Friday, August 19, 2022

कामयाबी के डेढ़ साल में ही सीमांचल में क्यों बिखर गई AIMIM?

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Tanzil Asif
Tanzil Asif is a multimedia journalist-cum-entrepreneur. He is the founder and the CEO of Main Media. He occasionally writes stories from Seemanchal for other publications as well. Hence, he has bylines in The Wire, The Quint, Outlook Magazine, Two Circles, the Milli Gazette etc. He is also a Josh Talks speaker, an Engineer and a part-time poet.

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन यानी AIMIM के बिहार में पांच विधायकों में से चार 29 जून, 2022 को राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए। इन चार विधायकों में जोकीहाट विधायक शाहनवाज़, बहादुरगंज विधायक अंजार नईमी, कोचाधामन विधायक इजहार असफी और बायसी विधायक सय्यद रुकनुद्दीन अहमद शामिल हैं।

AIMIM के पास अब बिहार में सिर्फ एक विधायक बचा है – अमौर विधायक सह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान। वहीं पार्टी विरोधी गतिविधि का आरोप लगा कर AIMIM ने बिहार के अपने पहले MLA, किशनगंज के पूर्व विधायक कमरुल होदा को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

लेकिन सीमांचल में AIMIM की एक बड़ी जीत के डेढ़ साल के अंदर ही पार्टी इस हालत में कैसे पहुँच गई? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए पिछले कुछ दिनों में हमने AIMIM के नेताओं और चार बागी विधायक से बात की।

एक तरफ जहाँ AIMIM के नेता कहते हैं, पार्टी को इतने बड़े बगावत का अंदाज़ा या इसकी खबर नहीं थी, वहीँ दूसरी तरफ चारो बागी विधायकों का दावा है, पार्टी के हैदराबाद मुख्यालय तक इसकी खबर थी, लेकिन इसे रोकने के लिए प्रयाप्त कोशिशें नहीं की गईं। यहाँ तक की इस दौरान पार्टी के नेताओं को बिहार दौरे के लिए भी कहा गया लेकिन उन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

पार्टी छोड़ने वाले चारो विधायकों में जोकीहाट के MLA शाहनवाज़ राजद और तेजस्वी यादव के सबसे ज़्यादा करीबियों में से रहे हैं। यही वजह है AIMIM नेता अख्तरुल ईमान भी पार्टी तोड़ने में शाहनवाज़ की मुख्य भूमिका मानते हैं, लेकिन शाहनवाज़ कहते हैं सभी चार विधायक सर्वसम्मति से राजद में शामिल हुए हैं।

2020 विधानसभा चुनाव के लिए टिकट बंटवारे के बाद से ही पार्टी पर टिकट बेचने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। कोचाधामन विधायक इज़हार असफी कहते हैं उनके अलावा बाकी तीनों से टिकट के लिए पैसे लिए गए थे। बहादुरगंज विधायक अंजार नईमी कहते हैं उनसे टिकट के लिए पैसे तो लिए ही गए लेकिन साथ ही पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को भी मोटा पैसा देने को कहा गया। कार्यकर्ताओं को पैसे देने की बात जोकीहाट विधायक शाहनवाज़ भी मानते हैं। AIMIM बिहार प्रभारी माजिद हुसैन ऐसे आरोपों से इंकार करते हैं, प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ये ज़रूर मानते हैं की सिक्योरिटी के लिए कुछ पैसे जमा करवाए गए थे।

साथ ही अख्तरुल ईमान ये आरोप लगाते हैं की इन विधायकों को राजद में शामिल होने के लिए पैसे दिए गए हैं, लेकिन बागी विधायक अंज़र नईमी इससे इंकार करते हैं।

वहीं, जानकार ये भी मानते हैं की पार्टी ने अपने भरोसेमंद पुराने कार्यकर्ताओं को टिकट न देकर आखिरी वक़्त पर पार्टी में शामिल हुए लोगों को टिकट दिया, इसलिए उनका पार्टी छोड़ना जीतने के बाद से ही तय था, बस वो सही समय का इंतज़ार कर रहे थे। चारों बागी विधायकों में से सिर्फ एक इज़हार असफी पहले से पार्टी से जुड़े थे, अंज़र नईमी चुनाव से कुछ महीने पहले ही पार्टी में शामिल हुए थे, तो वहीँ रुकनुद्दीन और शाहनवाज़ चुनाव के समय ही पार्टी में आये थे। इस सवाल पर माजिद कहते हैं, AIMIM एक पोलिटिकल पार्टी है, सर्वे में जो जीतने वाला दावेदार लगा, उसे पार्टी ने टिकट दिया और वो जीते भी।

2020 विधानसभा चुनाव में कामयाबी के बाद AIMIM ने संगठन पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया। रुकनुद्दीन कहते हैं, यहाँ तक की उनके ज़िले पूर्णिया में 2020 के बाद से जिला अध्यक्ष तक नहीं हैं। अंजार कहते हैं, बार-बार कहने के बावजूद पार्टी ने इस और ध्यान नहीं दिया। वहीं शाहनवाज़ मानते हैं धीरे धीरे सीमांचल और पार्टी मुख्यालय हैदराबाद के बीच फासला बढ़ता चला गया। माजिद कहते हैं, ये विधायक अपने नाकामयाबी छुपाने के लिए ऐसा कह रहे हैं, संगठन की ज़िम्मेदारी उन्हें ही दी गई थी।

मज़बूत संगठन न होने के साथ-साथ पार्टी का पक्ष और विपक्ष के विचारधारा की बायनरी में फिट न होना भी कुछ विधायकों को जीतने के बाद से खटकता रहा। वो कहते हैं हम कब तक पेंडुलम की तरह झूलते रहते।

इन विधायकों के पार्टी में शामिल होने से पहले भाजपा बिहार की सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन इनके पार्टी में शामिल होते ही राजद 80 विधायकों के साथ प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बन गई। असफी और नईमी कहते हैं, प्रदेश में हो रही राजनितिक हलचल से उन्हें लग रहा था की सरकार में उलटफेर की संभावनाएं हो सकती है, ऐसी सूरत में सबसे बड़ी पार्टी बनने में राजद की मदद करना उन्होने सही समझा।

इन चार विधायकों में से दो राजद को ही हरा कर विधानसभा पहुंचे थे, एक ने कांग्रेस को हराया था, जबकि चौथे के विरुद्ध राजद जिला अध्यक्ष का परिवार चुनाव लड़ा था। इसलिए आने वाले दिनों में राजद की स्थानीय राजनीति में उथल पुथल की संभावनाएं हैं। जोकीहाट विधायक शाहनवाज़ 2020 से पहले राजद के ही विधायक थे। 2020 विधानसभा में पार्टी ने उनका टिकट काट कर उनके बड़े भाई सरफ़राज़ आलम को टिकट दे दिया था, जिससे नाराज़ शाहनवाज़ ने AIMIM टिकट पर चुनाव लड़ लिया और राजद टिकट से चुनाव लड़ रहे अपने भाई को मात दे दी। फिलहाल अररिया के पूर्व सांसद सरफ़राज़ आलम भी राजद में ही हैं।

बायसी विधायक सय्यद रुकनुद्दीन अहमद ने वरिष्ठ राजद नेता हाजी अब्दुस सुब्हान को चुनाव में हराया था। हाजी अब्दुस सुब्हान हाल में ही संपन्न विधानसभा परिषद चुनाव में भी पूर्णिया-अररिया-किशनगंज क्षेत्र से राजद उम्मीदवार भी थे।

कोचाधामन विधानसभा पूर्व में राजद का गढ़ रहा है। यहाँ से पहले राजद के वरिष्ठ नेता मरहूम तस्लीमुद्दीन, फिर अख्तरुल ईमान पार्टी के विधायक रहे हैं। 2020 विधानसभा चुनाव में असफी के खिलाफ किशनगंज राजद जिला अध्यक्ष सरवर आलम के पिता शाहिद आलम ने चुनाव लड़ा था।

उधर अंजार नईमी ने कांग्रेस विधायक तौसीफ आलम को चुनाव में मात दी थी। तौसीफ भी हाल में ही संपन्न विधानसभा परिषद चुनाव में भी पूर्णिया-अररिया-किशनगंज क्षेत्र से अपनी पार्टी के उम्मीदवार थे। साथ ही तौसीफ कोचाधामन विधायक इज़हार अस्फी के दामाद भी हैं।

आने वाले दिनों में सीमांचल में AIMIM के लिए जहाँ एक मज़बूत संगठन बनाना एक चैलेंज है, तो वहीं राजद को अपने पुराने और नए नेताओं को एक साथ लाने के लिए मेहनत करनी पड़ेगी।


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