भारी विरोध और हंगमाने के बीच केंद्र सरकार ने 2019 में तीन तलाक़ बिल या मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम बनाकर तीन तलाक पर प्रतिबंध लगा दिया है। ये बिल तीन तलाक देने को कानूनी रूप से अमान्य और गैरकानूनी बनाता है। बावजूद इसके कुछ लोगों में इस कानून का खौफ अभी भी नहीं है। ताज़ा मामला बिहार के किशनगंज से सामने आया है। जहाँ एक 40 वर्षीय महिला और उसके छः बच्चों को तीन तलाक देकर उसके हाफिज पति ने घर से बाहर निकाल दिया। इसके बाद पति ने दूसरी शादी भी कर ली है।

मामला बहादुरगंज थाना क्षेत्र के डोहर पंचायत अंतर्गत कचालु टोला महादेवदिघी का है यहां पति हाफ़िज़ मोहम्मद ज़हूर आलम ने शादी के 17 साल बाद अपनी पत्नि को तीन तलाक देकर दूसरी शादी कर ली। पीड़िता ने बहादुरगंज थाना में अर्जी देकर कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता 40 वर्षीय नुजहत प्रवीण ने पुलिस को दिये आवेदन में बताया कि उनकी शादी बहादुरगंज प्रखंड के डोहर पंचायत कचालु टोला महादेवदिघी निवासी हाफिज जहुर आलम से हुई थी। शादी के बाद से ही ज़हूर दहेज आदि के मांग को लेकर अपने पुरे परिवार के साथ मिलकर मारपीट और प्रतारना करते रहता था और हमेशा तीन तलाक का धमकी देता था।

पीड़िता नुजहत ने बताया की उसके छः बच्चे हैं, 3 जून गुरुवार को जब वो अपने पति से बच्चों के लिए खर्च मांगी तो उसने बच्चों और उसकी पिटाई की और तीन तलाक़ बोल दिया। उसके बाद उसके सास, ससुर, ननद और देवर ने नुजहत पर जानलेवा हमला कर दिया और वो किसी तरह जान बचा कर बच्चों के साथ अपने मायके बिशनपुर पंचायत के डहुआबाड़ी गांव आ गयी।

वहीं आरोपी पति जहुर आलम का कहना है की एक लेन देन के मामले में गुस्से में आ कर उसने तीन साल पहले नुजहत को फ़ोन पर ही तलाक़ दे दिया था।

‘मैं मीडिया’ ने 5 जून की शाम को जब बहादुरगंज थाना फ़ोन किया, तो बताया गया अभी FIR दर्ज़ नहीं हुआ, FIR कल दर्ज़ किया जाएगा। यानी थाना में आवेदन देने के 24 घंटे बाद भी FIR दर्ज़ नहीं हुआ है।

आपको बता दें की तीन तलाक़ बिल तलाक कहने को संज्ञेय अपराध बनाता है जिसके परिणामस्वरूप तीन साल की कैद और जुर्माने की सजा हो सकता है। एक संज्ञेय अपराध ऐसा अपराध होता है जिसमें पुलिस अधिकारी बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकता है। अपराध संज्ञेय होगा, अगर अपराध से संबंधित सूचना पीड़ित महिला या उससे वैवाहिक संबंध से जुड़े किसी व्यक्ति ने दी हो। साथ ही, जिस मुस्लिम महिला को तलाक दिया गया है, वह अपने पति से अपने और खुद पर निर्भर बच्चों के लिए गुजारा भत्ता हासिल करने के लिए अधिकृत है। भत्ते की राशि मेजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित की जाएगी।