
बिहार में दहेज प्रथा आज भी महिलाओं के लिए एक भयावह सच्चाई बनी हुई है। गरीब पिता चांदनी की शादी के लिए कर्ज लेकर दहेज देता है, फिर बेटी की लाश रेलवे ट्रैक पर मिलती है। किरण कुमारी ने ग्रेजुएशन और नौकरी की तैयारी की, लेकिन दहेज के लिए उसे मार दिया गया। प्रेम विवाह करने वाली पिंकी बेगम को भी ससुरालवालों ने दहेज के लिए प्रताड़ित किया।

बिहार के किशनगंज जिलान्तर्गत पोठिया प्रखंड की जहांगीरपुर पंचायत स्थित बेलपोखर और सारादीघी समेत कई गाँवों के लोग एक अदद सड़क के लिए वर्षों से आस लगाए बैठे हैं।

आहर-पाइन पर व्यापक अध्ययन करने वाले निर्मल सेनगुप्त लिखते हैं, “बाहर से आहर-पइन व्यवस्था भले ही बदरूप दिखती हो, लेकिन ये कठिन प्राकृतिक स्थितियों में पानी के सर्वोत्तम उपयोग की अनूठी देसी प्रणाली है।”

रेणु द्वार से निकलने वाले इस मार्ग पर फणीश्वरनाथ रेणु अभियंत्रण महाविद्यालय भी स्थित है। छात्र-छात्राएं इसी जर्जर सड़क से होकर पढ़ने आते हैं।

पूर्णिया से इस्लामपुर सेक्शन के निर्माण कार्य में 726.40 करोड़ रुपये खर्च हुए। जबकि इस मार्ग पर मौजूद दो टोल प्लाज़ा बरसोनी और सुरजापुर में कुल 954.45 करोड़ रुपये वसूले जा चुके हैं।

कटिहार जिले के आजमनगर प्रखंड अंतर्गत मुकुरिया पंचायत के जितवारपुर गांव में रहने वाली शेहरून खातून का कोई बच्चा नहीं है और उनके पति कमीरूद्दीन की मृत्यु पांच वर्ष पहले हो चुकी है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा 23 जनवरी को सहरसा पहुंचेगी। जिस गांव में सीएम नीतीश कुमार को आना है वहां की हालत काफी दयनीय है।

स्टेशन पर सर्द रातों के अलावा चोरी की घटनाओं से बेगम और मोहम्मद वारिस जैसे कई बेघर लोग परेशान हैं जबकि किशनगंज के आश्रय स्थल में अधिकतर बेड खाली पड़े हैं।

ज़िले के नौहट्टा प्रखंड स्थित हाटी घाट पर स्थानीय लोग वर्षों से एक पुल की मांग कर रहे हैं जिसके लिए अब तक कोई प्रशासनिक पहल नहीं की गई है।

अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस पर सहरसा के दिव्यांगजन अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे

बिहार पुलिस की तैयारी कराने वाले गुरु रहमान कहते हैं, “पर्षद साफ तौर पर बैक डेट का एनसीएल सर्टिफिकेट चाह रहा है, जो संभव नहीं है।”

भारत सरकार के National Cooperative Database पर मौजूद आकड़ों के अनुसार, बिहार में 29 तरह की कुल 25,580 सहकारी समितियां हैं।

शहर के बीचोंबीच बहने वाली रमज़ान नदी के जीर्णोद्धार कार्य के लिए लगभग ₹12 करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

साल 2008 में परिसीमन के बाद तरारी सीट पर तीन बार विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें से एक बार जदयू और दो बार भाकपा-माले की जीत हुई है।

5 अक्टूबर को स्कूल से लौट रहे दर्जनों बच्चों पर अचानक कुत्तों ने हमला कर दिया, जिससे कई बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।