NEET पेपर लीक के विरोध में बिहार के किशनगंज जिले के बहादुरगंज में हुए GenZ प्रदर्शन ने 25 जुलाई को उग्र रूप ले लिया जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुईं ।
इस मामले में बहादुरगंज पुलिस ने 22 लोगों को हिरासत में लिया था। वहीं, बिना अनुमति सड़क पर धरना-प्रदर्शन करने और अराजकता फैलाने के आरोप में 46 लोगों को नामजद करते हुए FIR दर्ज की गई।
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नामजद 46 लोगों में कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं, जिनका दावा है कि वे या तो उस समय देश से बाहर थे या फिर प्रदर्शन वाले दिन बहादुरगंज में मौजूद ही नहीं थे।
इन्हीं में से एक नाम बहादुरगंज प्रखंड की लौचा पंचायत स्थित सतमेढ़ी गांव निवासी सदाकत कौनैन का भी है। सदाकत वर्तमान में रूस के शख़्ती शहर में सिलाई का काम करते हैं।
सदाकत का कहना है कि वे मार्च 2026 में रूस गए थे और तब से वहीं रहकर काम कर रहे हैं।
इस बीच बिहार सरकार के गृह विभाग ने 27 जुलाई को एक प्रेस रिलीज़ जारी कर घोषणा की कि 26 जुलाई 2026, शाम 6 बजे तक NEET/UG आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे, गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाएगा और भविष्य में भी उनके खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
लौचा पंचायत के एक अन्य नामजद अभियुक्त अदनान अमीनी का कहना है कि घटना वाले दिन वह धरना-प्रदर्शन स्थल से करीब 32 किलोमीटर दूर किशनगंज शहर स्थित गर्ल्स हाई स्कूल में डीएलएड की परीक्षा दे रहे थे।
अदनान ने अपना एडमिट कार्ड दिखाते हुए दावा किया कि वह पिछले कई महीनों से किशनगंज शहर में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं और वर्तमान में उनकी परीक्षा चल रही है । इसके बावजूद उन्हें भी इस मामले में नामजद कर दिया गया है।
25 जुलाई को एलआरपी चौक पर हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद बहादुरगंज थाने में गिरफ्तार किए गए 22 आरोपितों और 46 नामजद लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
बहादुरगंज के अंचलाधिकारी आशीष कुमार सिंह ने एफआईआर में कहा कि उग्र प्रदर्शन के दौरान डीएसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हुए और कई सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुचाया गया जिसके बाद पुलिस ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार किए गए 22 आरोपितों में एक दर्जन से अधिक किशोर शामिल हैं, जिन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत कर बाल संरक्षण गृह में रखा गया।
वहीं, कुछ गिरफ्तार किशोरों के परिजनों का आरोप है कि उनके बच्चों को बेवजह गिरफ्तार किया गया, वे किसी भी तरह से प्रदर्शन में शामिल नहीं थे।
स्थानीय जिला परिषद प्रतिनिधि इमरान आलम का कहना है कि धरना-प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था। बाद में बाहर से आए कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की और पुलिस पर हिंसक हमला किया।
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