कोसी क्षेत्र की तरह बिहार का सीमांचल हर साल बरसात में नदी कटाव की मार झेलता है। किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड स्थित धोबीडांगा गांव नदी कटाव से बुरी तरह प्रभावित है। बीते कुछ वर्षों में यहां सैकड़ों परिवार अपने घर-ज़मीन गंवा चुके हैं।
पहले गांव, सड़क के पश्चिमी हिस्से में था, लेकिन कटाव के कारण ग्रामीणों को पूरब की ओर आना पड़ा। हालत इतनी खराब है कि अब सड़क भी कटाव के कगार पर है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई किसानों की ज़मीन नदी में समा चुकी है। जो थोड़ी-बहुत खेती की ज़मीन बची है उससे गुज़ारा करना बेहद मुश्किल हो गया है।
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डोंक नदी के किनारे बसी बुधरा पंचायत के वार्ड नंबर 2 स्थित धोबीडांगा गांव में आदिवासी और शेरशाहबादी मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। स्थानीय लोगों को नदी के विकराल रूप का आर्थिक नुक्सान भी झेलना पड़ता है। बरसात में खेत-खलिहान डूबने से मज़दूरी करने वाले लोग काम पर नहीं जा पाते। लोगों को डर है कि अगर सरकार अभी भी इस समस्या पर ध्यान नहीं देती है तो इस गांव का अस्तित्व पूरी तरह से खत्म हो जाएगा।
ग्रामीण वर्षों से नदी किनारे बोल्डर पिचिंग की मांग कर रहे हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सरकारी उदासीनता से नाराज़ ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द काम शुरू नहीं हुआ तो वे आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे।
सितंबर 2022 में ‘मैं मीडिया’ ने इस गांव की समस्या पर खबर चलाई थी जिसपर स्थानीय विधायक इज़हारुल हुसैन ने जल्द समाधान का भरोसा दिलाया था। हालांकि, लगभग तीन साल बाद, अब तक हालात जस के तस बने हुए हैं।
किशनगंज विधायक से हमने एक बार फिर इस समस्या पर बात की तो उन्होंने बताया कि डोंक नदी के कटाव से राहत दिलाने के लिए सरकारी प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि इसी बरसात में काम शुरू हो जाएगा।
इज़हारुल हुसैन ने आगे बताया कि अगर कटाव 20 मीटर के भीतर होता है तो सरकार 24 घंटे के भीतर राहत कार्य शुरू कर देती है लेकिन नदी से कटाव की दूरी अधिक होने पर इस प्रक्रिया में समय लग जाता है।
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