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बिहार में ऑनर किलिंग के बाद हत्यारे पिता के समर्थन में क्यों उतरे लोग?

अंतरजातीय विवाहों में ऑनर किलिंग की घटनाओं को देखें, तो वर्ष 2022 में देशभर में ऑनर किलिंग के कुल 18 मामले सामने आये थे, जिसमें बिहार भी शामिल था, हालांकि यहां उस साल ऑनर किलिंग का सिर्फ एक मामला दर्ज हुआ था।

Reported By Umesh Kumar Ray |
Published On :
why did people come out in support of the killer father after the honor killing in bihar

“ऐसी बिगड़ी संतान के कारण सम्मान में लगी ठेस से उपजे क्रोध में ऐसा करने को मजबूर कर दिया। ऐसी कलंकी संतान पहले ही मर जाय तो अच्छा है।”


“सुन बेटी, तुम उसी वक्त ब्राह्मण नहीं रही जब तूने पिता के मान-सम्मान, प्रतिष्ठा के विमुख कदम बढ़ा दिया था।”

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“भगवान को ऐसा पिता सबको देना चाहिए।”


“जिसको न्याय चाहिए उसकी खुद की बेटी भी ऐसे ही भाग जाए, किसी आवारा लड़के के साथ, किसी दारूबाज लड़के के साथ, यही ऊपर वाले का सबसे बड़ा न्याय होगा। जो जो इस विषय पर न्याय मांगेगा उसकी खुद की बेटी भाग जाएगी और यही न्याय होगा ऊपर वाले का।”

“पिता को अगर फांसी भी हुई, तो वह अमरा हो जाएगा, लेकिन तुम जिंदा रहकर भी बार बार मरोगी।”

“ऐसा पिता हरेक घर में होना चाहिए।”

पिछले कुछ दिनों में अलग अलग सोशल मीडिया पर एक घटना को लेकर इस तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं, जिसमें हत्या के एक आरोपी का महिमामंडन किया गया।

इस हत्या की जड़ में अंतरजातीय प्रेम विवाह है। सहरसा जिला निवासी युवती तनुप्रिया का परिवार ब्राह्मण जाति से ताल्लुक रखता है और सुपौल जिले का राहुल मंडल, पिछड़े समुदाय से आता था। दोनों मेडिकल के छात्र थे और पांच मई को दोनों ने शादी कर ली थी। फिलहाल दोनों दरभंगा मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे।

घटना के मुताबिक, इस शादी से तनुप्रिया के पिता प्रेम शंकर झा बेहद नाराज थे। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने कॉलेज परिसर में घुसकर राहुल मंडल को नजदीक से गोली मार दी।

क्या है पूरी घटना

घटना के बारे में बताया जाता है कि प्रेम शंकर झा ने हत्या को अंजाम देने के लिए पहले से ही योजना बना रखी थी। इसी योजना के तहत 5 अगस्त को वह मुंह पर मास्क, हाथ में दस्ताना और रेनकोट पहन कर अस्पताल पहुंचा था और राहुल की बाइक का एक तार चुपके से काट दिया था।

प्रत्यक्षदर्शी व राहुल के दोस्त संजीव कुमार ने मीडिया में दिये बयान में कहा है कि राहुल ने उन्हें अपनी बाइक निकालने के लिए कहा था लेकिन बाइक स्टार्ट नहीं हुआ तो संजीव ने राहुल को इसकी सूचना दी। राहुल नीचे आया और बाइक का मुआयना किया, तो पता चला कि बाइक का एक तार कटा हुआ है। उसी वक्त प्रेम शंकर – जो मास्क लगाये हुए थे और रेनकोट पहने हुए थे – आये और राहुल पर गोली चला दी।

वहीं, अनु प्रिया का इस घटना के संबंध में कहना है कि हाजिरी बनाने के बाद वह बिल्डिंग से नीचे उतर कर पावर ग्रिड की तरफ गई थी क्योंकि पानी नहीं आ रहा था। तनुप्रिया ने कहा कि जब राहुल को गोली मारी गई, उस वक्त वह उससे फोन पर बात कर रहा था और किसी तरह के अनहोनी का आशंका जता रहा था क्योंकि बाइक का तार जानबूझ कर काटा हुआ प्रतीत हो रहा था।

“वह बाइक के पास खड़े थे, तभी काले नकाब में एक आदमी आया। वह बंदूक लेकर था। वो मेरा पापा था। उन्होंने पूछा कि किसकी बुलेट है, राहुल ने कहा कि मेरी है, तो उन्होंने गोली मार दी और भाग गये। राहुल मेरी गोद में आकर गिर पड़े,” अनु प्रिया ने कहा।

दोनों के बीच कुछ समय से प्रेम चल रहा था, जिसकी खबर तनु प्रिया के परिवार को लग गई थी। बताया जाता है कि इस वजह से तनु प्रिया को उसके परिजनों ने काफी परेशान भी किया था। दोनों ने आखिरकर पांच मई को कोर्ट में शादी कर ली थी। इस मामले में तनु प्रिया के परिजनों की तरफ से राहुल के खिलाफ थाने में अपहरण की एक शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। बाद में पुलिस ने युवती को बरामद किया। युवती ने कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराया और बताया कि उसने रजामंदी से राहुल से शादी की, जिसके बाद मामला शांत हो गया था। लेकिन, तनु प्रिया और राहुल को नहीं पता था कि ये शांति एक ऐसे तूफान की आहट थी, जो तनु प्रिया और राहुल के परिवार की जिंदगी उजाड़ देगी।

अनु प्रिया फिलहाल अपनी ससुराल में है और लगातार न्याय की गुहार लगा रही है। उन्होंने लगभग धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वह खुद हथियार उठा लेंगी और गुनहगारों की सजा देंगी।

आरोपी गिरफ्तार, पर अपने किये पर ग्लानि नहीं

पुलिस ने इस मामले में प्रेम शंकर झा को घटनास्थल से ही गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल वह जेल में है। मगर, प्रेम शंकर झा के मन इस अपराध को लेकर कोई ग्लानि नहीं है। मीडिया रपटों की मानें, तो झा ने कहा कि बहुत दिनों से वह सोये नहीं थे। अब जेल में चैन से सो पायेंगे। अब लोगों के ताने नहीं सुनने पड़ेंगे।

सोशल मीडिया पर ये घटना छाई हुई है और एक पूरा तबका ऐसा है, जो प्रेम शंकर की भावनाओं के साथ खड़ा है और “अगर-मगर-लेकिन” लगाकर इस हत्या को जस्टिफाई कर रहा है। इसे जस्टिफाई करते हुए ये तबका जाति, समाज, बच्चों की जिम्मेवारियों का हवाला दे रहा है, जिसका लब्बोलुआब ये है कि ब्राह्मण लड़की को अपने परिवार की इच्छाओं के खिलाफ जाकर पिछड़ी जाति के युवक से विवाह नहीं करना चाहिए था।

तनु प्रिया ने खुद भी कहा है कि इस हत्या के पीछे मुख्य वजह उसके पिता का ब्राह्मणवादी होना है। “पता नहीं ब्राह्मण होने का कौन सा कीड़ा था उनके (पिता) मन में,” तन्नु प्रिया बिलखते हुए कहती हैं। वह आगे ये भी कहती है कि जब खून की जरूरत होती है, तो ये लोग ये नहीं पूछते हैं कि किस व्यक्ति का खून है, बल्कि जाति देखे बिना खून के लिए गिड़गिड़ाते हैं, और यहां जाति देखकर हत्या कर देते हैं।

अंतरजातीय विवाहों में ऑनर किलिंग की घटनाओं को देखें, तो वर्ष 2022 में देशभर में ऑनर किलिंग के कुल 18 मामले सामने आये थे, जिसमें बिहार भी शामिल था, हालांकि यहां उस साल ऑनर किलिंग का सिर्फ एक मामला दर्ज हुआ था।

पिछले साल नवादा जिले से भी ऑनर किलिंग की ऐसी एक खबर आई थी, जहां यादव जाति से आने वाले एक व्यक्ति मनोज कुमार ने अपनी बेटी की हत्या इसलिए कर दी थी क्योंकि लड़का अन्य जाति का था। हालांकि, ये खबर मीडिया में उतनी जगह नहीं पा सकी, जितनी राहुल की हत्या को मिली। इसकी बड़ी वजह ये है कि इस घटना के गुनहगार को समाज के एक वर्ग का पुरजोर समर्थन मिल रहा है।

लेखक व विचारक प्रेम कुमार मणि ने हत्या की इस घटना के समर्थन में किये जा रहे सोशल मीडिया पोस्टों पर चिंता जाहिर करते हुए अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा – पांच अगस्त को यह घटना हुई। आठ अगस्त को आरा में बिहार में नवजागरण विषय पर संगोष्ठी हो रही थी। मैं भी शामिल था। बड़ी बड़ी बातें हुईं। रात में लौटकर जब घर आया तब मिथिल न्यूज या ऐसे ही किसी फेसबुक वाल पर जनमत लेने का इश्तेहार देखा कि तनु के पिता प्रम शंकर झा के कृत्य को आप कैसे देखते हैं? नीचे कुल चार हजार तीन सौ कमेंट थे। नब्बे फीसदी से अधिक लोग ये बता रहे थे कि बाप ने ठीक किया है। एक की मासूम टिप्पणी थी – संविधान के अनुसार गलत, लेकिन मनुस्मृति के अनुसार सही।

वह तल्खी के साथ आगे लिखते हैं – दरअसल यह है बिहार का नवजागरण। बिहार मं सबसे कम प्रति व्यक्ति आय, पढ़ाई-लिखाई, रोजगार सब में फिसड्डी। कोई कारखाना भले न खुले, पुनौराधाम में मंदिर का शिलान्यास हो गया। अब क्या चाहिए। जात-पात-जहालत जिंदाबाद! यही है बिहार का नवजागरण!

उल्लेखनीय हो कि बिहार सरकार ने कुछ साल पहले अंतरजातीय विवाहों को प्रोत्साहित करने के लिए एक योजना लाई थी, जिसमें ऐसे जोड़ों को आर्थिक मदद देने का प्रावधान है, लेकिन इस तरह के घटनाएं बताती हैं, ये योजना फाइलों से जमीन पर नहीं उतर पाई है।

वहीं, इस घटना का समर्थन करते पोस्टों को देखकर लगता है कि समाज के तौर पर हमलोग अब भी मध्ययुग में ही जी रहे हैं और ये बिहार के लिए, बिहारी समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।

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Umesh Kumar Ray started journalism from Kolkata and later came to Patna via Delhi. He received a fellowship from National Foundation for India in 2019 to study the effects of climate change in the Sundarbans. He has bylines in Down To Earth, Newslaundry, The Wire, The Quint, Caravan, Newsclick, Outlook Magazine, Gaon Connection, Madhyamam, BOOMLive, India Spend, EPW etc.

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