कटिहार में नगर निगम के वर्तमान उप-मेयर मंजूर खान और पूर्व महापौर विजय सिंह के बीच कुर्सी को लेकर चल रही रस्साकशी में शहर का विकास पूरी तरह ठप हो गया है। कभी पूर्व महापौर के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव, तो कभी वर्तमान उप-मेयर के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव और सियासत ने शहर के विकास की गति रोक दी है।

45 वार्ड और सालाना 425 करोड़ रुपए के बजट वाले इस नगर निगम में लगभग 2 सालों से आपसी राजनीतिक लड़ाई के चलते विकास के मुद्दे पर बैठक नहीं हुई है, जिस कारण नगर क्षेत्र से जुड़ी 264 योजनाएं लंबित हैं। अब शहर में जलजमाव, गंदगी और विकास नहीं होने से आम लोगों के साथ-साथ पार्षद भी काफ़ी परेशान हैं।

पार्षदों की मानें, तो वे जिस जनता के वोट से जीत कर आए हैं, वो जनता उन्हीं से काम करने को कह रही है, लेकिन दो दिग्गजों कि इस राजनीतिक रस्साकशी में शहर का विकास पूरी तरह ठप हो गया है।

पार्षद सूरज रॉय ने बताया,

लोकतंत्र में अविश्वास पार्षदों का हक़ है। ये लड़ाई अपनी जगह है। कटिहार शहर का लगभग 450 करोड़ का बजट है, लेकिन लगभग दो साल से इस खींचतान में कटिहार का विकास ठप है और पार्षद को जनता के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है। नगर निगम की गंदी राजनीति के कारण पार्षद अपने क्षेत्र में काम नहीं कर पाते हैं।

सूरज रॉय, पार्षद

उधर, पूर्व मेयर विजय सिंह कहते हैं,

एक साल से नगर निगम का विकास ठप पड़ा हुआ है। कुछ लोगों द्वारा नगर निगम को बदनाम करने की साज़िश की जा रही है। हम 9 साल से महापौर थे, तो ये हमको बदनाम करने की साजिश है। महापौर को अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए काम करना चाहिए था, लेकिन सिर्फ़ राजीनीति कर दूसरे को बदनाम करना आता है, अपना काम करना नहीं आता है।

विजय सिंह, पूर्व मेयर

वहीं, उप महापौर मंज़ूर खान के ख़िलाफ़ भी अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। महापौर मंज़ूर ख़ान कहते हैं,

हम चाहते हैं कि कम से कम साधारण बैठक ज़रूर हो, जिससे कटिहार शहर का विकास हो सके। तकनीकी वजह से काम नहीं हो पा रहा है। मेयर के होने के बावजूद मुझ पर दुबारा अविश्वास लाया गया है, जबकि मेरा कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है। जब तक मेयर हैं, डिप्टी मेयर कुछ नहीं करेगा। अविश्वास प्रस्ताव में सिर्फ़ 15 पार्षदों के हस्ताक्षर हैं, बाकी 23 लोगों के क्यों नहीं हैं?

मंज़ूर ख़ान, उप महापौर