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बालिका स्नातक प्रोत्साहन योजना की वेबसाइट पर नहीं मिलती जरूरी जानकारियां

मुख्यमंत्री बालिका (स्नातक) प्रोत्साहन योजना के लिए उच्च शिक्षा विभाग की निदेशक डॉ. रेखा कुमारी ने पत्र जारी कर अंतिम समय-सीमा तय कर दी है।

Novinar Mukesh Reported By Novinar Mukesh |
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मुख्यमंत्री बालिका (स्नातक) प्रोत्साहन योजना के लिए उच्च शिक्षा विभाग की निदेशक डॉ. रेखा कुमारी ने पत्र जारी कर अंतिम समय-सीमा तय कर दी है।

फरवरी के अंतिम दिन तक छात्राएं इस योजना के लिए आवेदन कर पाएंगी। उच्च शिक्षा निदेशक द्वारा जारी और बिहार के सभी पारम्परिक विश्वविद्यालय के कुलसचिवों को भेजे अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि तय समय-सीमा तक आवेदन नहीं करने वाली छात्राओं के बारे में यह मान लिया जाएगा कि वे इस योजना का लाभ लेने की इच्छुक नहीं हैं।

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इस आधार पर उन्हें 28 फरवरी के बाद आवेदन का अवसर नहीं दिया जाएगा।


उच्च शिक्षा विभाग की निदेशक डॉ. रेखा कुमारी के पत्र में तय समय-सीमा के बरक्स बिहार सरकार द्वारा निर्मित मेधासॉफ्ट नामक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आवेदन-प्रक्रिया की सुगमता और उस पर आवेदकों के लिए जरूरी सूचनाओं की मौज़ूदगी का बारीक विश्लेषण सरकारी मशीनरी के कार्य करने के तौर-तरीकों पर कुछ जरूरी सवाल उठाते हैं।

वेबसाइट पर अधूरी जानकारी

बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस योजना की सूचना में योजना की पात्र छात्राओं के लिए छह शर्तें तय की गई हैं। इनमें शर्त ख में लिखा है, “राज्य के अंगीभूत एवं मान्यता प्राप्त संबद्ध डिग्री विश्वविद्यालयों (खुला विश्वविद्यालय सहित) से दिनांक 31.03.2021 के बाद स्नातक अथवा स्नातक के समकक्ष की डिग्री प्राप्त की हो।” 31 मार्च 2021 के बाद बिहार के कुछ विश्वविद्यालयों में दो सत्रों (2018-21 व 2019-22) की अंतिम परीक्षा हुई और परिणाम भी जारी किये गये। क्या शर्त ख में 31.03.2021 के बाद सत्र 2019-22 की अंतिम परीक्षा पास छात्राएं इस आवेदन के लिए योग्य हैं?

इसका जवाब विज्ञप्ति में न होकर योजना के आवेदनों की प्राप्ति और प्रोसेसिंग के लिए बने समर्पित वेबसाइट मेधासॉफ्ट डॉट बीआईएच डॉट एनआईसी डॉट इन (मेधासॉफ्ट) पर मौजूद है जिसे खंगालने के दौरान यह तथ्य सामने आता है कि वेबसाइट के मुख्य पन्ने पर कहीं भी स्पेसिफिक सत्र का जिक्र नहीं है।

वेबलिंक नहीं कर रहे काम

छात्राओं के पंजीकरण और लॉग-इन वेबलिंक को वर्षवार अलग किया गया है जैसे फॉर 2022 स्कॉलरशिप, फॉर 2021 स्कॉलरशिप, फॉर 2020 स्कॉलरशिप, फॉर 2019 स्कॉलरशिप। इन सभी वर्गीकरण में सत्र का ज़िक्र वेबसाइट के मुख्य पन्ने पर नहीं है। मेधासॉफ्ट वेबसाइट से पहले इस अति महत्तवाकांक्षी योजना के लिए ई-कल्याण वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए आवेदन लिए जाने का प्रावधान था।

गौरतलब हो कि बिहार के ज्यादातर पारम्परिक विश्वविद्यालय का सत्र नियत समय से पीछे रहा है और उच्च न्यायालय पटना के कड़े रुख के बाद लम्बित परीक्षाओं के आयोजन और उसके परिणामों को जारी करने में तेजी आई है। इस प्रक्रिया में गुणवत्ता की जांच अलग पहलू है।

मेधासॉफ्ट के मुख्य पन्ने पर ‘फॉर 2022 स्कॉलरशिप’ हेडलाइन के तहत मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना- मुख्यमंत्री बालिका स्नातक प्रोत्साहन योजना 2022 (फॉर यूनिवर्सिटी एंड डिपार्टमेंट लॉग-इन ओनली) नामक वेबलिंक है। इसे क्लिक करने पर तीन मुख्य वेबलिंक नज़र आती है जैसे ऑफिशियल लॉग-इन, स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन, एप्लॉय ऑनलाइन(क्लिक हेअर)। ‘एप्लॉय ऑनलाइन’ नामक वेबलिंक के साथ एक जानकारी दर्ज़ है जिससे यह पता चलता है कि आवेदकों का परीक्षाफल 01 अप्रैल 2021 से 31 अक्टूबर 2021 के बीच जारी हुआ हो।

मेधासॉफ्ट के उसी वेबपन्ने के निचले हिस्से में जानकारी और सलाह के लिए एक समर्पित ई-मेल पता दर्ज़ है। इस ई-मेल के जरिए प्राप्त कितनी पूछताछ का जवाब ई-मेल भेजने वालों को प्राप्त होता है, उससे जुड़े समुचित डेटा का अभाव है। इसके रियल टाईम प्रकाशन की व्यवस्था नहीं की गई है।

हालांकि, सैम्पल के तौर पर पूछताछ व सहायता के वास्ते भेजे एक ई-मेल का करीब सप्ताह बाद भी जवाब नहीं आया है।
मेधासॉफ्ट के मुख्य वेबपन्ने की दायीं ओर ऊपरी कोण पर बने मेन्यू आईकॉन को क्लिक करने पर हेल्पडेस्क सेक्शन खुलता है। इसे क्लिक करने पर “सर्वर एरर इन/एमकेयूवायस्नातक2021” नामक एरर दिखता है। इसी तरह मेन्यू आईकॉन के यूजर मैन्युअल (स्टूडेंट रजिस्टेशन) सेक्सन को खोलने की कोशिश का परिणाम भी एरर के रूप में सामने आता है।

‘मेन्यू’ आईकॉन का इन्स्टिट्यूशन्स सेक्शन दो भाग में बँटा है। पहला, अपनी शिकायतें दर्ज़ करने का विकल्प। दूसरा, दर्ज़ शिकायतों की अद्यतन स्थिति जानने का विकल्प। शिकायतें दर्ज़ करने का विकल्प खोलने पर सर्वर एरर दिखता है। वहीं, दर्ज़ शिकायतों की अद्यतन स्थिति जानने के लिए बने लिंक को खोलने पर शिकायत की पहचान संख्या से जुड़े चार विकल्प सामने आते हैं।

मुख्यमंत्री बालिका (स्नातक) प्रोत्साहन योजना के बारे में जानने के लिए ‘एफएक्यू सेक्शन’ को मेधासॉफ्ट पर जगह तो दी गयी है, लेकिन इसके जरिये योजना से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने की कोशिश सिफ़र ही रहती है। एफएक्यू खोलते ही वांछित जानकारी की जगह यूजर्स को सर्वर एरर दिखता है। यह सब तब है जबकि बिहार सरकार के शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना(ग्रेजुएट) की वेबलिंक यूजर्स को सीधे मेधासॉफ्ट के वेबपन्ने तक पहुँचाती है।

मुख्यमंत्री बालिका (स्नातक) प्रोत्साहन योजना उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने और छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए स्नातक पास सभी कोटि की छात्राओं को प्रोत्साहन भत्ता के रूप में 25000 रुपए सीधे लाभुक के खाते में अंतरित करने की योजना है। अब इस योजना के तहत लाभुकों को मिलने वाली राशि बढ़ाकर 50000 रुपए कर दी गई है।

वेबसाइट को यूजर फ्रेंडली बनाने की जरूरत

एक अनुमान के अनुसार, मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना से करीब 1.6 करोड़ छात्राओं को आर्थिक लाभ सीधे मिलने के आसार हैं।

हालांकि, ई-कल्याण वेबसाइट पर बिहार सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आंकड़े के अनुसार इस योजना के तहत लाभान्वित हो चुके कुल लाभुकों की संख्या 313582 और अंतरित राशि की कुल मात्रा एक अरब तिरानवे करोड़ अठ्ठावन लाख पचहत्तर हजार रुपए बताई गई है।

बिहार सरकार की अति महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना राज्य में बाल विवाह को रोकने और इसके तहत मुख्यमंत्री बालिका (स्नातक) प्रोत्साहन योजना, उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में छात्राओं को समान अवसर मुहैया कराने के लिहाज से शुरू की गई थी।

बिहार के कुछ विश्वविद्यालयों में सत्र की लेटलतीफी, परीक्षाओं के अनियमित आयोजन, परीक्षाफल के देरी से प्रकाशन, प्रोत्साहन के लिए आवेदन से जुड़ी जरूरी जानकारी मेधासॉफ्ट वेबसाइट से गायब रहने, सहायता के लिए जारी मोबाइल नम्बर्स के काम न करने, जारी ई-मेल पर ससमय फीडबैक देने की ठोस व्यवस्था के अभावों के कारण इस योजना के एक्सपेक्टेड आवेदकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ये सभी कारक योजना के वंछित उद्देश्यों की प्राप्ति में बाधक बनते हैं। इसलिए आवेदन की अंतिम समय-सीमा तय करने और आवेदन नहीं कर पाने को छात्राओं की अनिच्छा मान लेने से पहले मेधासॉफ्ट वेबसाइट को यूजर फ्रेंडली और आवेदन से जुड़ी छोटी-बड़ी जरूरी जानकारियों का वन स्टॉप डेस्टिनेशन बनाया जाना बेहद जरूरी है।

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मधेपुरा में जन्मे नोविनार मुकेश ने दिल्ली से अपने पत्रकारीय करियर की शुरूआत की। उन्होंने दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर , एडीआर, सेहतज्ञान डॉट कॉम जैसी अनेक प्रकाशन के लिए काम किया। फिलहाल, वकालत के पेशे से जुड़े हैं, पूर्णिया और आस पास के ज़िलों की ख़बरों पर विशेष नज़र रखते हैं।

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