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क्या बिहार में शराबबंदी क़ानून रद्द होगा?

रिपोर्ट कहती है कि आय में सुधार के बावजूद राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 1990 के मुक़ाबले कम है। ऐसा क्यों है? ऐसा इसलिए है कि साल 2016 में शराबबंदी क़ानून लागू होने के चलते राज्य को आर्थिक नुक़सान हो रहा है।

Reported By Umesh Kumar Ray |
Published On :
will the liquor ban law in bihar be repealed?

पिछले दिनों एक थिंकटैंक, नेशनल काउंसिल ऑफ अपलाइड इकोनॉमिक रिसर्च ने तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया था। इस कार्यक्रम में बिहार को लेकर एक रिसर्च पेपर पेश किया गया। इस पेपर को लेकर बिहार में राजनीतिक बवाल मच गया है। 100 पन्नों की इस रिपोर्ट को सात हिस्सों में बाँटा गया है, जिसमें बिहार के उत्थान से लेकर पतन और भविष्य के रास्तों पर तफ़सील से बात की गई है।


रिपोर्ट में विकास सूचकांकों के साथ साथ यह भी मशविरा दिया गया है कि बिहार सरकार अपनी आय में इज़ाफ़ा किन तरीक़ों से कर सकती है। इन्हीं मशविरों में एक मशविरा है शराबबंदी को हटाकर शराब पर एक्साइज ड्यूटी लगाना। रिपोर्ट कहती है कि आय में सुधार के बावजूद राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 1990 के मुक़ाबले कम है। ऐसा क्यों है? ऐसा इसलिए है कि साल 2016 में शराबबंदी क़ानून लागू होने के चलते राज्य को आर्थिक नुक़सान हो रहा है।

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रिपोर्ट परत दर परत शराबबंदी क़ानून के प्रभावों की बखिया उधेड़ती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल 2016 में शराबबंदी क़ानून लागू करने के पीछे मुख्य वजह ये बताई गई थी कि घरेलू हिंसा में एक बड़ी भूमिका शराब का सेवन है और अगर शराबबंदी क़ानून लागू होगा तो लोग घरेलू संसाधनों का इस्तेमाल उत्पादक गतिविधियों में कर सकते हैं। महिलाओं और एक्टिविस्टों ने यह कहकर लिकर बैन का समर्थन किया कि इससे शराब जनित हिंसक घटनाओं में कमी आएगी।


अध्ययन कहता है कि शराबबंदी कितनी प्रभावी है, ये बताने के लिए हमारे पास पर्याप्त आँकड़े मौजूद हैं। आगे एक टेबल शेयर करते हुए रिपोर्ट बताती है कि 2016 के बाद महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है। रिपोर्ट कहती है कि मौजूद आँकड़े ये संकेत नहीं देते हैं कि शराबबंदी के बाद महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध में कमी आई है। बल्कि शराबबंदी क़ानून के राज में ये चिंताएँ बढ़ीं कि इससे शराब के अवैध कारोबार में इज़ाफ़ा होगा, इस क़ानून को लागू करने में चुनौतियाँ आएंगी, भ्रष्टाचार होगा और वैकल्पिक ड्रग्स का इस्तेमाल बढ़ेगा। रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि अवैध शराब के कारोबार में इज़ाफ़ा हुआ है जिससे शराब का सेवन अधिक हो रहा है। इससे अपराध और भ्रष्टाचार बढ़ा है और दूसरे तरह के मादक पदार्थों के इस्तेमाल में इज़ाफ़ा हुआ है। इसके अलावा रिपोर्ट कहती है कि शराबबंदी क़ानून से भारी आर्थिक नुक़सान भी हुआ है। शराबबंदी से पहले शराब पर एक्साइज ड्यूटी कमाई का एक अहम ज़रिया था।

ग़ौरतलब हो कि बिहार में शराबबंदी क़ानून, साल 2015 का नीतीश कुमार का चुनावी वादा था। उन्होंने चुनाव के दौरान महिलाओं से कहा था कि अगर इस चुनाव में वह जीत जाते हैं, तो बिहार में पूर्ण शराबबंदी क़ानून लागू होगा। ऐसा ही हुआ भी। अप्रैल 2016 में बिहार में शराबबंदी क़ानून लागू हो गया। इसके बाद बिहार सरकार समय समय पर आँकड़ों के ज़रिये यह दावा करती रही कि शराबबंदी क़ानून का बिहार के लोगों पर सकारात्मक सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पड़ा है। एक ऐसा ही अध्ययन जारी कर बिहार सरकार ने कहा था कि सर्वे में शामिल 80 प्रतिशत महिलाओं ने शराबबंदी क़ानून को ठीक बताया है और सिर्फ 13.8 प्रतिशत लोग इस क़ानून से इत्तेफाक नहीं रखते हैं।

अध्ययन में दावा किया गया था कि क़रीब 4000 घरों में सर्वे के आधार पर रिपोर्ट तैयारी की गई है।

रिपोर्ट में सर्वे का हवाला देते हुए कहा गया था कि शराबबंदी क़ानून लागू होने के चलते 34 प्रतिशत लोग शराब न पीकर 1000 रुपये और 16.9 प्रतिशत लोग 2000 रुपये बचा ले रहे हैं। वहीं महिलाओं पर असर के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया था कि शराबबंदी के बाद घरों में महिलाओं की इज़्ज़त बढ़ी है और 70 प्रतिशत महिलाओं ने इसका समर्थन किया। वहीं, 90 प्रतिशत महिलाओं ने कहा था कि शराबबंदी क़ानून के बाद घरेलू हिंसा की घटनाओं में कमी आई है। एक प्रख्यात जर्नल दि लैंसेट ने भी अपने एक अध्ययन में कहा था कि बिहार में शराब पर बैन लगने से पुरुषों में शराब का इस्तेमाल कम हुआ, जिससे ज़्यादा वज़न/मोटापे के मामलों में कमी आई। साथ ही महिलाओं पर शारीरिक हिंसा में कमी और आर्थिक आज़ादी में बढ़ोतरी हुई।

लेकिन ताज़ा अध्ययन इन दोनों रिपोर्टों को सिर के बल खड़ा करता है। इस अध्ययन के सामने आने के बाद राजद ने सरकार पर सवाल उठाया है। राजद नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में शराबबंदी क़ानून बिना किसी सर्वे के लागू किया गया था और वह ख़ुद इसके गवाह हैं।

एनडीए की सहयोगी पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के जीतनराम माँझी ने कहा है कि बिहार में गुजरात के तर्ज़ पर शराबबंदी क़ानून लागू करना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि शराबबंदी की समय समय पर समीक्षा होती रहती है और सामने आ रही नई रिपोर्टों की भी समीक्षा की जाएगी। आगे क्या निर्णय लिया जाना है, यह कैबिनेट का सामूहिक फ़ैसला होगा। वहीं, जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने दो टूक लहजे में कहा कि शराबबंदी क़ानून को वापस लेने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है।

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Umesh Kumar Ray started journalism from Kolkata and later came to Patna via Delhi. He received a fellowship from National Foundation for India in 2019 to study the effects of climate change in the Sundarbans. He has bylines in Down To Earth, Newslaundry, The Wire, The Quint, Caravan, Newsclick, Outlook Magazine, Gaon Connection, Madhyamam, BOOMLive, India Spend, EPW etc.

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