31 मई की सुबह लगभग 10.30 बजे मुजफ्फरपुर स्थित श्रीकृष्णा मेडिकल कॉलेज व हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) अस्पताल से 10 वर्षीया रेप पीड़िता के परिजन उसे एम्बुलेंस से पटना स्थित बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज व हॉस्टिपल (पीएमसीएच) लिए रवाना हुए थे।
उस वक्त उनकी चिंता ये थी कि वे बच्ची को 83 किलोमीटर का सफर तय कर सुरक्षित अस्पताल तक पहुंच पायेंगे कि नहीं, लेकिन करीब ढाई घंटे का सफर तय कर जब वे पीएमसीएच पहुंचे, तो वहां बच्ची के लिए बेड पाने में उन्हं 83 किलोमीटर के सफर से ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी और परिजनों का आरोप है कि बेड मिलने में अस्पताल की तरफ से देरी किये जाने के कारण उनकी बच्ची की जान चली गई।
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‘मैं मीडिया’ के साथ बातचीत में मृत रेप पीड़िता के परिजनों ने विस्तार से बताया कि पीएमसीएच में दोपहर 1 बजे से अगले चार घंटे क्या क्या हुआ।
घटना के मुताबिक, मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी थाना क्षेत्र की रहने वाली दलित समुदाय की 10 वर्षीया बच्ची हफ्ते भर पहले लहुलूहान हालत में सड़क किनारे मिली थी।
मृतका के पिता की मौत तभी हो गई, जब वह बहुत छोटी थी। बच्ची की मां ही मजदूरी कर बेटी और अपने दो बेटों का पेट पाल रही थी। बच्ची फिलहाल छठवीं में पढ़ती थी और पढ़ने में तेज थी।
क्या थी घटना
स्थानीय लोगों व परिजनों का कहना है कि एक मछुआरा रोहित साहनी, जो अतिपिछड़ा जाति (ईबीसी) समूह में आता है, नियमित तौर पर गांव में मछली बेचने आया करता था। उसी ने 26 मई की सुबह बच्ची को अकेला पाकर फुसलाया-बहलाया और साइकिल पर अपने साथ ये कहकर ले गया कि उसे उसकी मौसी के घर छोड़ आयेगा।
बच्ची के परिजनों को इसकी जानकारी नहीं थी, सो काफी समय तक बच्ची को घर में न पाकर उन्होंने उसे ढूंढना शुरू किया, तो कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि उसे आखिरी बार रोहित साहनी के साथ देखा गया था। परिजन रोहित साहनी के घर पहुंचे और बच्ची के बारे में पूछताछ की, लेकिन वह घटना से अनजान बनता रहा। “तब हमलोगों ने 112 पर डायल कर पुलिस को बुलाया और सारी बात बताई। पुलिस उसे पकड़ कर ले गई, लेकिन तब भी उसने कुछ नहीं बताया,” मृतका की मां ने कहा।
बाद में अर्थमूवर चला रहे एक व्यक्ति ने गांव में फोन कर सूचना दी कि बच्ची को सड़क के किनारे लहुलूहान हालत में देखा गया है।
खबर सुन परिजन दौड़ते-भागते वहां पहुंचे और बच्ची को आनन-फानन में मुजफ्फरपुर शहर स्थित एसकेएमसीएच लाया गया, जहां अगले 5 दिनों तक उसका इलाज चला।
परिजनों के मुताबिक, बच्ची के गले पर चाकू से तीन बार वार किया गया था और पेट में भी चाकू से मारा गया था। इसके अलावा बच्ची के निजी अंगों से भी रक्तस्राव हो रहा था।
रेप पीड़िता की मां ने बताया, “तालाब के पास उस पर हमला किया गया था। वह पूरी तरह लहुलूहान थी, लेकिन इसके बावजूद वह वहां से चलकर सड़क पर पहुंच गई थी।”
“हमको इंसाफ चाहिए। हमको फांसी नहीं चाहिए। जिसने ये सब किया है, उसे पब्लिक के हवाले कर दिया जाए और उसे भी वैसे ही मारा जाए, जैसे उसने मेरी बच्ची को मारा है,” उन्होंने कहा।
घटना का आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। मुजफ्फरपुर के एसपी (ग्रामीण) विद्या सागर ने मीडिया को बताया, “घटनास्थल से सैंपल जुटाये गये हैं और जांच के लिए उन्हें फॉरेंसिक लेबोरेटरी में भेजा गया है। हमलोग महज 15 दिनों के भीतर चार्जशीट फाइल करेंगे और स्पीडी ट्रायल कराकर दोषी को जल्द से जल्द सजा दिलाएंगे।”
बच्ची के परिजनों ने बताया कि पांच दिनों तक एसकेएमसीएच में बच्ची का अच्छा से इलाज हुआ। मृतका के परिजन बताते हैं, “मुजफ्फरपुर में भर्ती किये। वहां शुरू में परेशानी हुई खून मिलने में, लेकिन फिर सब ठीक हो गया। भर्ती कराने के एक दिन बाद ही वह ठीक होने लगी थी। इशारे से बात करती थी। घटना के बारे में भी इशारे से बता रही थी। हमलोगों ने उसका वीडिया बनाकर रखा हुआ है।” लेकिन, बच्ची के गले नली कट गई थी, जिसे बदलने के लिए जरूरी उपकरण एसकेएमसीएच में नहीं थे, तो अस्पताल ने बच्ची को बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच रेफर कर दिया था।
“डॉक्टर लोग बताया कि गले में लगने वाली नली अस्पताल में नहीं है, इसलिए हमलोगों को बच्ची को पीएमसीएच ले जाना होगा, तो हमलोग एम्बुलेंस में बच्ची को रखकर पटना के लिए निकल गये,” मृतका के चाचा ने बताया।
एसकेएमसीएच की सुपरिंटेंडेंट कुमार विभा ने मीडिया को बताया कि सांस की नली कट जाने से इलाज में दिक्कत के कारण उसे पटना रेफर करने का निर्णय लिया गया था। पहले एम्स में रेफर करने का फैसला लिया गया लेकिन बाद में पीएमसीएच में रेफर किया गया।
पीएमसीएच में क्या हुआ
शनिवार की दोपहर लगभग एक बजे वे पीड़िता को लेकर पीएमसीएच पहुंचे और सबसे पहले इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराने के लिए पर्ची कटवाया। पर्ची कटवा कर हमलोग उसे भर्ती कराने के लिए ट्राली लेने गये थे, लेकिन ट्रॉली लेने नहीं दिया गया और कहा गया कि इमरजेंसी में उसका इलाज नहीं होगा, उसे ईएनटी विभाग में ले जाना होगा। “हमलोग ईएनटी में ले गये, तो वहां बोला गया कि टाटा वार्ड में ले जाइए। वहां हमलोग अस्पताल वालों से विनती किये कि बहुत इमरजेंसी है, यहीं इलाज दीजिए, लेकिन उन्होंने कहा कि ईएनटी में ऑक्सीजन नहीं है, इसलिए बच्ची को टाटा वार्ड में ही ले जाना होगा,” मृतका के चाचा ने बताया। “टाटा वार्ड में गये, तो वहां की हालत खराब थी, लोगों की भीड़ थी, बेड खाली नहीं थे। बहुत सारे मरीज जमीन पर ही सोये हुए थे। हमलोग बेड के लिए टाटा वार्ड में घूमते रहे काफी देर तक।”
इस बीच एम्बुलेंस का ऑक्सीजन भी खत्म हो रहा था, तो एम्बुलेंस ड्राइवर ने परिजनों को ऑक्सीजन का इंतजाम करने को कहा। मृतका के चाचा बताते हैं, “हमलोग टाटा वार्ड के कर्मचारियों से कहा कि एंबुलेंस का ऑक्सीजन खत्म हो रहा है, ऑक्सीजन सिलिंडर दीजिए, तो अस्पताल की तरफ से कहा गया कि ऑक्सीजन के लिए 2500 रुपये देने होंगे।”
मृतका के दादा कहते हैं, “हमलोग छटपटाते रहे कि बच्ची को भर्ती कर लें। हमलोग पढ़े लिखे नहीं हैं और दलित परिवार से हैं। हमलोग अस्पताल में बिलखते रहे, लेकिन कोई मदद करने वाला नहीं था।”
इस बीच, कुछ नेता भी अस्पताल पहुंच गये और बच्ची को भर्ती कराने की मांग करने लगे, तो बच्ची को प्रसूता विभाग में भर्ती किया गया।
वहीं, पीएमसीएच के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट शेखर ठाकुर ने मीडिया को बताया कि मरीज दोपहर 1.23 बजे एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचा था। सर्जरी के चिकित्सकों ने देखा कि गर्दन गटी हुई थी, छाती में भी जख्म थे और निचले हिस्से में भी दिक्कतें थीं। इसलिए उन्हें ईएनटी विभाग में जाने को कहा गया। लेकिन, मरीज वहां से शिशु वार्ड में चला गया। वहां शिशु विभाग के डॉक्टर ने एंबुलेंस में जाकर मरीज को देखा। अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ अभिजीत कुमार सिंह ने मीडिया को बताया कि अस्पताल के ईएनटी विभाग में आईसीयू की व्यवस्था नहीं है, इसलिए बच्ची को गाइनी (प्रसूता) विभाग में भर्ती करना पड़ा।
मृतका के दादा ने बताया कि बच्ची की हालत काफी खराब हो गई थी और बहुत छटपटा रही थी, तो एक बार गले का पाइप भी निकल गया था। “भर्ती रहते हुए ही रात में गले से खून निकलने लगा, तो परिजनों ने डॉक्टर को इसकी सूचना दी। इसके कुछ देर बाद बच्ची के मुंह से खून निकलने लगा और सुबह में उसकी मौत हो गई,” बच्ची के दादा ने कहा।
जन स्वास्थ्य अभियान के नेशनल कॉ-कनविनर डॉ शकील बच्ची की मृत्यु को लापरवाही का नतीजा मानते हैं। उन्होंने कहा, “अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया कि ईएनटी में आईसीयू नहीं था, इसलिए ये तय करने में वक्त लगा कि बच्ची को कहां भर्ती किया जाए। मगर सवाल है कि ईएनटी में आईसीयू क्यों नहीं था, इसकी जवाबदेही किसकी बनती है?”
उन्होंने कहा, सरकारी अस्पतालों को आडंबर बनाकर छोड़ दिया है सरकार ने। बड़ी बड़ी बिल्डिंगें बन रही हैं, हेलिपैड बन रहे हैं कि हेलिकॉप्टर से मरीजों को लाया जाएगा। लेकिन सर्विस नदारद है। स्वास्थ्य एक आपातकालीन सेवा है, लेकिन यही सेवा इमरजेंसी में पहुंच चुकी है। मरीजों को बेड नहीं दिये जाने की ये कोई एक घटना नहीं है। ऐसी घटनाएं तो अक्सर सामने आती रहती हैं।
कार्रवाई
इस बीच खबर है कि एसकेएमसीएच की सुपरिंटेंडेंट कुमारी विभा को ये कहकर सस्पेंड कर दिया गया है कि उन्हें रेफर पॉलिसी का पालन नहीं किया और ड्यूटी में भी कोताही बरती। वहीं, पीएमसीएच के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ अभिजीत सिंह को ये कहकर पद से हटाया गया है कि उन्होंने अपनी ड्यूटी सही से नहीं की थी।
इधर, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने इस मामले में जांच के आदेश दिये हैं। उन्होंने कहा कि मामले की छानबीन के लिए एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी के गठन का निर्देश दिया गया और जांच में जो भी दोषी पाये जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना को लेकर बिहार में सियासी उबाल है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा – मुजफ्फरपुर में दलित नाबालिग बेटी के साथ दरिंदगी और फिर इलाज में हुई लापरवाही बेहद शर्मनाक है। अगर समय पर इलाज मिला होता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। लेकिन, डबल इंजन सरकार ने सुरक्षा तो दूर, जीवन रक्षा में भी घोर लापरवाही बरती। पीड़ित परिवार को न्याय मिलने तक हम चुप नहीं बैठेंगे। दोषियों और लापरवाह अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इस संबंध में सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर लिखा – पीएमसीएच के बाहर भर्ती किये जाने के लिए घंटों इंतजार करती रही बलात्कार पीड़िता बच्ची। पर संवेदनहीन व्यवस्था टस से मस नहीं हुई! कुर्सी बाबू, अस्पताल के नाम पर बनाये जा रहे बड़े बड़े भवनों का क्या लाभ जब वहां चारों ओर अव्यवस्था, भ्रष्टाचार, दुर्व्यवहार, अभावव और संवेदनहीनता ही पसरा हो।
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