
कोसी नदी के किनारे बना जलालगढ़ किला जहां स्थित है, वह जगह पहले एक टापू नुमा ज़मीन थी। धीरे धीरे नदी के सिमटने से सूखी रेतीली ज़मीन उभर आई और फिर सत्रहवीं सदी में यहां इस विशाल किले का निर्माण करवाया गया।

बिहार के किशनगंज जिले में एक रहस्यमयी आठवीं शताब्दी की भगवान सूर्य की प्रतिमा उपेक्षित है। यह प्रतिमा ज़िले के कोचाधामन प्रखंड अंतर्गत बड़ीजान पंचायत में मौजूद है।

अररिया के सुंदरनाथ धाम शिव मंदिर की, जो अररिया जिले के कुर्साकाटा प्रखंड की डुमरी पंचायत में स्थित है। इस मंदिर में रोजाना भारी संख्या में नेपाली श्रद्धालुओं के साथ भारतीय लोग भी जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।

1930 के दशक में भारतीय फुटबॉल टीम एशिया की सबसे धारदार टीमों में से एक थी। उन्हीं दिनों भारत XI की टीम इंडोनेशिया XI से एक मैच खेल रही थी। मैच के आखिरी कुछ मिनट बचे थे, तब तक दोनों टीम कोई भी गोल नहीं कर सकी थी। मैच ड्रा की तरफ बढ़ ही रहा […]

गत 23 सितंबर को देश के गृह मंत्री अमित शाह पूर्णिया आए थे। यहां उन्होंने ‘जन भावना रैली’ को संबोधित किया। गृह मंत्री ने ‘पूरण देवी मंदिर’ की ‘मां पूरण देवी’ को श्रद्धा के साथ प्रणाम कर अपने संबोधन की शुरुआत की थी। इसके बाद से इस मंदिर के चर्चे बढ़ गए हैं। पूरण देवी […]

वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय हमारा किशनगंज पाकिस्तानी फौज के टारगेट पर रहता था। दरअसल पूर्व दिशा में किशनगंज शहर से महज 30 किमी दूर पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में पाकिस्तानी फौज को यह मालूम हो गया था कि पूर्वी पाकिस्तान के सर्वमान्य नेता शेख मुजीबुर्रहमान की मुक्तिवाहिनी के गुरिल्लाओं को किशनगंज में […]

महिनगांव एक एस्टेट के रूप में विकसित हुआ था। फिलहाल, करीब साढ़े चार हजार लोग यहां रह रहे हैं। महिनगांव एस्टेट को 18वीं सदी में बसाया गया था। तब पूर्णिया के नवाब शौकत जंग थे, जो मुर्शिदाबाद के अलीवर्दी खान के द्वारा पूर्णिया डिवीजन के गवर्नर बनाए गए थे।

कहते हैं कि जो समाज अपने इतिहास को सहेजना जानता है, वही समाज अपने भविष्य को सफलता के सांचे में ढाल पाता है। इंसान का इतिहास जीव-विज्ञान के किसी भी मामूली या ग़ैर मामूली किताब में मिल जाता है, मगर पुरखों का इतिहास अगली नस्ल सहज कर रखती, तभी वो आगे की पीढ़ियों तक जाता […]