बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर कई नेताओं को टिकट मिला है तो कइयों का टिकट भी कट गया है। ऐसे में जिन विधायकों का टिकट कटा है वो अपने पार्टी से नाराज़ हो चुके हैं, ऐसे में ये नाराज नेता अब निर्दनीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भर रहे हैं। ऐसे में अब पार्टियों के लिए उनके अपने ही नेता मुश्किल का कारण बन गए हैं। अब पार्टियों ने अपने इन बागी नेताओं को अल्टीमेटम देना शुरू कर दिया है। जिसके कारण पार्टियों ने अपने बागी नेताओं को अल्टीमेटम देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में अब बीजेपी ने भी शख्त रवैया अपना लिया है।

बीजेपी ने अपने वैसे नेताओं को फोन घुमाना शुरू कर दिया है जिन्होंने बिना पार्टी सिंबल के अपना नामांकन भरा है। पार्टी की ओर से बगावती तेवर वाले वैसे नेता जो चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं उन्हें फोन करके अंतिम मौका दिया है। ताकि वो अपना नॉमिनेशन वापस ले सकें। जानकारी है कि पहले चरण के 71 सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर करीब आधा दर्जन से अधिक बीजेपी के चर्चित चेहरों ने पार्टी से नाता तोड़ दूसरे दलों से चुनावी मैदान में कूद गए हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ बीजेपी ने अब कड़ा रूख अख्तियार कर लिया है। बीजेपी ने ऐसे नेताओं से साफ कह दिया है कि नाम वापसी की तिथि तक का अपना नाम वापस ले लें।

सूत्रों की माने तो बागी नेताओं को पार्टी नेतृत्व ने फोन कर साफ कहा है कि वे नाम वापस लें वरना उन्हें छह साल के लिए दल की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया जाएगा। हालांकि इस आदेश का बागी नेताओं पर कितना असर होगा यह तो 12 अक्टूबर तक पता चल ही जाएगा। क्योंकि इसी दिन पहले चरण के चुनाव को लेकर नाम वापस लेने की अंतिम तारीख है।

बताते चलें कि साल 2015 में बीजेपी 157 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। जिसमें कई नेताओं को मैदान में ताल ठोकने का मौका मिला था। लेकिन इसबार जेडीयू से हुए गठबंधन के कारण पार्टी के कोटे में केवल 121 सीटें आई हैं जिसमें से 11 सीटें वीआईपी को चली गई हैं। ऐसे में बीजेपी के पास केवल 110 सीटें ही बची हैं। यानि की करीब 47 नेताओं को टिकट इस बार सीधे तौर पर कट गया है। जिन-जिन नेताओं ने पिछली बार पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में भाग्य आजमाया था, वे इस बार भी दूसरे दलों का दामन थामकर अपनी किस्मत आजमाना चाह रहे हैं।

बताते चलें कि बीजेपी में बागियों की संख्या हर दिन बढ़ते जा रही है। बागियों में सबसे चर्चित चेहरा राजेन्द्र सिंह व रामेश्वर चौरसिया हैं। जिन्होंने लोजपा को ज्वाइन कर सासाराम से नामांकन भरा है। रामेश्वर चौरसिया पार्टी के फायरब्रांड नेता माने जाते थे और प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का पक्ष मजबूती से वे रखते थे। लेकिन इस बार उनका टिकट कट गया जिसके कारण उन्होंने पार्टी छोड़कर लोजपा के टिकट पर सासाराम से चुनावी मैदान में उतरने का मन बना लिया। वहीं साल 2015 में पार्टी के सीएम फेस के रूप में अचानक से चर्चा में आए राजेन्द्र सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष थे वो भी लोजपा में शामिल हो गए। इनके अलावा कई ओर बड़े नेता बागी हो चले हैं, जो दूसरी पार्टियों के टिकट पर चुनावी मैदान में उतर गए हैं ।