
पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर ज़िले के ग्वालपोखर विधानसभा क्षेत्र स्थित नियामतपुर गांव की सड़क वर्षों से जर्जर है। पांजीपाड़ा पंचायत में आने वाले इस गांव की सड़क पर बड़े बड़े गड्ढे राज्य में विकास के दावों की पोल खोलते हैं।

मृतका के दादा कहते हैं, “हमलोग छटपटाते रहे कि बच्ची को भर्ती कर लें। हमलोग पढ़े लिखे नहीं हैं और दलित परिवार से हैं। हमलोग अस्पताल में बिलखते रहे, लेकिन कोई मदद करने वाला नहीं था।”

बिहार के अररिया ज़िले में हिरासत में लगातार हो रही मौतें चिंता का विषय बनती जा रही हैं, खासकर जब अधिकतर मृतक मुस्लिम या महादलित समुदाय से आते हैं। अप्रैल 2025 में एक ही हफ्ते में दो ऐसी मौतें हुईं — सोहराब खान और मिथिलेश राम की। प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर परिवार सवाल उठा रहे हैं, जबकि अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं।

सहरसा जिले के सलखुआ प्रखंड के मुसहरिया गांव में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 2018 में शुरू हुआ 3.4 करोड़ रुपये का पुल निर्माण कार्य छह साल से अधूरा पड़ा है। अप्रैल 2019 में पूरा होने वाला यह पुल पिलर तक बनकर रुक गया, जिससे ग्रामीण आज भी पुराने, जर्जर लोहे के पुल से जान जोखिम में डालकर आना-जाना करते हैं।

कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड के मालोर गांव में स्थित जर्जर मालोर पुल हादसों को न्योता दे रहा है। यह पुलिया सुधानी नदी पर बनी है और दर्जनों गांवों की जीवनरेखा मानी जाती है।

वर्षों से पक्की सड़क की मांग कर रहे लोग अब स्थानीय जन प्रतिनिधियों से बेहद नाराज़ हैं, जिसके चलते उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।

जब हम कार्यस्थल पर पहुंचे तो संवेदक या साइट इंजीनियर में से कोई वहां मौजूद नहीं था। मौके पर मिले मुंशी और साइट इंचार्ज ने बताया कि स्थानीय मुखिया ने लोकल बालू गिराया था जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया तो काम रोक दिया गया।

कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड अंतर्गत सुधानी पंचायत में पुरानी महानंदा नदी पर स्थित कोल्हा घाट पर पुल न होने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

वीडियो में हाथों में बांस लिए कुछ लोग देखे जा सकते हैं। पनासी ईदगाह बिहार-बंगाल के बॉर्डर पर स्थित है जहां दोनों राज्यों के लोग हर वर्ष बड़ी संख्या में ईद की नमाज़ अदा करने आते हैं।

बिहार के किशनगंज ज़िलांतर्गत पोठिया प्रखंड की परलाबाड़ी पंचायत स्थित डूमरमनी और छगलिया को स्कूल से जोड़ने वाली सड़क कच्ची गड्ढों से भरी है।

बिहार के कटिहार ज़िले में शिक्षा सेवकों और तालीमी मरकज़ केंद्रों को लेकर कई अनियमितताएं सामने आई हैं। एक आरटीआई के माध्यम से बलरामपुर प्रखंड में संचालित इन केंद्रों की जानकारी मांगी गई थी।

किशनगंज प्रखंड की मोतिहारा तालुका पंचायत में छगलिया और रामजीबाड़ी गांवों के बीच स्थित यह टूटा पुल हजारों लोगों के लिए लंबे समय से मुसीबत बना हुआ है।

बिहार के पूर्णिया ज़िले के बायसी प्रखंड में शादीपुर भुतहा पंचायत की शर्मा टोली में सड़क की मांग को नेशनल मीडिया ने हिंदू-मुस्लिम विवाद का रूप दे दिया। 'मैं मीडिया' के ज़मीनी पड़ताल से पता चला कि यह मामला धार्मिक टकराव का नहीं, बल्कि प्रशासन और ज़मीन मालिकों से जुड़ा था।

कटिहार जिले में ज़ैतून निशां जैसी बुज़ुर्ग विधवा महिलाओं को सरकारी दस्तावेजों में मृत दिखाकर उनकी पेंशन रोक दी गई है, जबकि वे जिंदा हैं और बीते लोकसभा चुनाव में वोट तक डाल चुकी हैं।

बिहार में दहेज प्रथा आज भी महिलाओं के लिए एक भयावह सच्चाई बनी हुई है। गरीब पिता चांदनी की शादी के लिए कर्ज लेकर दहेज देता है, फिर बेटी की लाश रेलवे ट्रैक पर मिलती है। किरण कुमारी ने ग्रेजुएशन और नौकरी की तैयारी की, लेकिन दहेज के लिए उसे मार दिया गया। प्रेम विवाह करने वाली पिंकी बेगम को भी ससुरालवालों ने दहेज के लिए प्रताड़ित किया।