वो ज़हर देता तो सब की निगह में आ जाता
सो ये किया कि मुझे वक़्त पे दवाएँ न दीं

शायर अख़्तर नज़्मी का ये शेर जितना खूबसूरत है, उतना ही घिनौना सच ये बयान करता है। जाति और धर्म के नाम पर सियासत करने वाले नेताओं की हकीकत कितनी घिनौनी है, उसे समझने के लिए ये खबर पढ़िए।

24 मई 2020 को बिहार के गोपालगंज में एक राजद कार्यकर्ता जेपी यादव के घर गोलीकांड होता है। कुछ बाइक सवार बदमाशों की अंधाधुंध फायरिंग में जेपी यादव के माता-पिता की मौत हो जाती है और उनके भाई अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ देते हैं। 24 मई 2020 को रविवार का दिन था। दिन इसलिए बता रहा हूँ की आपको इस घटना पर हुए राजनीति की रफ़्तार समझ आये।

हत्या रविवार हुई और रविवार ही को राजद के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने इसको लेकर एक वीडियो शेयर किया गया, जिसे उसी दिन तेजस्वी ने अपने निजी ट्विटर अकाउंट से retweet भी कर दिया। सोमवार की सुबह तेजश्वी ने ट्वीट कर इस घटना पर नीतीश सरकार को घेरा। और उसके बाद सिलसिला चल पड़ा, रोज़ाना तेजस्वी यादव अपने निजी ट्विटर अकाउंट से गोपालगंज ट्रिपल मर्डर पर ट्वीट या रीट्वीट करते रहे, सरकार से तीखे सवाल पूछते रहे। मंगलवार को घायल जेपी यादव से मिलने PMCH भी गए। बुधवार को तेजस्वी यादव ने राज्यपाल फागू चौहान से मुलाकात की और सरकार को गुरूवार शाम तक का अल्टीमेटम दिया।

शुक्रवार सुबह से पटना की सड़कों पर जोरदार हंगामा शुरू हो गया। तेजस्वी यादव विधायकों संग गोपालगंज जाना चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने इसकी इजाज़त नहीं दी। तेजस्वी यादव के काफिले में उनके भाई तेज प्रताप और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी भी मौजूद थी।

अब एक दूसरा वाक्या पढ़िए, 13 जून 2019 को गोपालगंज के ही भोरे में एक कारोबारी रामाश्रय सिंह की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गयी थी। इस हत्याकांड में नौ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गयी थी, जिसमें पुलिस ने पांच लोगों को जेल भेज दिया था। फरार अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए पत्नी सुनीता देवी पांच दिनों से भोरे में अनशन पर बैठी थीं। आखिरकार तेजस्वी यादव गोपालगंज के अनशन स्थल पर पहुंचे। रामाश्रय सिंह की विधवा पत्नी सुनीता ने तेजस्वी की आरती उतारी, राखी बांधी और उनके हाथ से जूस पीकर अनशन भी खत्म किया।

गोपालगंज के इन दो मामलों को देख कर लगता है, देश को तो पता नहीं, लेकिन बिहार के गोपालगंज में विपक्ष काफी सक्रीय है। लेकिन ये सक्रियता किसके लिए है?

गोपालगंज और सिवान ज़िले की सीमा पर एक गाँव है नासिर छपरा। सिवान के बर्हरिया प्रखंड के इसी गाँव का रहने वाला राजद का दिल्ली प्रदेश युवा अध्यक्ष मीरान हैदर चार महीनों से जेल में बंद है। जामिया मिलिया इस्लामिया में PHD के छात्र मीरान हैदर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 1 अप्रैल 2020 को गिरफ्तार किया था। आज 4 महीने से ज़्यादा हो गए तेजश्वी यादव ने एक शब्द तक नहीं बोला है। बोलना तो दूर, लॉकडाउन के बीच जिस मीरान के काम की तेजस्वी ट्विटर पर तारीफ कर रहे थे, 1 अप्रैल को उसकी गिरफ्तारी के बाद से आज तक नेता प्रतिपक्ष ने एक ट्वीट तक नहीं किया। ट्वीट तो दूर, तेजस्वी ने मीरान हैदर के लिए अपने पार्टी ने नेताओं के ट्वीट को रीट्वीट तक नहीं किया। पटना से गोपालगंज तक अपने कार्यकर्ता जेपी यादव के लिए लड़ने वाले तेजस्वी मीरान हैदर को क्या भूल गए हैं?

मीरान हैदर के मामले में भले ही तेजस्वी गूंगे हो गए हैं, लेकिन उनके विरोधी बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने 3 अप्रैल को ही मीरान हैदर का ज़िक्र अपने ट्विटर अकाउंट से कर दिया है। बात-बात पर सुशील मोदी को जवाब देने वाले तेजस्वी का हाथ इस ट्वीट का जवाब देते क्यों कांप गया?

क्या ऐसा इसलिए है की मीरान हैदर जेपी यादव नहीं है? हिंदुत्व के समन्दर में गोते लगाती राजनीती के बीच क्या अपने ही मुस्लिम नेता के लिए बोलना तेजस्वी के लिए इतना मुश्किल है? आसान अलफ़ाज़ में कहें तो, क्या मीरान हैदर के मुसलमान होने के वजह से उसके अपने नेता ने उससे बेवफाई की है?

इस मामले पर जब राजद सांसद मनोज झा से सवाल किया गया तो उन्होंने मीरान हैदर की गिरफ्तारी के विरोध में पार्टी के किये काम।गिनाए और मीरान के परिवार से बात करने की सलाह दी।

मनोज झा की सलाह पर तो हमने पहले ही अमल कर लिया था। मीरान हैदर के जीजा व चचेरे भाई मतलूब से हमने संपर्क किया। मतलूब दिल्ली में मीरान हैदर के लोकल guardian भी हैं।

उन्होंने हमें बताया की शुरू के दिनों में राजद सांसद मनोज झा और युवा राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष कारी शोएब ने मीरान हैदर की ज़रूर मदद की, लेकिन तेजस्वी ने इसको लेकर क्या कहा या पार्टी से क्या-क्या करने को क्या? कितने ट्वीट किये, कितनी चिट्ठियां लिखी, कितनी बार सड़क पर उतरे, कितनी बार मीरान के घर पर गए, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

जिस गोपालगंज का हथुआ, जहाँ जेपी यादव के लिए तेजस्वी विधायकों का जत्था लेकर जाना चाहते थे, वहां से मीरान हैदर का घर महज़ 15 किलोमीटर दूर है, भोरे जहाँ जाकर तेजस्वी ने अनशन तुड़वाया वहाँ से मीरान हैदर का घर सिर्फ 25 किलोमीटर दूर है। फिर भी तेजस्वी को चार महीने में मीरान के घर जाने की फुर्सत नहीं मिली।

और तो और तेज प्रताप यादव ने बीते 4 अगस्त को मीरान हैदर के घर से महज़ चार किलोमीटर दूर कांग्रेस नेता शमीम अख्तर के घर डिनर किया, लेकिन मीरान के परिवार की खबर लेने तक नहीं गए?

तेज प्रताप यादव के मीरान के घर जाने से या तेजस्वी यादव के एक ट्वीट से शायद मीरान हैदर का कुछ भला न होता। लेकिन अपने मुस्लिम नेता की गिरफ्तारी पर तेजस्वी यादव की लम्बी खामोशी, हर एक मुस्लिम नौजवान के मन में एक डर ज़रूर पैदा करती है कि आखिर अपना कौन है?