Main Media

Seemanchal News, Kishanganj News, Katihar News, Araria News, Purnea News in Hindi

Support Us

पुलिस थाना बनाने के लिए 300 दुकानों पर चला बुलडोज़र, बारसोई से ग्राउंड रिपोर्ट

बिहार के कटिहार जिले में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत कई दुकानों को ज़मींदोज़ कर दिया है। बीते शनिवार को कटिहार के बारसोई प्रखंड स्थित सालों पुराने बिघोर हाट में प्रशासन द्वारा बुलडोजर चला कर करीब 300 दुकानों को तोड़ दिया गया।

Aaquil Jawed Reported By Aaquil Jawed |
Published On :

बिहार के कटिहार जिले में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत कई दुकानों को ज़मींदोज़ कर दिया है। बीते शनिवार को कटिहार के बारसोई प्रखंड स्थित सालों पुराने बिघोर हाट में प्रशासन द्वारा बुलडोजर चला कर करीब 300 दुकानों को तोड़ दिया गया। बिहार सरकार की ज़मीन पर स्थित बिघोर हाट की जगह पर पुलिस थाना बनाने की योजना है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि बिघोर हाट देश की आज़ादी से भी पहले से इलाके में सबसे बड़ा बाज़ार था और पश्चिम बंगाल से सटे होने के कारण दशकों पहले अंतरराज्यीय व्यापारियों के व्यवसाय का प्रमुख केंद्र हुआ करता था।

Also Read Story

किशनगंज के इस गांव में बढ़ रही दिव्यांग बच्चों की तादाद

बिहार-बंगाल सीमा पर वर्षों से पुल का इंतज़ार, चचरी भरोसे रायगंज-बारसोई

अररिया में पुल न बनने पर ग्रामीण बोले, “सांसद कहते हैं अल्पसंख्यकों के गांव का पुल नहीं बनाएंगे”

किशनगंज: दशकों से पुल के इंतज़ार में जन प्रतिनिधियों से मायूस ग्रामीण

मूल सुविधाओं से वंचित सहरसा का गाँव, वोटिंग का किया बहिष्कार

सुपौल: देश के पूर्व रेल मंत्री और बिहार के मुख्यमंत्री के गांव में विकास क्यों नहीं पहुंच पा रहा?

सुपौल पुल हादसे पर ग्राउंड रिपोर्ट – ‘पलटू राम का पुल भी पलट रहा है’

बीपी मंडल के गांव के दलितों तक कब पहुंचेगा सामाजिक न्याय?

सुपौल: घूरन गांव में अचानक क्यों तेज हो गई है तबाही की आग?

बिघोर हाट पर चाय की दुकान चलाने वाले मोहम्मद असग़र का आरोप है कि प्रशासन ने केवल 85 दुकानदारों को हाट से हटने का नोटिस दिया था, लेकिन हाट में मौजूद सभी दुकानों पर बुलडोज़र चला दिया गया है।


अपनी दुकान के मलबे के पास बैठे बुज़ुर्ग नौशाद अली की बिघोर हाट में किराने की एक दुकान हुआ करती थी, जो अब मलबे में तब्दील हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वह लोन लेकर दुकान चला रहे थे। वह चाहते हैं कि सरकार उन्हें कहीं जगह दे, ताकि उनकी रोज़ी रोटी चल सके।

लॉकडाउन के दौरान बिघोर हाट चर्चा में आया था। दरअसल, हाट के लोगों से कोविड गाइडलाइन का अनुपालन करवाने के लिए यहाँ पुलिस पहुंची थी। लेकिन, लोगों ने पुलिस को खदेड़ दिया था। इसका वीडियो तब वायरल हो गया था।

बिघोर हाट में कपड़े की दुकान चलाने वाले विशाल यादव ने कहा कि उसकी दुकान में एक व्यक्ति के मौजूद होने के बावजूद दुकान पर बुलडोज़र चला दिया गया। किसी तरह उस व्यक्ति ने भाग कर अपनी जान बचाई।

दुकानदारों का कहना है कि हाट पर दुकान चलाने के लिए उनसे किराया लिया जाता था। मसीहुज़्ज़मां ने अपनी दुकान के किराये के भुगतान की रसीद दिखाई और कहा कि वह 40 सालों से इस दुकान से रोज़ी रोटी कमा रहे थे। अचानक दूकान टूट जाने से उन जैसे सैकड़ों लोग बेरोज़गार हो चुके हैं।

जुअलरी दुकानदार मोहममद नूर सलाम ने कहा कि दुकान तोड़ते वक्त प्रशासन ने उन्हें सामान निकालने तक का समय नहीं दिया और दुकान के अंदर महंगे सामान होने के बावजूद उस पर बुलडोज़र चला दिया गया।

पिछले साल 6 मार्च को स्थानीय विधायक महबूब आलम ने विधानसभा सत्र छोड़कर बिघोर हाट में एक विशाल बैठक की थी। बैठक में विधायक ने कड़े तेवर में कहा था कि यह हटिया सैकड़ों साल से बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र की धरोहर है और किसी भी कीमत पर इसे उजाड़ने नहीं दिया जाएगा।

मामले को लेकर जब हमने विधायक महबूब आलम से फोन पर बात की तो, उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर बारसोई अंचल अधिकारी ने मनमाने तरीके से जबरन बिघोर हाट को उजाड़ा है। एक तो सरकार रोजगार नहीं दे पा रही है और दूसरी ओर लोगों से रोजगार छीन रही है। इसको लेकर हम लोग मुख्यमंत्री से मिलेंगे और बिहार विधानसभा में भी इस पर आवाज उठाएंगे।

सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।

Support Us

Aaquil Jawed is the founder of The Loudspeaker Group, known for organising Open Mic events and news related activities in Seemanchal area, primarily in Katihar district of Bihar. He writes on issues in and around his village.

Related News

क़र्ज़, जुआ या गरीबी: कटिहार में एक पिता ने अपने तीनों बच्चों को क्यों जला कर मार डाला

त्रिपुरा से सिलीगुड़ी आये शेर ‘अकबर’ और शेरनी ‘सीता’ की ‘जोड़ी’ पर विवाद, हाईकोर्ट पहुंचा विश्व हिंदू परिषद

फूस के कमरे, ज़मीन पर बच्चे, कोई शिक्षक नहीं – बिहार के सरकारी मदरसे क्यों हैं बदहाल?

आपके कपड़े रंगने वाले रंगरेज़ कैसे काम करते हैं?

‘हमारा बच्चा लोग ये नहीं करेगा’ – बिहार में भेड़ पालने वाले पाल समुदाय की कहानी

पूर्णिया के इस गांव में दर्जनों ग्रामीण साइबर फ्रॉड का शिकार, पीड़ितों में मजदूर अधिक

किशनगंज में हाईवे बना मुसीबत, MP MLA के पास भी हल नहीं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest Posts

Ground Report

किशनगंज के इस गांव में बढ़ रही दिव्यांग बच्चों की तादाद

बिहार-बंगाल सीमा पर वर्षों से पुल का इंतज़ार, चचरी भरोसे रायगंज-बारसोई

अररिया में पुल न बनने पर ग्रामीण बोले, “सांसद कहते हैं अल्पसंख्यकों के गांव का पुल नहीं बनाएंगे”

किशनगंज: दशकों से पुल के इंतज़ार में जन प्रतिनिधियों से मायूस ग्रामीण

मूल सुविधाओं से वंचित सहरसा का गाँव, वोटिंग का किया बहिष्कार