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वायरल वीडियो से उभरी पुरानी गुमशुदगी: क्या बांग्लादेश में मिला व्यक्ति है कटिहार का जरीफ अली?

कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड अंतर्गत भवानीपुर गांव में मोहम्मद साहेब अपनी मां, पत्नी और बच्चों के साथ एक पुराने कच्चे मकान में रहता है। बचपन में ही पिता के अचानक गायब हो जाने की वजह से वह कभी स्कूल नहीं जा पाया।

Aaquil Jawed Reported By Aaquil Jawed |
Published On :
viral video brings to light old missing person case is the person found in bangladesh the jarif ali of katihar

बांग्लादेश के नीलफमरी जिले के सैदपुर शहर से हाल ही में एक वायरल वीडियो ने कटिहार के एक गांव में हलचल मचा दी है।


पिछले महीने के 18 जून को बांग्लादेश के यूट्यूब चैनल “ह्युमैनिटी बांग्लादेश” द्वारा एक वीडियो प्रकाशित किया गया, जिसमें मानसिक रूप से अस्वस्थ एक व्यक्ति के पास से करीब 3.69 लाख टका नगद बरामद होने की खबर सामने आई।

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अब इसी वीडियो को देखकर बिहार के कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड अंतर्गत भवानीपुर गांव के एक परिवार ने दावा किया है कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति उनका 22 साल पहले लापता हुआ सदस्य मोहम्मद जरीफ अली हैं।


ह्युमैनिटी बांग्लादेश की टीम सड़कों पर भटक रहे मानसिक रूप से बीमार लोगों की मदद के लिए काम करती है। इसी क्रम में संस्था ने एक अस्वस्थ व्यक्ति को रोका और उसे सहायता पहुंचाने की कोशिश की। जब टीम ने उसके पुराने कपड़े बदलने और सामान हटाने की कोशिश की तो भारी पोटलियों में नोटों की गड्डियां बरामद हुईं। अनुमान से कहीं अधिक राशि देख संस्था ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया। बाद में यह वीडियो यूट्यूब पर डाला गया, जिसे अब तक 3 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है।

कटिहार से भावुक दावा

वीडियो जारी होने के करीब एक महीने बाद यह क्लिप बिहार के कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड अंतर्गत भवानीपुर गांव तक पहुंची। गांव के मोहम्मद साहेब और उनकी मां शाहिदा खातून ने वीडियो देखने के बाद स्पष्ट दावा किया कि यह व्यक्ति उनके परिवार का सदस्य मोहम्मद जरीफ अली है, जो 20-22 साल पहले मानसिक संतुलन खो जाने के कारण घर से गायब हो गया था।

सोशल मीडिया में यह खबर फैलने के बाद ‘मैं मीडिया’ ने भवानीपुर गांव के उसे परिवार के कथित तौर पर दावा करने वाली पत्नी शाहिदा और बेटे साहेब से मुलाकात की।

पत्नी शाहिदा खातून ने बताया, “मेरे पति दो बार मैट्रिक में फेल हुए थे, जिसके बाद वह काफी डिप्रेशन में चले गए थे। कम बोलते थे और धीरे-धीरे मानसिक संतुलन बिगड़ गया। अचानक एक दिन लापता हो गए। हम ने बहुत खोजा, लेकिन कहीं उनका पता नहीं चला।”

शाहिदा खातून ने आगे कहा, “मुझे उम्मीद ही नहीं बल्कि पूरा भरोसा है कि वह व्यक्ति मेरे पति ही हैं।”

उनके बेटे मोहम्मद साहेब ने बताया कि वीडियो पश्चिम बंगाल में एक रिश्तेदार के माध्यम से उन्हें मिला। “उसमें दिख रहा व्यक्ति बिल्कुल मेरे पिता जैसा है। गांव के बुजुर्गों ने भी वीडियो देखकर पहचान लिया। हम सबको पूरा विश्वास है कि यही हमारे पिता हैं।”

प्रशासन से नहीं की थी कोई शिकायत

परिवार की आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति बेहद कमजोर है। मोहम्मद साहेब खुद कभी स्कूल नहीं गए और कम उम्र में पंजाब जाकर मजदूरी करने लगे। परिवार ने लापता होने की किसी तरह की पुलिस रिपोर्ट या एफआईआर भी दर्ज नहीं कराई थी।

कटिहार जिले के बारसोई प्रखंड अंतर्गत भवानीपुर गांव में मोहम्मद साहेब अपनी मां, पत्नी और बच्चों के साथ एक पुराने कच्चे मकान में रहता है। बचपन में ही पिता के अचानक गायब हो जाने की वजह से वह कभी स्कूल नहीं जा पाया। कम उम्र में परिवार की जिम्मेदारी पड़ जाने के बाद मोहम्मद साहेब गांव वालों के साथ पंजाब मजदूरी करने जाने लगा। पिछले बुधवार को वह वापस पंजाब जाने वाला था इसी बीच बांग्लादेश से वह वीडियो सामने आया।

अब परिवार इस बात को लेकर चिंतित है कि वे बिना पढ़े-लिखे पासपोर्ट या विजा कैसे बनवाएं और बांग्लादेश कैसे जाएं। मोहम्मद साहेब ने सरकार से गुहार लगाई है, “हम गरीब हैं। सरकार मदद करे ताकि हम अपने पिता को वापस ला सकें। वहां जाने के लिए विजा पासपोर्ट की जरूरत होगी और कोई पढ़ा लिखा व्यक्ति को भी साथ ले जाना होगा क्योंकि मैं तो पढ़ना लिखना बिल्कुल नहीं जानता, वहां की कागजी कार्रवाई कैसे करूंगा।”

भवानीपुर गांव के अनिसुर रहमान ने वीडियो में दिखाए जाने वाले शख्स की पहचान करते हुए बताया, “यह बिल्कुल मोहम्मद जरीफ जैसा दिखाई देता है। हम लोगों को लगता है कि वह हमारे गांव का मोहम्मद जरीफ अली ही है।”

भवानीपुर गांव से दो और लोग, इस्माइल हक (20 साल पहले) और तूरा मोहम्मद (6 साल पहले) भी लापता हैं। दोनों की मानसिक स्थिति भी अस्वस्थ बताई जाती है।

ह्युमैनिटी बांग्लादेश की प्रतिक्रिया

‘मैं मीडिया’ ने ह्युमैनिटी बांग्लादेश से संपर्क किया और इस मामले से जुड़े कुछ सवाल पूछे। ह्युमैनिटी बांग्लादेश के संस्थापक मोहम्मद मैनुल इस्लाम ने बताया, “व्यक्ति वर्तमान में नीलफमारी जिले के सैदपुर में रह रहा है। कुछ दिन पहले एक बांग्लादेशी युवक, जिसने खुद को उसका भतीजा बताया, उसे अपने घर ले गया था, लेकिन कुछ समय बाद वह व्यक्ति फिर वापस लौट गया।”

मैनुल इस्लाम ने बताया कि बरामद 3.69 लाख टका सामाजिक कल्याण विभाग के पास सुरक्षित जमा करा दिया गया है और व्यक्ति की राष्ट्रीय पहचान पत्र की प्रक्रिया भी चल रही है, ताकि भविष्य में यह राशि उसके नाम पर फिक्स डिपॉजिट कराई जा सके।

उन्होंने बताया कि व्यक्ति खुद को भारतीय नहीं कहता है, लेकिन बिहारी शैली की हिंदी बोलता है और टूटी-फूटी बांग्ला भाषा भी।

“उसने कभी ‘मोहम्मद जरीफ अली’ नाम का जिक्र नहीं किया, इसके अलावा उसके बोलचाल की भाषा हमारे क्षेत्र में भी प्रचलित है, इससे नागरिकता का प्रमाण नहीं दिया जा सकता,” मैनुल ने बताया।

संस्था का कहना है कि यदि भारतीय परिवार सामने आता है तो DNA परीक्षण के माध्यम से ही पहचान सुनिश्चित की जाएगी। अभी तक बांग्लादेश में दावा करने वाला एक व्यक्ति सामने आया है, जिसकी रिश्तेदारी की पुष्टि नहीं हो सकी है। उसके डीएनए जांच की प्रक्रिया की जा रही है। फिलहाल ह्युमैनिटी बांग्लादेश स्थानीय प्रशासन के सहयोग से उसकी देखरेख कर रही है।

“यह बहुत ही गरीब परिवार है। सरकार को चाहिए कि तत्काल इसका संज्ञान ले और डीएनए टेस्ट करवा कर यदि यह जरीफ अली साबित होते हैं तो उन्हें भारत लाने में मदद की जाए,” उन्होंने कहा।

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Aaquil Jawed is the founder of The Loudspeaker Group, known for organising Open Mic events and news related activities in Seemanchal area, primarily in Katihar district of Bihar. He writes on issues in and around his village.

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