बिहार विधानसभा चुनाव के लिए जदयू की ओर से अपने सभी 115 सीटों को लेकर उम्मीदवारों के नाम सामने रख दिए गए हैं। इस बार के टिकट वितरण को देखें तो समझ में आता हैं सीएम नीतीश कुमार इस बार अपने कोर वोटबैंक पिछड़ा और अतिपिछड़ा को सााधने पर पूरा ध्यान लगाए हुए हैं। अपने कोर वोटर के अलावा नीतीश कुमार अल्पसंख्यक समुदाय और यादवों को भी लुभाने के प्रयास करते दिख रहे हैं। उनकी पार्टी ने ढ़ाई दर्जन सीटों पर मुस्लिम-यादव कैंडिडेट उतारकर आरजेडी के एम-वाई समीकरण में सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर रखी है। वहीं नीतीश कुमार ने इस बार आरजेडी से आए नेताओं को भी निराश नहीं किया है।

बिहार की राजनीति में जाति का गणित काफी अहम है और इसे नाकारा नहीं जा सकता। चुनाव भर भले विकास की और अन्य मुद्दों की बात हो लेकिन अंतिम दिन सारी बात जाति के समीकरण पर आकर ठहर जाती है। इसालिए नीतीश कुमार ने बिहार के जातीय समीकरण को ध्यान में रखकर उम्मीदवार उतारे हैं। नीतीश कुमार पिछड़े और अति पिछड़े समुदाय की बदौलत 15 सालों से बिहार की गद्दी पर बने हुए हैं।

इस बार के चुनाव में जदयू ने 115 सीटों में से सबसे अधिक 67 प्रत्याशी पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग से उतारे हैं। पिछड़ा वर्ग से नीतीश ने 40 प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा 19 यादव,12 कुर्मी और तीन वैश्य समुदाय के लोगों को टिकट दिया है. वहीं, अति पिछड़ा समुदाय से 27 प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें 8 धानुक और 15 कुशवाहा शामिल हैं। इस तरह से नीतीश कुमार ने अपने कोइरी और कुर्मी मूल वोटबैंक को मजबूती से जोड़े रखने का पूरा प्लान भी तेयार रखा है।

बता दें कि बिहार में एक बड़ा तबका अगड़ों का नीतीश कुमार के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ इस बार नीतीश कुमार ने अगड़ों को भी अपने साथ जोड़ने की कवायद की है। यही वजह है कि जेडीयू ने अपने कोटे की 115 सीटों में से 19 सीटें सवर्ण समुदाय के लोगों को दी है, जिनमें सबसे ज्यादा 8 भूमिहार, सात राजूपत और दो ब्राह्मण समाज के हैं।

यादव-मुस्लिम दांव

जेडीयू ने बिहार के अनुसूचित जाति समुदाय के उम्मीदवारों को 17 टिकट दिए हैं और अनुसूचित जनजाति को एक टिकट दिया है। इस सबके अलावा नीतीश कुमार ने अपने कोटे की पांच अनुसूचित जाति वाली सीटें जीतनराम मांझी की पार्टी को दे रखी हैं। वहीं नीतीश ने 11 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी और 30 सीटों पर यादव – मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया है। माना जा रहा है कि नीतीश कुमार आरजेडी के कोर वोटबैंक M-Y समीकरण को साधने में जुटे हैं।

वहीं जेडीयू ने इस बार के चुनाव में अपने मौजूदा 10 विधायकों का टिकट काट दिया है। इसके बदले करीब डेढ़ दर्जन नए प्रत्याशी जदयू ने उतारे हैं। इसमें आरजेडी से आए नेताओं की प्रमुखता है। आरजेडी छोड़ जेडीयू में आए फराज फातमी, महेश्वर यादव दिलीप राय और लालू-राबड़ी के समधी चंद्रिका राय को भी उम्मीदवार बनाया गया है।

यानि नीतीश कुमार ने अपने सोशल इंजिनियरिंग के कमाल के जरिए लगभग हर वर्ग और जाति का वोट साधने की कोशिश की है। ऐसे में चुनाव में वोटिंग से पहले नीतीश कुमार की तैयारी पूरी है। अब देखना होगा कि बिहार की सियासी जंग को वो फतह कर पाते हैं या नहीं।