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अररिया में पुल न बनने पर ग्रामीण बोले, “सांसद कहते हैं अल्पसंख्यकों के गांव का पुल नहीं बनाएंगे”

रामपुर दक्षिण पंचायत वार्ड संख्या 12 के कजड़ाधार घाट पर ग्रामीण चचरी का पुल बनाकर आवाजाही करते हैं लेकिन बरसात के मौसम में पानी का बहाव अधिक रहने से हर साल चचरी का पुल बह जाता है।

syed jaffer imam Reported By Syed Jaffer Imam |
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बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड अंतर्गत रामपुर दक्षिण पंचायत के लोग लंबे समय से पुल की आस में हैं। रामपुर दक्षिण पंचायत वार्ड संख्या 12 के कजड़ाधार घाट पर ग्रामीण चचरी का पुल बनाकर आवाजाही करते हैं लेकिन बरसात के मौसम में पानी का बहाव अधिक रहने से हर साल चचरी का पुल बह जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र से होने के कारण उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है और पुल निर्माण कार्य अटका हुआ है।

स्थानीय ग्रामीण मुमताज़ सलाम ने बताया कि यह रास्ता फारबिसगंज प्रखंड को सिकटी प्रखंड से जोड़ता है। ग्रामीण बाज़ार, अस्पताल और प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए इसी रास्ते का प्रयोग करते हैं। पुल नहीं होने से मरीज और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी होती है।

आगे उन्होंने बताया कि फारबिसगंज विधायक विद्यासागर केसरी ने विधानसभा में कजड़ाधार पुल की मांग की थी लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। मुमताज़ आलम ने अररिया सांसद प्रदीप कुमार सिंह के बारे में कहा कि सांसद पुल की मांग को यह कह कर रद्द कर देते हैं कि अल्पसंख्यक समुदाय उन्हें वोट नहीं देता इसलिए वह काम नहीं करेंगे।


स्थानीय निवासी ज़ैदी अंसारी ने बताया कि गांव में अधिकतर लोगों का खेत घाट के उस पार है। कई लोगों ने घाट के उस पार पलायन कर लिया है। आगे उन्होंने कहा कि अगर परिस्थिति ऐसी ही रही तो गांव के लोग आने वाले चुनाव का बहिष्कार करेंगे।

वहीं, रामपुर दक्षिण गांव के रहने वाले इम्तियाज़ अंसारी ने बताया कि क़ब्रिस्तान घाट के उस पार है ऐसे में किसी की मौत होने पर जनाज़े को चचरी पुल से लेकर जाना पड़ता है। बरसात में यह समस्या कई गुना बढ़ जाती है और लोग कब्रिस्तान पहुँचने के लिए नाव का प्रयोग करते हैं।

गांव के किसान पुल न बनने से रोज़ाना कठिनाइयों का सामना करते हैं। कई किसानों ने दूसरे गांवों में पलायन कर लिया और जो अपने गांव में ही रहे वे हर दिन घाट के उस पार खेती करने जाते हैं। पलायन करने वाले दर्जनों किसानों में से एक मोहम्मद शबराज़ ने कहा कि उन्होंने अपना घर बदल तो लिया लेकिन खेती की जमीन घाट के इस पार ही है। सूखे के दौरान चचरी के पुल से काम चल जाता है लेकिन बरसात के मौसम में आना जाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

आगे उन्होंने बताया कि पुल न बनने से कई लोग दुर्घटना का शिकार भी हुए हैं। कुछ महीने पहले ही नदी में डूबने से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।

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इस्लामपुर-दत्ता टोला निवासी मोहम्मद महबूब रोज़ साईकल पर चचरी के पुल को पार कर पढ़ने जाता है। महबूब ने बताया कि उसके गांव से 12 बच्चे पढ़ाई करने घाट की दूसरी तरफ जाते हैं। कुछ दिनों पहले उसका भाई ट्यूशन जाते समय साइकिल लेकर चचरी के पुल पर गिर गया था।

रामपुर दक्षिण पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि तौफ़ीक अमानुल्लाह ने बताया कि कजड़ाधार से थोड़ी दूरी पर स्थित कादिम घाट पर वर्षों से पुल बनाने की मांग की जा रही है। जन प्रतिनिधियों के उदासीन रवैये से ग्रामीण अब निराश हो चुके हैं। आगे उन्होंने बताया कि कादिम घाट पर अंग्रेजों के जमाने में एक लकड़ी का पुल हुआ करता था जो दशकों पहले टूट चुका है।

इस मामले में हमने फारबिसगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक विद्यासागर केसरी से फ़ोन पर बात की। उन्होंने बताया कि रामपुर दक्षिण में पुल और सड़क निर्माण के लिए उन्होंने विधानसभा में बात उठाई थी, फिलहाल पुल निर्माण कार्य सरकारी प्रक्रिया में हैं जल्द ही यह काम पूरा कर लिया जाएगा।

इसके बाद हमने 2019 लोकसभा चुनाव में अररिया के सांसद बने प्रदीप कुमार सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। उनके कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले के कई पुलों के निर्माण कार्य को प्रोसेस में भेजा गया है जिनमें संभवतः रामपुर दक्षिण पंचायत का पुल भी शामिल है। चुनाव के बाद सभी चिन्हित किये गए पुलों का निर्माण कराया जाएगा ।

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सैयद जाफ़र इमाम किशनगंज से तालुक़ रखते हैं। इन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से जन संचार एवं पत्रकारिता में ग्रैजूएशन करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता (पीजी) की पढ़ाई की। 'मैं मीडिया' के लिए सीमांचल के खेल-कूद और ऐतिहासिक इतिवृत्त पर खबरें लिख रहे हैं। इससे पहले इन्होंने Opoyi, Scribblers India, Swantree Foundation, Public Vichar जैसे संस्थानों में काम किया है। इनकी पुस्तक "A Panic Attack on The Subway" जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई थी। यह जाफ़र के तखल्लूस के साथ 'हिंदुस्तानी' भाषा में ग़ज़ल कहते हैं और समय मिलने पर इंटरनेट पर शॉर्ट फिल्में बनाना पसंद करते हैं।

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