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ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बने पौआखाली से चुनावी ग्राउंड रिपोर्ट

पौआखाली पहले पंचायत हुआ करती थी जिसे अब नगर पंचायत में तब्दील कर दिया गया है। कुल 11 वार्ड में बंटी पौआखाली नगर पंचायत में चुनाव का प्रचार ज़ोरों पर है। पहली बार यहाँ के मतदाता मुखिया की जगह मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद का चुनाव करेंगे।

syed jaffer imam Reported By Syed Jaffer Imam |
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आगामी 9 जून को किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड स्थित पौआखाली में नगर पंचायत चुनाव होने हैं। पौआखाली पहले पंचायत हुआ करती थी जिसे अब नगर पंचायत में तब्दील कर दिया गया है। कुल 11 वार्ड में बंटी पौआखाली नगर पंचायत में चुनाव का प्रचार ज़ोरों पर है। पहली बार यहाँ के मतदाता मुखिया की जगह मुख्य पार्षद और उप मुख्य पार्षद का चुनाव करेंगे।

पूर्व मुखिया और पौआखाली नगर पंचायत की मुख्य पार्षद की प्रत्याशी निकहत नाज़ परवीन के पति आज़ाद क़ासमी मानते हैं कि पौआखाली पंचायत को नगर पंचायत बनाना सही निर्णय नहीं है। उन्होंने बताया कि पौआखाली में विकास कार्य की भारी कमी है। पूरी नगर पंचायत क्षेत्र में एक भी शौचालय नहीं है और कई गाँवों में पक्की सड़कों की भी कमी है।

पूर्व पंचायत समिति सदस्य नौशाद आलम कहते हैं कि 2006 से पौआखाली के विकास कार्य के लिए जो फंड आया था, उसमें 70 प्रतिशत कामों में घोटाला किया गया है। अधिकतर सड़कें जर्जर हो चुकी हैं जिसमें पैदल चला जाये तो पैरों में छाले हो जाएं।


नौशाद आलम आगे कहते हैं कि अगर वह जीते तो शौचालय और सड़क निर्माण करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने पौआखाली में प्रखंड कार्यालय बनवाने की भी बात कही।

वहीं वार्ड संख्या 4 से पार्षद प्रतियाशी नाक़िदा परवीन के भाई नायाब अनवर ने कहा कि, पौआखाली पंचयात में नालों की सबसे अधिक समस्या है। नालों के न होने से गन्दा पानी लोगों के खेतों में चला जाता है। कई घरों में राशन कार्ड नहीं बने हैं और अस्पताल की कोई सुविधा नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि पौआखाली में रौशनी की बहुत कमी है। रात 8 बजे ही पूरा इलाका सुनसान हो जाता है। आपातकालीन में स्वास्थ खराब होने पर मरीज़ों के इलाज की पंचायत में कोई सुविधा नहीं है।

पौआखाली के मतदाताओं में इस नगर पंचायत चुनाव को लेकर बहुत आशाएं हैं। वे मानते हैं कि नगर पंचायत बनने से उनके इलाके में विकास के लिए अधिक फंड मिलेगा जिससे विकास कार्यों में तेज़ी आएगी, हालांकि लोग नल जल योजना और सड़क की बदहाली से निराश भी दिखे।

पौआखाली पंचायत के नगर पंचायत बनने पर जहां कई लोग प्रसन्न और उत्साहित हैं, तो ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो यह मानते हैं कि पौआखाली को नगर पंचायत बनाना एक ग़लत निर्णय है। लोगों का कहना है कि पौआखाली के मुख्य बाज़ार को छोड़ कर सभी ग्रामीण इलाके हैं। अधिकतर इलाकों में मूलभूत सुविधाएं जैसे साफ़ पानी और पक्की सड़क नदारद है।

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वार्ड संख्या 9 के निवासी शहीदुल ने कहा कि पौआखाली नगर बनने के लायक ही नहीं है। पंचयात बनने से ग़रीब लोगों को बिजली, पानी और मकान के लिए अधिक टैक्स देना होगा लेकिन बदहाल पड़े इन इलाकों में ज़मीनी स्तर पर कितना विकास होगा यह कहना मुश्किल है।

पौआखाली वार्ड संख्या तीन के रहने वाले मतीउर रहमान ने कहा कि नगर पंचायत बन जाने से आवास योजनाओं में अधिक राशि का लाभ तो मिलेगा, लेकिन साथ में किन चीज़ों में कितना टैक्स देना होगा, इसकी उन्हें जानकारी नहीं हैं। उनकी मानें तो इलाके के अधिकतर ग्रामीणों को यह भी नहीं पता है कि पंचायत से नगर पंचायत बनने से क्या क्या बदलाव आएगा और प्रतियाशियों में से कोई भी लोगों को इसकी जानकारी नहीं दे रहा है।

आदेश कुमार राय पौआखाली बाज़ार में सड़क किनारे फल की छोटी सी दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि बाज़ार में लाइट की व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे बाज़ार में शाम के समय अँधेरा रहता है।

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सैयद जाफ़र इमाम किशनगंज से तालुक़ रखते हैं। इन्होंने हिमालयन यूनिवर्सिटी से जन संचार एवं पत्रकारिता में ग्रैजूएशन करने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता (पीजी) की पढ़ाई की। 'मैं मीडिया' के लिए सीमांचल के खेल-कूद और ऐतिहासिक इतिवृत्त पर खबरें लिख रहे हैं। इससे पहले इन्होंने Opoyi, Scribblers India, Swantree Foundation, Public Vichar जैसे संस्थानों में काम किया है। इनकी पुस्तक "A Panic Attack on The Subway" जुलाई 2021 में प्रकाशित हुई थी। यह जाफ़र के तखल्लूस के साथ 'हिंदुस्तानी' भाषा में ग़ज़ल कहते हैं और समय मिलने पर इंटरनेट पर शॉर्ट फिल्में बनाना पसंद करते हैं।

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