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बिहार: रेलवे भर्ती प्रदर्शन में चार साल बाद क्यों हुई छात्र नेता ओसामा की गिरफ़्तारी?

पिछले कुछ वर्षों से वह अपनी अलग टीम बनाकर पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। पिछले साल ओसामा की टीम की उम्मीदवार सलोनी राज ने महासचिव पद पर जीत हासिल की थी। इस साल भी उपाध्यक्ष पद पर ओसामा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार शिफ़त फ़ैज़ ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में ओसामा समर्थित उम्मीदवार का मुक़ाबला जदयू छात्र नेता आयुष हर्ष से था।

Reported By Umesh Kumar Ray |
Published On :
why was student leader osama arrested four years after the railway recruitment protest

छात्र नेता ओसामा ख़ुर्शीद 16 मई की शाम गंगा-जेपी पथ पर अपने कुछ साथियों के साथ थे। तभी पटना पुलिस की दो गाड़ियाँ उनके पास आकर रुकीं। गाड़ियों से 8 से 10 पुलिसकर्मी उतरे और उन्हें गिरफ़्तार कर लिया। पहले तो ओसामा और उनके साथियों को कुछ समझ ही नहीं आया, क्योंकि हाल में ओसामा के ख़िलाफ़ किसी तरह की कोई शिकायत थाने में दर्ज नहीं हुई थी।


ओसामा के दोस्त सादिक़ रज़ा कहते हैं, “हमने जब पुलिस से पूछा कि उन्हें क्यों गिरफ़्तार किया जा रहा है, तो उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा कि मुक़दमा है।”

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पुलिस उन्हें कदमकुआँ थाने लेकर गई। ओसामा के दोस्त भी तुरंत थाने पहुँचे, जहाँ पता चला कि चार साल पुराने एक मामले में ओसामा की गिरफ़्तारी की गई है।


क्या है मामला

दरअसल, कदमकुआँ थाने की पुलिस ने ओसामा ख़ुर्शीद की गिरफ़्तारी साल 2022 में रेलवे भर्ती परीक्षा में धांधली के ख़िलाफ़ पटना के भिखना पहाड़ी इलाक़े में हुए आंदोलन से जुड़े मामले में की है।

उल्लेखनीय है कि साल 2022 में रेलवे भर्ती परीक्षा में धांधली को लेकर पूरे देश में नौजवान सड़कों पर उतर आए थे। पटना में भी इसके ख़िलाफ़ ज़बरदस्त प्रदर्शन देखने को मिला था।

पटना पुलिस ने इस मामले में एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें पाँच नामज़द और 250 से 300 अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया था। इन नामज़द आरोपितों में ओसामा ख़ुर्शीद भी शामिल थे। एफआईआर के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान चार नामज़द लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया था, लेकिन ओसामा की गिरफ़्तारी नहीं हुई थी।

एफआईआर में पुलिस ने यह भी लिखा था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर हमले किए गए थे।

एफआईआर दर्ज होने से लेकर अब तक ओसामा को कोई समन नहीं मिला था और न ही पुलिस ने कभी उनसे संपर्क किया था।

सादिक़ रज़ा कहते हैं, “हमें बिल्कुल पता नहीं था कि कोई मुक़दमा चल रहा है। अब तक कोर्ट से कोई समन नहीं आया और न ही गिरफ़्तारी के समय पुलिस ने हमें कोई वारंट दिखाया। हमें अरेस्ट मेमो तक नहीं दिया गया।”

“छात्र संघ चुनाव परिणाम के चलते कार्रवाई”

अब सवाल उठ रहा है कि पिछले चार सालों में पुलिस ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की, लेकिन अचानक अब कैसे सक्रिय हो गई?

सादिक़ रज़ा का आरोप है कि यह कार्रवाई सीधे तौर पर विश्वविद्यालय की राजनीति से जुड़ी हुई है।

ओसामा ने पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान साल 2018-19 में सचिव पद के लिए छात्र संघ चुनाव लड़ा था।

पिछले कुछ वर्षों से वह अपनी अलग टीम बनाकर पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। पिछले साल ओसामा की टीम की उम्मीदवार सलोनी राज ने महासचिव पद पर जीत हासिल की थी।

इस साल भी उपाध्यक्ष पद पर ओसामा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार शिफ़त फ़ैज़ ने जीत दर्ज की। इस चुनाव में ओसामा समर्थित उम्मीदवार का मुक़ाबला जदयू छात्र नेता आयुष हर्ष से था।

सादिक़ कहते हैं, “इस बार छात्र संघ चुनाव में हमारी जीत के बाद मीडिया में यह नैरेटिव चलाया गया कि हमने सत्ताधारी दलों के उम्मीदवार को हराकर जीत दर्ज की। इसी वजह से सरकार सक्रिय हुई और उसने सोचा कि किसी तरह हमें चुप करा दिया जाए।”

वह कहते हैं कि भाजपा जिस तरह से पूरे देश में शासन चला रही है, वही तरीका अब बिहार में भी अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “भाजपा का उद्देश्य अल्पसंख्यकों और छात्रों की आवाज़ों को दबाना है। हम लोगों ने TRE-4 को लेकर हुए प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और जल्द ही एक और प्रदर्शन करने वाले थे। सरकार नहीं चाहती कि छात्रों और नौजवानों की आवाज़ बुलंद हो, इसलिए यह कार्रवाई की गई।”

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Umesh Kumar Ray started journalism from Kolkata and later came to Patna via Delhi. He received a fellowship from National Foundation for India in 2019 to study the effects of climate change in the Sundarbans. He has bylines in Down To Earth, Newslaundry, The Wire, The Quint, Caravan, Newsclick, Outlook Magazine, Gaon Connection, Madhyamam, BOOMLive, India Spend, EPW etc.

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