Thursday, October 6, 2022

स्कूल में घुसकर दलित प्रधानाध्यापिका से मारपीट, 20 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं

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5 सितंबर को जब पूरा देश शिक्षक दिवस मना रहा था, उसी समय एक शिक्षिका पुलिस अधीक्षक के कार्यालय के बाहर घंटों इंसाफ मांगने के लिए खड़ी थी, मगर उसे इंसाफ मिल नहीं पाया।

आरोप है कि शिक्षिका को वार्ड सदस्य द्वारा बुरी तरह पीटा गया और जातिसूचक गालियां दी गईं। घटना को हुए 20 दिन से ज्यादा वक्त बीत गया है। शिक्षिका द्वारा थाने में शिकायत भी दर्ज कराई गई है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई।

मामला अररिया जिले के रानीगंज प्रखंड अंतर्गत बौसी थाना क्षेत्र के बसेड़ी पंचायत वार्ड संख्या 4 का है। आरोप है कि 18 अगस्त की दोपहर वार्ड संख्या 4 के वार्ड सदस्य कमल प्रिंस चौधरी 5 लोगों के साथ शराब पी कर उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में घुसे और मिड डे मील का भोजन कर रहे बच्चों की वीडियो बनानी शुरू कर दी। इसके बाद उन्होंने प्रधानाध्यापिका मीना देवी से कथित तौर पर रंगदारी मांगी।

बताया जा रहा है कि इसका विरोध करने पर वार्ड सदस्य और अन्य 5 लोगों द्वारा मीना देवी और उनके सहायक शिक्षक मोहम्मद रिजवान आलम के साथ मारपीट की गई।

प्रधानाध्यापिका वीना देवी ने आगे बताया कि वार्ड सदस्य द्वारा उनको धमकी भी दी गई कि अगर इस घटना के बारे में वह किसी को बताती हैं तो उनके बच्चों को जान से मार दिया जाएगा।

आगे वीना देवी ने बताया कि वार्ड सदस्य उनसे काफी समय से रंगदारी मांग रहा था। रंगदारी की राशि नहीं देने के कारण ही स्कूल में चेकिंग के बहाने घुसकर उनके साथ मारपीट की गई।

बता दें कि इस विद्यालय को 2022 में स्वच्छता को लेकर नेशनल अवार्ड से सम्मानित किया गया है। वहीं, स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका को अररिया जिला पदाधिकारी प्रशांत कुमार ने कोरोना काल में बेहतर कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।

लेकिन आरोप है कि अब वार्ड सदस्य द्वारा दी जा रही धमकियों के कारण पिछले 20 दिनों से प्रधानाध्यापिका विद्यालय नहीं जा पा रही हैं। इस कारण विद्यालय के महत्वपूर्ण कामकाज और प्रबंधन में रुकावटें पैदा हो रही हैं।

शिक्षक रिजवान आलम ने इस बात की भी पुष्टि की है कि रंगदारी के रूप में वार्ड सदस्य द्वारा लगातार उनके विद्यालय के अन्य शिक्षकों से पैसे मांगे जा रहे थे।

इस पूरे मामले को लेकर प्रधानाध्यापिका वीना देवी ने अररिया एससी/एसटी थाने में वार्ड सदस्य सहित 5 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी। जब मामले को 18 दिन बीत गए और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो शिक्षिका 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर अपने लिए इंसाफ मांगने पुलिस अधीक्षक के कार्यालय पहुंची। लेकिन घंटों खड़े रहने के बाद भी पुलिस अधीक्षक से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। कार्यालय में मौजूद कर्मी ने उनका आवेदन ले लिया और शुक्रवार को जनता दरबार में आने के लिए कह दिया।

मामले को लेकर अररिया एसडीपीओ पुष्कर कुमार ने घटनास्थल पर पहुंचकर घटना के बारे में पूछताछ की और मामला सत्य पाया जाने पर आरोपियों की गिरफ्तारी का निर्देश श दिया है। साथ ही एसडीपीओ ने कहा कि स्कूल की जांच पड़ताल करना वार्ड सदस्य के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

लेकिन, प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की नियमावली के अनुसार, प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय और मध्य विद्यालय जिस भी वार्ड में स्थित होगा, उस वार्ड का वॉर्ड सदस्य विद्यालय शिक्षा समिति का पदेन अध्यक्ष होगा। विद्यालय शिक्षा समिति यानी VSS की कई शक्तियाँ एवं कृत्य हैं, जिनमें से मुख्य रूप से विद्यालय के संचालन का अनुश्रवण करना, नियमानुसार मध्याह भोजन की व्यवस्था हेतु आवश्यक निर्णय लेना और उसकी देखरेख करना आदि शामिल हैं।

इस मामले में जब वार्ड सदस्य कमल प्रिंस चौधरी से उनका पक्ष पूछा गया, तो उन्होंने सारे आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि उनको राजनीति दांवपेच खेल कर फंसाने की कोशिश की जा रही है।


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