मंदिर के चर्चे बढ़ गए हैं। पूरण देवी […]

संस्मरण: जब पाकिस्तान के निशाने पर था किशनगंज

वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय हमारा किशनगंज पाकिस्तानी फौज के टारगेट पर रहता था। दरअसल पूर्व दिशा में किशनगंज शहर से महज 30 किमी दूर पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी फौज को यह मालूम हो गया था कि पूर्वी पाकिस्तान के सर्वमान्य नेता शेख मुजीबुर्रहमान की मुक्तिवाहिनी के गुरिल्लाओं को किशनगंज में […]

किशनगंज: इतिहास के पन्नों में खो गये महिनगांव और सिंघिया एस्टेट

किशनगंज जिले के ठाकुरगंज के चुरली एस्टेट की तरह ही किशनगंज के महिनगांव का इतिहास भी सदियों पुराना है, लेकिन आज यह इतिहास ओझल हो चुका है। महिनगांव एक एस्टेट के रूप में विकसित हुआ था। फिलहाल, करीब साढ़े चार हजार लोग यहां रह रहे हैं। महिनगांव एस्टेट को 18वीं सदी में बसाया गया था। […]

किशनगंज: ऐतिहासिक चुरली एस्टेट खंडहर में तब्दील

कहते हैं कि जो समाज अपने इतिहास को सहेजना जानता है, वही समाज अपने भविष्य को सफलता के सांचे में ढाल पाता है। इंसान का इतिहास जीव-विज्ञान के किसी भी मामूली या ग़ैर मामूली किताब में मिल जाता है, मगर पुरखों का इतिहास अगली नस्ल सहज कर रखती, तभी वो आगे की पीढ़ियों तक जाता […]

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सहरसा का बाबा कारू खिरहर संग्रहालय उदासीनता का शिकार

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ग्राउंड रिपोर्ट: बैजनाथपुर की बंद पड़ी पेपर मिल कोसी क्षेत्र में औद्योगीकरण की बदहाली की तस्वीर है

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