
पक्की सड़क न होने से स्थानीय किसानों को अपनी फसलों को बाज़ार तक पहुँचाने में काफ़ी पैसा खर्च करना पड़ता है। अनाज खराब होने के डर से वे मजबूरन सस्ते दामों पर उसे बेच देते हैं। ऐसे में बढ़ती महंगाई के बावजूद उनकी आमदनी लगातार कम हो रही है।

बिहार के किशनगंज में ईरानी मूल के शिया मुस्लिम समुदाय के करीब 600 लोग रहते हैं। पिछले दो दशकों से सिलसिलेवार इनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा रहा है। अब बिहार SIR के तहत चंद बचे मतदाताओं में से भी लगभग 20 लोगों को दस्तावेज़ दोबारा जमा करने का नोटिस मिला है, जिससे समुदाय में गहरी चिंता और असुरक्षा का माहौल है।

बीते रविवार 10 अगस्त की सुबह, बजरंग दल से जुड़े 40-45 लोग ईसाई आदिवासी समुदाय की प्रार्थना सभा में घुस आए। म्यूज़िक सिस्टम, मोबाइल, पैसे और खाने का सामान लूट लिया, साथ ही महिलाओं से मारपीट और छेड़छाड़ की गई। हमले में 10 से अधिक लोग घायल हुए।

बिहार के सहरसा जिले में दर्जनों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

भारत की नेपाल के साथ 1751 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें से 756 किलोमीटर बिहार में पड़ती है। बिहार के सात ज़िले, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज, नेपाल सीमा से सटे हुए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, मखाना की सही ढंग से वृद्धि और विकास के लिए 20–35°C तक की अनुकूल हवा का तापमान, 50–90% तक की ह्यूमिडिटी और 1,000–2,500 mm तक की वार्षिक वर्षा आवश्यक होती है।

बिहार में डायन के संदेह में हत्याएं कोई नई बात नहीं है। बिहार में ये वारदातें इतनी अधिक थीं कि बिहार पहला सूबा बना था जहां डायन-हत्या के खिलाफ 1999 में ही कानून बनाया गया था।

मृतक के परिजन और सामाजिक संगठन इस मौत को संदिग्ध बताकर जेल पदाधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ न्यायिक जांच की मांग कर रहे है।

अगस्त 2021 में तत्कालीन चीफ जस्टिस एन रमना ने इस पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि भारत के पुलिस स्टेशन मानवाधिकार के लिए बड़ा खतरा हैं। उन्होंने कहा था कि हिरासत में पुलिस अत्याचार वे समस्याएं हैं, जो अब भी हमारे समाज में मौजूद हैं।

कटाव निरोधक कार्य कई तरह के होते हैं, जिनमें पर्को पाइल यानी प्रीकास्ट कंक्रीट पाइल्स, जियो बैग, शीट पाइल, वुडन पाइल, बोल्डर पिचिंग आदि शामिल हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने से किसानों की फसलें हर साल बर्बाद हो जाती हैं जिससे क्षेत्र के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली यह अहम सड़क सालों से बदहाली का शिकार है। किशनगंज जिले की दामलबाड़ी पंचायत के बिसानी गांव से लेकर पश्चिम बंगाल के पांजीपाड़ा, धनतोला और इस्लामपुर आदि जाने वाली सड़क गड्ढों से भरी पड़ी है। हालत ऐसी है कि राह चलना भी किसी जंग जीतने जैसा लगता है।