Main Media

Seemanchal News, Kishanganj News, Katihar News, Araria News, Purnea News in Hindi

Support Us

कटिहार: बड़े शेरशाहवादी नेता, चार बार के विधायक मोहम्मद सकुर कौन थे?

Main Media Logo PNG Reported By Main Media Desk |
Updated On :

कटिहार में शेरशाहवादी समाज के एक बड़े नेता मोहम्मद सकुर का 82 साल की उम्र में सोमवार को निधन हो गया। सकुर कटिहार के बरारी और प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे हैं।

कटिहार में शेरशाहवादी समाज की आवाज़ को बुलंद करने वाले तीन नेताओं में मुबारक हुसैन, मोहम्मद सकुर और मंसूर आलम की गिनती होती है। इनमें से मोहम्मद सकुर इन तीनों में सबसे सीनियर थे। मुबारक हुसैन की मृत्यु पहले ही हो चुकी है। मंसूर आलम के बेटे तौकीर आलम कांग्रेस के नेता हैं और प्राणपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते हैं।

Also Read Story

किशनगंज: उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के तत्कालीन मैनेजर पर 1 लाख रुपए से ज़्यादा के गबन का आरोप

अनियंत्रित हाइवा ट्रक की चपेट में आने से 13 वर्षीय छात्र की मौत, सड़क जाम

बिहार नगरपालिका चुनाव 18 और 28 दिसंबर को

असर: आपदा मंत्री शाहनवाज़ आलम ने दिलाया नदी कटान से स्थाई हल का भरोसा

किशनगंज: आदिवासी समुदाय के नाइट गार्ड की संदिग्ध अवस्था में मौत, हंगामा

अररिया के आजाद एकेडमी मैदान में होगा इमारत शरिया का ‘अजीमुश्शान जलसा’

कटिहार: ग्रामीण किसान बदमाशों के तांडव का शिकार , कहीं हत्या, तो कहीं मारपीट की खबर

दिघलबैंक में गलगलिया-अररिया रेललाइन मुआवज़े का विवाद थमा, निर्माण कार्य को हरी झंडी

खबर का असर : मैं मीडिया की ग्राउंड रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी ने किया विद्यालय का औचक निरीक्षण

मोहम्मद सकुर पहली बार CPM के टिकट पर 1969 में बरारी से विधायक बने। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के सत्यनारायण सिंह को हराया था। सकुर को 11,783 तो सत्यनारायण सिंह को 7,617 वोट मिले थे।

1972 विधानसभा चुनाव में बरारी से ही कांग्रेस के टिकट पर दूसरी बार विधायक बने। 21,853 वोट लाकर उन्होंने महेंद्र नारायण यादव को इस चुनाव में मात दी।

1977 में प्राणपुर विधानसभा अस्तित्व में आया, तो मोहम्मद सकुर ने दूसरे बड़े शेरशाहवादी नेता मंसूर आलम के लिए बरारी सीट छोड़ दी और प्राणपुर से चुनाव लड़ा लेकिन, मोहम्मद सकुर ये चुनाव महेंद्र नारायण यादव के हाथों हार गए। उधर, बरारी से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे मंसूर आलम को बासुदेव प्रसाद सिंह ने हरा दिया।

साल 1980 के चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मोहम्मद सकुर ने 21,853 वोट के साथ प्राणपुर में महेंद्र नारायण यादव को हरा दिया। साल 1985 का चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा, लेकिन 1985 में बरारी से मंसूर आलम कामयाब हुए।

1990 और 1995 में मोहम्मद सकुर बतौर निर्दलीय उम्मीदवार प्राणपुर से चुनाव लड़े, लेकिन बुरी तरह से हार गए। 2000 का चुनाव उन्होंने NCP टिकट पर बरारी से लड़ा, लेकिन राजद के टिकट पर चुनाव लड़ रहे मंसूर आलम ने उन्हें हरा दिया।

mohammad sakoor with tariq anwar

फ़रवरी 2005 में उन्होंने बरारी से मंसूर आलम को हरा दिया, लेकिन नवंबर 2005 में यहां से भाजपा जीत गई।

2010 में भी बरारी से मोहम्मद सकुर (एनसीपी) और मंसूर आलम (राजद) दोनों ही चुनाव लड़े और भाजपा जीत गई। 2015 में महागठंधन की ओर से राजद प्रत्याशी नीरज ने बरारी से एनसीपी से मोहम्मद सकुर को हरा दिया और दूसरी तरफ प्राणपुर से कांग्रेस टिकट पर मंसूर आलम के बेटे तौकीर आलम चुनाव हार गए।

2019 लोकसभा चुनाव से पहले एनसीपी के बड़े नेता और पूर्व कटिहार सांसद वापस कांग्रेस में चले गए, तब मोहम्मद सकुर एनसीपी में टिके रहे। कटिहार के टाउन हॉल में एक बड़ा प्रोग्राम आयोजित कर पार्टी ने मोहम्मद सकुर को कटिहार लोकसभा से उम्मीदवार घोषित किया। इस चुनाव में उन्हें मात्र 9,000 वोट आए, ये उनका आखिर चुनाव था।

सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Become A Member बटन पर क्लिक करें।

Become A Member

This story has been done by collective effort of Main Media Team.

Related News

सीमांचल में चल रहा 3 दिन का तालिमी कारवां

कटिहार: खंडहरनुमा जर्जर इंदिरा आवास कभी भी बन सकता है बड़े हादसे की वजह

किशनगंज: वार्ड सदस्यों ने पंचायती राज मंत्री मुरारी प्रसाद गौतम का फूंका पुतला

हर साल कटाव का कहर झेल रहा धप्परटोला गांव, अब तक समाधान नहीं

किशनगंज: जदयू के नए प्रखंड अध्यक्षों का अभिनंदन समारोह, पोठिया और दिघलबैंक का चुनाव स्थगित

JD(U) के प्रखंड अध्यक्ष चुनाव में जमकर बवाल, हाथापाई

72 घन्टे तक सील रहेगा भारत-नेपाल बॉर्डर, सीमा पर चौकसी बढ़ाई गई

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latests Posts

सहरसा का बाबा कारू खिरहर संग्रहालय उदासीनता का शिकार

Ground Report

स्कूल जर्जर, छात्र जान हथेली पर लेकर पढ़ने को विवश

सुपौल: पारंपरिक झाड़ू बनाने के हुनर से बदली जिंदगी

गैस कनेक्शन अब भी दूर की कौड़ी, जिनके पास है, वे नहीं भर पा रहे सिलिंडर

ग्राउंड रिपोर्ट: बैजनाथपुर की बंद पड़ी पेपर मिल कोसी क्षेत्र में औद्योगीकरण की बदहाली की तस्वीर है

मीटर रीडिंग का काम निजी हाथों में सौंपने के खिलाफ आरआरएफ कर्मी