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BPSC शिक्षक भर्ती परीक्षा के क्वालीफाइंग पेपर में उर्दू व बांग्ला प्रश्न गायब, अभ्यर्थी चिंतित

अभ्यर्थियों ने संबंधित परीक्षा केंद्र के केंद्राधीक्षकों और जिम्मेदारों से इस संबंध में शिकायत की और उर्दू या बांग्ला विषय वाले प्रश्न पत्रों की मांग की। लेकिन, जवाब मिला कि आयोग की तरफ से उनके पास यही प्रश्न पत्र आया है। मजबूरी में अभ्यर्थियों को हिन्दी के प्रश्नों के ही उत्तर देने पड़े।

Nawazish Purnea Reported By Nawazish Alam |
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“बिहार लोक सेवा आयोग अभ्यर्थियों को छोटी-छोटी गलती पर नोटिस थमा देता है और स्पष्टीकरण मांग लेता है। लेकिन सवाल यह है कि जब आयोग खुद इतनी बड़ी लापरवाही करे तो अभ्यर्थी कहां शिकायत करें। हमलोग उर्दू की तैयारी किये थे, लेकिन आयोग ने परीक्षा में उर्दू के प्रश्न पूछे ही नहीं।”

ये बातें पूर्णिया जिले के एक शिक्षक अभ्यर्थी ने शुक्रवार को BPSC द्वारा आयोजित दूसरे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा में भाग लेने के बाद कहीं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को हुई परीक्षा के बाद से ही वैल्पिक भाषा में उर्दू या बांग्ला विषय का चयन करने वाले अभ्यर्थी परेशान हैं, लेकिन अभी तक आयोग की तरफ से इसपर कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

दरअसल, जिन अभ्यर्थियों ने वैकल्पिक भाषा के रूप में उर्दू या बांग्ला विषय का चयन किया था, उनको मजबूरी में हिंदी विषय की परीक्षा देनी पड़ी। क्योंकि, पेपर में उर्दू और बांग्ला विषय के प्रश्न पूछे ही नहीं गये।


उल्लेखनीय है कि भाषा से संबंधित यह एक क्वालिफाइंग पेपर है। जो अभ्यर्थी पेपर के इस भाग में उत्तीर्ण होंगे, उन्हीं अभ्यर्थियों के दूसरे भागों के उत्तरों का मूल्यांकन किया जायेगा। जो अभ्यर्थी भाषा से संबंधित इस क्वालिफाइंग पेपर में सफल नहीं होंगे, उनको असफल घोषित कर दिया जायेगा।

पेपर के इस भाग के क्वालिफाइंग प्रकृति के होने की वजह से ही अभ्यर्थी परेशान नज़र आए। अभ्यर्थियों ने ‘मैं मीडिया’ को बताया कि क्वालिफाइंग पेपर में आयोग की तरफ से हुई इस लापरवाही से उनके एक साल की मेहनत बर्बाद हो जायेगी। अभ्यर्थियों ने आयोग को इस ओर ध्यान देने की मांग की।

एक अन्य अभ्यर्थी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि मामूली गलती पर या सिर्फ मीडिया चैनलों के साथ बात करने की वजह से या फिर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के चलते आयोग की छवि धूमिल करने का आरोप लगाकर अभ्यर्थियों से सख्ती से निपटने की बात करने वाले आयोग के चेयरमैन अतुल प्रसाद इसपर खामोश क्यों हैं?

एक महिला अभ्यर्थी ने ‘मैं मीडिया’ को बताया, “मैंने जब आवेदन किया था, तब भाषा में उर्दू का चुनाव किया था। लेकिन जब प्रश्न पत्र मिला, तो उसमें उर्दू के सवाल नहीं थे। जब मैंने कंप्लने किया तो इंविजिलेटर (वीक्षक) ने कहा कि उर्दू का प्रश्न पत्र ही नहीं आया है।”

‘मैं मीडिया’ से बातचीत के दौरान अधिकतर शिक्षक अभ्यर्थी अपना नाम बताने से बचते रहे। उन्होंने कहा कि नाम छिपाने की शर्त पर ही वे बात कर सकते हैं, वरना आयोग की तरफ से उनको नोटिस भेजा जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि आयोग ने 1 नवंबर को BPSC की छवि धूमिल करने के आरोप में 4 अभ्यर्थियों को स्पष्टीकरण भेजा था। आयोग की मानें, तो इन अभ्यर्थियों ने मीडिया के समक्ष आयोग के ऊपर फर्जी शिक्षक अभ्यर्थियों का परीक्षाफल प्रकाशित करने का आरोप लगाया था।

बताते चलें कि बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित दूसरे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा का आग़ाज़ 7 दिसंबर से हो चुका है। शुक्रवार को वर्ग 9-10 के लिये हिन्दी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी, बांग्ला, ललित कला, नृत्य, शारीरिक शिक्षा, मैथिली, संगीत तथा कम्प्यूटर विज्ञान विषयों की परीक्षा आयोजित हुई।

अभ्यर्थी, एक्स (ट्विटर) पर उठा रहे सवाल

शुक्रवार को परीक्षा के बाद से ही अभ्यर्थी लगातार सोशल मीडिया साइट एक्स के माध्यम से आयोग के अध्यक्ष अतुल प्रसाद को टैग कर इस ओर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं।

अब्दुस सुबहान नामक एक्स यूज़र ने लिखा, “माननीय अतुल सर जब फॉर्म भरते समय भाषा पेपर में इंग्लिश के साथ हिंदी/उर्दू/बंग्ला में किसी एक विषय को चुनने का ऑप्शन था फिर पेपर में इंग्लिश के साथ सिर्फ हिन्दी ही क्यों था?”

अभ्यर्थी आयोग के अध्यक्ष अतुल प्रसाद द्वारा किये गये हालिया पोस्ट पर जाकर भी इस संबंध में लगातार सवाल कर रहे हैं। लेकिन अभी तक कोई जवाब उनकी तरफ से नहीं आया है।

उल्लेखनीय है कि अतुल प्रसाद ने अपने पोस्ट पर रिप्लाई का ऑप्शन बंद रखा है।

असजद इकबाल ने लिखा, “उर्दू और बांग्ला भाषी अभ्यर्थियों को उनके द्वारा चुने लैंगवेज़ का क्वेश्चन पेपर उपलब्ध नहीं कराया गया था, आयोग इस मामले में वस्तु-स्थिति स्पष्ट करे।”

शिक्षक भर्ती परीक्षा से संबंधित खबरें शेयर करने वाले एक्स हैंडल ‘बिहार शिक्षक मंच’ ने पोस्ट किया, “क्वालीफाइंग लैंगवेज़ पेपर (30) में उर्दू या बांग्ला चुनने वाले अभ्यर्थियों को इस विषय का प्रश्न पत्र नहीं मिल रहा, कृप्या इस समस्या का समाधान करें @atulpmail सर।”

भाकपा (माले) के विधायक संदीप सौरव ने भी सोशल मीडिया साइट एक्स पर इस संबंध में पोस्ट किया है। उन्होंने बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर और आयोग के अध्यक्ष अतुल प्रसाद को टैग करते हुए इस पर संज्ञान लेने की अपील की है।

संदीप सौरव ने लिखा, “BPSC TRE 2.0 में आज वैकल्पिक भाषा में उर्दू चयनित किये हुए अभ्यर्थियों से प्रश्न के रूप में हिंदी पूछा गया। इससे उर्दू और अरबी या फारसी भाषा वाले अभ्यर्थियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। इसकी वजह से ऐसे अभ्यर्थी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। @atulpmail @ProfShekharRJD संज्ञान लें।”

पेपर के क्वालिफाइंग होने से अभ्यर्थी चिंतित

जिन अभ्यर्थियों ने वर्ग 9-10 के लिये वैकल्पिक भाषा के रूप में उर्दू या बांग्ला विषय का चयन किया था, वे शुक्रवार को प्रश्न पत्र देखते ही चौंक गए, क्योंकि इनमें उर्दू या बांग्ला विषय के प्रश्न थे ही नहीं।

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ऐसा भी नहीं है कि किसी एक विषय की परीक्षा दे रहे अभ्यर्थी के साथ यह वाकया पेश आया, बल्कि हिन्दी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, उर्दू, अरबी, फारसी, बांग्ला, ललित कला, नृत्य, शारीरिक शिक्षा, मैथिली, संगीत तथा कम्प्यूटर विज्ञान विषयों की परीक्षा दे रहे अभ्यर्थियों को भी इसी दुश्वारी का सामना करना पड़ा।

अभ्यर्थियों ने संबंधित परीक्षा केंद्र के केंद्राधीक्षकों और जिम्मेदारों से इस संबंध में शिकायत की और उर्दू या बांग्ला विषय वाले प्रश्न पत्रों की मांग की। लेकिन, जवाब मिला कि आयोग की तरफ से उनके पास यही प्रश्न पत्र आया है। मजबूरी में अभ्यर्थियों को हिन्दी के प्रश्नों के ही उत्तर देने पड़े।

कटिहार जिले के एक अभ्यर्थी ने ‘मैं मीडिया’ को फोन पर बताया कि उनलोगों ने उर्दू भाषा की तैयारी की थी, लेकिन परीक्षा में उर्दू के प्रश्न पूछे ही नहीं गए, जिससे वह परिणाम को लेकर काफी चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यह एक क्वालिफाइंग प्रकृति का पेपर है।

परीक्षा की रूपरेखा

4 नवंबर को आयोग की तरफ से जारी विज्ञापन के अनुसार, वर्ग 9-10 से संबंधित प्रश्न पत्र तीनों भागों में बंटा हुआ था। भाग- I भाषा (अहर्ता) के लिए होना था, जिसमें अंग्रेजी तथा हिन्दी/उर्दू/बांग्ला भाषा में से किसी एक विषय से प्रश्न पूछा जाना था।

इस भाग में 30 प्रश्न थे, जिसमें 8 प्रश्न अंग्रेजी भाषा के तथा 22 प्रश्न हिन्दी, बांग्ला तथा उर्दू विषय में से किसी एक विषय से प्रश्न पूछा जाना था। आयोग के अनुसार, इस भाग उत्तीर्ण होने के लिये कम से कम 30 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य था।

भाग-II- एक सामान्य अध्ययन पत्र है, जिसके प्रश्न माध्यमिक विद्यालय के पाठ्यक्रम से संबंधित होंगे, लेकिन इसका स्तर उम्मीदवार हेतु निर्धारित न्यूनतम अहर्ता के आलोक में होगा। इसमें प्राथमिक गणित, सामान्य जागरूकता, सामान्य विज्ञान, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन न भूगोल विषयों से 40 अंकों के प्रश्न पूछे जाने थे।

भाग-III- शिक्षा विभाग के अन्तर्गत माध्यमिक विद्यालय के अध्यापकों के लिए एक विषय पत्र था। उम्मीदवारों द्वारा इन पत्रों में से किसी एक पत्र का चुनाव किया जाना था।

इन विषयों में हिन्दी, बांग्ला, उर्दू, संस्कृत, अरबी, फारसी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, ललितकला, नृत्य, शारीरिक शिक्षा, मैथिली, संगीत और सामाजिक विज्ञान शामिल हैं। विषय से संबंधित इस भाग में 80 अंकों के लिये 80 प्रश्न पूछे जाने की बात कही गई थी।

भाषा से संबंधित भाग- I में ही गड़बड़ी हुई है। इस भाग में जिन अभ्यर्थियों ने हिंदी, उर्दू या बंग्ला विषय का चुनाव किया था, उनको 8 प्रश्न अंग्रेज़ी के तथा 22 प्रश्न चुनी हुई भाषा से पूछा जाना था।

लेकिन शुक्रवार को हुई परीक्षा में 8 प्रश्न अंग्रेजी और 22 प्रश्न हिन्दी भाषा से पूछे गये। उर्दू या बांग्ला भाषा के प्रश्न पूछे ही नहीं गये, जिससे जिन अभ्यर्थियों ने उर्दू या बांग्ला भाषा का चयन किया था, वे परीक्षा के परिणाम को लेकर चिंतित हैं।

शनिवार को भी गायब रहे उर्दू-बांग्ला के प्रश्न

अभ्यर्थियों को लगा था कि शायद यह एक दिन की गलती है और आयोग अगले दिन की परीक्षा में इस गलती को सुधार लेगा। लेकिन शनिवार को भी उर्दू और बांग्ला प्रश्नों के गायब रहने से अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लगी।

शनिवार (9 दिसंबर) को शिक्षा विभाग के अंतर्गत आनेवाले स्कूलों और पिछड़ा वर्ग व अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अंतर्गत आनेवाले स्कूलों के लिए विभिन्न विषयों की परीक्षा का आयोजन किया गया।

“सरासर नाइंसाफी है, शिक्षा मंत्री से करेंगे बात”

पूर्णिया के अमौर से विधायक और AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने इसे उर्दू व बांग्ला अभ्यर्थियों के साथ सरासर नाइंसाफी बताया है। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में जरूरी जानकारी इकट्ठा कर बिहार के शिक्षा मंत्री से मिलकर बात करेंगे।

“बहुत सारे कैंडिडेट्स (अभ्यर्थी) से हमारी बात हुई है। मैंने उन अभ्यर्थियों से कहा है कि आपलोग फौरी तौर पर BPSC और शिक्षा मंत्री को लिख कर दीजिये। अगर कार्रवाई नहीं होती है तो अभ्यर्थियों को कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना चाहिये,” उन्होंने कहा।

अख्तरूल ईमान ने आगे कहा, “जो कुछ भी हुआ है, वो उर्दू व बांग्ला भाषा पढ़ने वालों के साथ सरासर नाइंसाफी है। हमलोग अपनी पार्टी स्तर पर भी इस मामले को संजीदगी से देख रहे हैं। अभी हम जानकरी इकट्ठा कर रहे हैं। बाद में वज़ीरे तालीम (शिक्षा मंत्री) और विभागीय अधिकारी से बात करेंगे।”

मैं मीडिया ने इस संबंध में विधान परिषद सदस्य और राष्ट्रीय जनता दल के नेता क़ारी सोहैब से बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें इस संबंध में अभी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि वह अपने स्तर से पता लगाने की कोशिश करेंगे, तभी अपनी प्रतिक्रिया देंगे।

‘मैं मीडिया’ ने बिहार लोक सेवा आयोग के सचिव रवि भूषण के कार्यालय वाले दूरभाष संख्या और इंक्वायरी से संबंधित दूरभाष संख्या पर कई बार कॉल किया। बार-बार घंटी बजने के बाद भी कॉल का कोई जवाब नहीं मिला।

‘मैं मीडिया’ ने परीक्षा में उर्दू व बांग्ला विषय के प्रश्न न पूछने को लेकर बिहार लोक सेवा आयोग को सवाल ई-मेल पर भेज दिया है। आयोग की तरफ से जवाब आने पर इस आर्टिकल को अपडेट कर दिया जायेगा।

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नवाजिश आलम को बिहार की राजनीति, शिक्षा जगत और इतिहास से संबधित खबरों में गहरी रूचि है। वह बिहार के रहने वाले हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया के मास कम्यूनिकेशन तथा रिसर्च सेंटर से मास्टर्स इन कंवर्ज़ेन्ट जर्नलिज़्म और जामिया मिल्लिया से ही बैचलर इन मास मीडिया की पढ़ाई की है।

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