Thursday, October 6, 2022

कोसी क्षेत्र में क्यों नहीं लग पा रहा अपराध पर अंकुश

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Rahul Kr Gaurav
एल एन एम आई पटना और माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पढ़ा हुआ हूं। फ्रीलांसर के तौर पर बिहार से ग्राउंड स्टोरी करता हूं।

सुपौल: 24 अगस्त 2019 की शाम बिहरा थाना क्षेत्र के पुरीख स्थित सहरसा-सुपौल मुख्य मार्ग पर वाटर प्लांट के सामने नरसिंह झा को बाइक सवार बदमाशों ने लूट के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी थी। नरसिंह झा सहरसा से बीना बभनगामा जा रहे थे। इस हत्याकांड के बाद लोगों में गुस्सा इतना बढ़ गया था कि वे दौड़ा-दौड़ा कर पुलिस को मार रहे थे। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।

4 महीने बाद नवंबर 2019 को उसी गांव यानी बभनगामा निवासी मृत्युंजय कुमार की हत्या सहरसा में कर दी गई। वह ऐसा वक्त था जब आए दिन कोसी क्षेत्र और खासकर सहरसा में हत्या की खबरें आम हो गई थीं। जनता तो छोड़िए पुलिस भी परेशान थी। 2020 के अप्रैल महीने में ड्यूटी कर पुलिस लाइन लौट रहे सिपाही को गोली मार दी गई थी।

कुशासन के इस बढ़ते दौर को खत्म करने के लिए बिहार सरकार के द्वारा जनवरी 2021 में दबंग आईपीएस अफसर लिपि सिंह को एसपी की जिम्मेदारी दी गई थीं। फिर जनवरी 2022 में बिहार कैडर के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे को कोसी क्षेत्र का डीआईजी बनाया गया। लिपि सिंह के डेढ़ साल और शिवदीप लांडे के 6 महीने के कार्यकाल में कोसी क्षेत्र में कितना सुशासन आया हैं, इस रिपोर्ट में हम इसकी पड़ताल करते हैं।

saharsa sp lipi singh

एंट्री धूमधाम, काम फिसड्डी

शिवदीप लांडे के पदभार संभालते ही उनकी छवि के मुताबिक उनका पहला निर्णय कोसी रेंज अंतर्गत सुपौल, सहरसा और मधेपुरा के 30 कुख्यात अपराधियों को चिन्हित करना था। ऐसा किया भी गया, तो लोगों को सुशासन की एक नई उम्मीद नजर आई थी। आज सुपौल, सहरसा और मधेपुरा में अपराध की क्या स्थिति है, इसको लेकर हमने अमन कुमार से बातचीत की।

अमन कुमार सूचना मंत्रालय में कार्यरत हैं औऱ बिहार दफ्तर में बैठते हैं। वह ‘क्राइम न्यूज़ ट्रेंडिंग’ बनाते हैं। मतलब वह अखबारों और वेबसाइट से ऐसी खबरों को जमा करते हैं, जिनमें अभी तक पुलिस के द्वारा कोई गिरफ्तारी नहीं हुई हैं। इस खबरों को वह गृह मंत्रालय के डायरेक्टर के पास भेजते हैं।

अमन बताते हैं, “अक्सर बड़े अपराधों में पुलिस किसी न किसी व्यक्ति को गिरफ्तार जरूर कर लेती है, ताकि मामला मीडिया में हाईलाइट नहीं हो। लेकिन छोटी घटनाओं में गिरफ्तारी का मामला कम नजर देखने को मिलता हैं। इनमें जमुई, पटना, सहरसा, अररिया, बेगूसराय,मधेपुरा और गोपालगंज की खबरें ज्यादा रहती हैं।” अमन के मुताबिक, कोसी के दो जिलों में अपराध की घटनाओं की खबरें ज्यादा देखने को मिलती हैं।

बेगूसराय के बाद सुपौल

अभी बिहार में बेगूसराय में हुए हत्याकांड की आग शांत भी नहीं हुई थी कि सुपौल के बीरपुर में एक साथ 4 लड़कों की संदिग्धावस्था में मौत हो गई है। इसके साथ ही कोसी का इलाका राजनीति का नया अड्डा भी बन रहा है।

bjp leader vijay sinha with crowd

इससे पहले भी सुपौल में एक परिवार में सामूहिक हत्याकांड की घटना हो चुकी है।

सुपौल के छात्र नेता और समाजसेवी मोहित झा बताते हैं, “बीते 11 सितंबर की रात अनंत पूजा के मौके पर सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड क्षेत्र के औरलाहा पंचायत के वार्ड 5 में आर्केस्ट्रा का प्रोग्राम हुआ था, जहां स्टेज प्रोग्राम के दौरान धाय-धाय फायरिंग हुई थी, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हुई थी।

शुरुआत में तो त्रिवेणीगंज पुलिस घटनास्थल की सीमा तय नहीं कर पा रही थी, जिस वजह से पुलिस कोई कार्रवाई ही नहीं कर रही थी। पटना के ट्रैफिक एसपी डी अमरकेश को जब सुपौल का एसपी और शिवदीप लांडे को डीआईजी बनाया गया तो हम लोगों को बहुत उम्मीद थी। लेकिन वह उम्मीद पर खरा नहीं उतर पाए।”

स्थानीय पत्रकारों का क्या कहना है

सुपौल के वरिष्ठ पत्रकार रंजीत ठाकुर बताते हैं, “शिवदीप लांडे की जो छवि लोगों के बीच थी, लोगों को लग रहा था कि अपराध पर नकेल कसी जाएगी, लेकिन उस तरह से शिवदीप लांडे का कोई खास जलवा कोसी रेंज में नहीं दिखा। शिवदीप लांडे के आने के बाद अपराधियों की गिरफ्तारी और कांडों के उद्भेदन में वृद्धि जरूर आई है। लेकिन क्राइम पहले की तुलना में कम नहीं हो रहा है। अपराधियों में पुलिस का डर नहीं दिख रहा है। अररिया और पटना में शिवदीप लांडे की जो छवि थी, उससे अपराधी खौफ खाते थे, लेकिन वह छवि यहां नहीं दिख रही है।”

वहीं, सहरसा के एक अखबार के रिपोर्टर श्रुतिकांत कहते हैं, “लिपि सिंह और शिवदीप लांडे की पदस्थापना के बाद बड़े अपराधों में कमी आई है। बड़े अपराधी या तो जेल के अंदर हैं या अपराध छोड़ कर गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं। लेकिन, छोटी घटनाओं पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है। पहली बार पैसा छिनतई में शामिल अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए सहरसा पुलिस ने कटिहार के कोढ़ा में धमक दी थी, जिससे बहुत दिनो तक छिनतई की घटना पर रोक लगी थी। हालांकि कुछ दिनों से पुनः पैसे छिनतई की घटना घटित हो रही है। बड़े शराब माफिया जेल के अंदर हैं, भारी मात्रा में शराब भी पकड़ी गई है। हालांकि पहली बार एसपी लिपि सिंह के निर्देश पर जिले में स्मैक जैसे पदार्थ भी बरामद हुए हैं।”

वहीं, मधेपुरा के जाने-माने पत्रकार कुमार आशीष के मुताबिक शिवदीप लांडे के आने के बाद क्षेत्र के क्राइम की स्थिति में कोई भी बदलाव नहीं हुआ है। कोसी क्षेत्र के जाने-माने वेब पोर्टल पत्रकार विमलेंद्र सिंह ने कहा,”शुरुआत में जब शिवदीप लांडे आने वाले थे, तो अखबारों की जो हेडलाइन बनी थी, उसका 25% भी काम हो जाता, तो अपराध का ग्राफ काफी नीचे जा चुका होता।”

आंकड़े की कहानी

पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, कोसी रेंज में साल 2020 में 181, साल 2021 में 164 और जून 2022 तक 85 हत्याएं हो चुकी हैं। वहीं, साल 2020 में 15, साल 2021 में 16 और साल 2022 के जून तक 7 डकैती हुई है।

इसी तरह साल 2020 में लूट की 151 घटनाएं, 2021 में 273 और जून 2022 तक 88 घटनाएं हुई है। चोरी की घटनाओं को देखें, तो साल 2020 में 1272, साल 2021 में 1441 और 2022 के जून तक 912 घटनाएं हुई हैं।

पुलिस की उपलब्धि का आंकड़ा देखें, तो साल 2020 में 174422, साल 2021 में 195540 और साल 2022 के जून तक 131993 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।

kosi range ig shivdip lande

अपराध रोकना मुश्किल

पेशे से वकील और समाजसेवी कुणाल कश्यप बताते हैं, “कोसी के तीनों जिले नेपाल की सीमा पर स्थित हैं, इसलिए ये इलाका शराब व्यापारियों के लिए सबसे मुफीद जगह है। इसके साथ ही कोसी क्षेत्र का अधिकांश इलाका बाढ़ग्रस्त है, जिसमें दियारा इलाके का क्षेत्रफल काफी बड़ा है। बाढ़ग्रस्त दियारा इलाके को अपराधियों का गढ़ माना जाता है। कोसी तटबंध के भीतर के गांव में तो बिहार के दूसरे जिले से आकर भी अपराधी शरण लिए रहते हैं। आने-जाने का रास्ता न होने के चलते पुलिस की सक्रियता भी कम रहती है और यही कारण है कि अपराधी इस जगह पर खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।”

“अपराधी अपराध करने के बाद तुरंत एक जिले से दूसरे जिले में प्रवेश कर जाता है। कोसी क्षेत्र में होनेवाली अधिकांश आपराधिक घटनाएं तटबंध के भीतर के गांव में ही होती हैं, इसलिए यहां अपराध रोकना किसी भी अधिकारी के लिए बड़ी चुनौती होती है,” समाजसेवी कुणाल कश्यप कहते हैं।


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