बिहार के किशनगंज विधानसभा से कांग्रेस की ओर से इजहारूल हुसैन को उम्मीदवार बनाया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है कि आज़ाद परिवार यानि स्थानीय कांग्रेस सांसद डॉ जावेद आज़ाद के परिवार से बाहर किसी कार्यकर्ता को कांग्रेस ने पोठिया इलाके से अपना उम्मीदवार बनाया है। 2010 से पहले पोठिया क्षेत्र ठाकुरगंज विधानसभा का हिस्सा था, 2010 के बाद इस क्षेत्र को किशनगंज विधानसभा का हिस्सा बना लिया गया। मोहम्मद हुसैन आज़ाद से लेकर डॉ जावेद आज़ाद और फिर डॉ जावेद की मां सईदा बानू के बाद कांग्रेस ने इस इलाके से पहली बार किसी कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया है।

 

2019 किशनगंज उपचुनाव

दरअसल 2019 में किशनगंज के तत्कालीन विधायक डॉ जावेद आज़ाद को कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अपना उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने AIMIM के अख़्तरूल ईमान को हराकर चुनाव में जीत दर्ज की, फिर किशनगंज विधानसभा में उपचुनाव हुआ। उम्मीदवारों की फेहरिस्त में कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं की एक लंबी सूची थी, लेकिन कांग्रेस ने किसी कार्यकर्ता के बजाय मोहम्मद हुसैन आज़ाद की पत्नी और डॉ जावेद आज़ाद की मां सईदा बानू को मैदान में उतारा, कांग्रेस के इस फैसले से किशनगंज विधानसभा की पूरी पार्टी बिखर गई।

पुराने कार्यकर्ता बगावत पर उतर आए, फलतः कांग्रेस उम्मीदवार अपनी ज़मानत तक नहीं बचा सकीं और AIMIM के कमरुल होदा रिकार्ड मतों से विजयी हुए। दूसरे नंबर पर बीजेपी की स्वीटी सिंह रही। कांग्रेस की करारी हार के बाद बागी कार्यकताओं को पार्टी ने 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। जब बात आई 2020 बिहार विधानसभा चुनाव की तो कांग्रेस ने पार्टी का ध्वस्त किला फतेह करने की जिम्मेदारी एक पुराने कार्यकर्ता इजहारूल हुसैन को दी है।

 

कौन हैं इजहारूल हुसैन?

किशनगंज विधानसभा से कांग्रेस उम्मीदवार इजहारूल हुसैन पोठिया प्रखंड अंतर्गत दामलबाड़ी पंचायत के देहलबाड़ी गाँव के वार्ड संख्या 6 के निवासी है। मौजूदा समय में इजहारूल हुसैन किशनगंज सांसद के किशनगंज विधानसभा प्रतिनिधि हैं। इजहारूल हुसैन ने जियोलॉजी में मास्टर्स की है। पंचायत स्तरीय राजनीति में इनका परिवार दशकों से सक्रिय हैं।

 

इजहारूल हुसैन के पिता मोहम्मद मोइनुद्दीन 1968 से 1995 तक मुखिया रहे। खुद कृषि उत्पादन बाजार समिति ठाकुरगंज के सदस्य फिर, 2004 में उपाध्याय नियुक्त हुए। साल 2006 से 2011 तक उनकी मां मुखिया रहीं।