बिहार के किशनगंज के रहने वाले मुफ़्ती मोहम्मद तौसीफ रज़ा की लाश बीते सोमवार 27 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के बरेली में रेलवे ट्रैक के किनारे मिली। मौत से करीब 15 दिन पहले ही तौसीफ ने सिवान की एक मस्जिद में इमाम का काम शुरू किया था। वो एक उर्स में शामिल होने के बाद बरेली से सिवान लौट रहे थे। 26 अप्रैल की शाम को ट्रेन में बैठने से पहले उन्होंने अपनी पत्नी तबस्सुम खातून को फ़ोन कर इसकी जानकारी दी।
बाद में जब तौसीफ की लाश के साथ उनका सामान घर आया, तो उस आखिरी कॉल की करीब 29 सेकेंड लंबी रिकॉर्डिंग परिवार को तौसीफ के मोबाइल फ़ोन में मिली।
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तबस्सुम बताती हैं उस दौरान उन्होंने वीडियो कॉल पर भी अपने पति से बात की थी और वीडियो में कुछ लोगों को उन्हें मारते पीटते देखा भी था।
रात के लंबे इंतज़ार के बाद आखिरकार सुबह करीब 9 बजे तौसीफ के फ़ोन से तबस्सुम की बात हुई, लेकिन कॉल की दूसरी तरफ उनके पति नहीं, बल्कि बरेली की पुलिस थी।
30 अप्रैल की शाम करीब 7 बजे बरेली पुलिस ने X पर पोस्ट डाल कर कहा कि गोरखपुर से ट्रेन में लौट रहे मौलाना की ट्रेन में झगड़े के बाद बरेली के पास लाश मिली। मौके की परिस्थितियों, शव के निरीक्षण एवं प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह तथ्य प्रकाश में आया कि अत्यधिक गर्मी के कारण मृतक ट्रेन के गेट पर बैठने के दौरान झपकी आने से असंतुलित होकर नीचे गिर गया, जिससे सिर, पैर, कमर व चेहरे पर गंभीर चोटें आने के कारण उसकी मृत्यु हुई। घटनास्थल अथवा अन्य किसी स्रोत से मृतक के साथ किसी प्रकार के झगड़े, मारपीट या धक्का देकर गिराए जाने का कोई साक्ष्य प्राप्त नहीं हुआ है। पुलिस ने इस घटना में किसी भी प्रकार की आपराधिक साजिश से भी इनकार कर दिया।
लेकिन तीन घंटे बाद ही बरेली एसपी सिटी मानुष पारीक ने वीडियो डाल कर सफाई दी कि ट्रेन में मारपीट को लेकर परिजनों से तहरीर प्राप्त होने पर आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।
तौसीफ के पिता अबुल हुसैन और उनकी पत्नी तबस्सुम खातून का आरोप है कि उन्हें मार कर ट्रेन से नीचे फेंका गया है। खबर प्रकाशित होने तक तबस्सुम अपने परिजनों के साथ लिखित आवेदन देने के लिए ट्रेन से बरेली के लिए रवाना हो चुकी थीं।
परिजनों के मुताबिक़, तौसीफ की मुस्लिम पहचान की वजह से चोरी का झूठा आरोप लगाकर उनकी बुरी तरह से पिटाई की गई।
तबस्सुम करीब 24 साल की हैं, तौसीफ की उम्र करीब 29 साल थी। 19 मई 2024 को उनकी शादी हुई थी। शादी के बाद पहले उन्होंने कर्नाटक और पंजाब में इमाम का काम किया, फिर अप्रैल में सिवान गए। बेवा हो चुकी तबस्सुम इंसाफ चाहती हैं ताकि आगे किसी की दाढ़ी, टोपी देख कर उसके साथ ऐसा ज़ुल्म न हो, वहीं उनके ससुर, बहू की आगे की ज़िंदगी के लिए उचित मुआवजा और नौकरी की मांग कर रहे हैं।
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