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सीमांचल में चल रहा 3 दिन का तालिमी कारवां

मुबारक कापड़ी ने पत्रकारों को बताया कि शिक्षा का माहौल बनाने में शिक्षकों के साथ साथ अभिभावकों की भी अहम जिम्मेदारी होती है।

Ariba Khan Reported By Ariba Khan |
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शिक्षा की अहमियत बताने के लिए महाराष्ट्र से पहुंचे शिक्षाविद मुबारक कापड़ी।

“तालिमी माहौल बनाने के लिए सबसे बड़ा रोल वालीदैन का होता है, क्योंकि बच्चों को पहले घर में मोटिवेशन मिलने चाहिए। अपने बच्चों को घर का चूल्हा जलाने के लिए चूल्हे का ईंधन नहीं बनाना चाहिए बल्कि बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए काम करना चाहिए” – मुबारक कापड़ी (शिक्षाविद)

सोमवार 21 नवंबर को ‘प्राईवेट स्कुल्स एन्ड चिल्ड्रंन वेलफेयर एशोसियेशन किशनगंज’ द्वारा बहादुरगंज के रसल हाई स्कूल परिसर में तालीमी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में भाग लेने महाराष्ट्र से शिक्षाविद मुबारक कापड़ी पहुंचे।

सीमांचल के घर-घर शिक्षा का अलख जगाने और शिक्षा को बढ़वा देने के उद्देश्य से उन्होंने छात्र, शिक्षक और अभिभावकों को अपने मोटिवेशनल भाषण के माध्यम से कई अहम जानकारियां दी।

मुबारक कापड़ी ने पत्रकारों को बताया कि शिक्षा का माहौल बनाने में शिक्षकों के साथ साथ अभिभावकों की भी अहम जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा, अभिभावकों की जिम्मेदारी है कि अपने बच्चें को कच्ची उम्र में मजदूरी करवाने से परहेज करें और उनके उज्वल भविष्य के लिए शिक्षा को बढ़ावा दें।

मुबारक कापड़ी ने कहा, “बच्चों को छोटे-मोटे कामों में, छोटे-मोटे कारोबार में लगाकर, ठेला लगाकर, गाड़ी लगाकर इस तरीके से पेट भरने का जो काम है, इसको वालीदैन को छोड़ देना चाहिए और बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए उन काम करना चाहिए। मां-बाप को चाहिए कि वह अपने बच्चों के लिए बड़े ख्वाब देखें, ना कि नहीं छोटे-मोटे कामों में लगाएं”

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उन्होंने आगे कहा, “शिक्षकों का रोल बाद में शुरू होता है जब बच्चे स्कूल में आते हैं। कोविड-19 बाद मायूसी छाई हुई थी और बच्चे तालिमी धारा से कटने जा रहे थे, उसमें शिक्षकों व स्कूलों ने मेहनत करके उनको फिर से तालिमी धारा से जोड़ा है जिसका हम इस्तक़बाल करते हैं”

मुबारक कापड़ी ने अंत में चिंता जताते हुए कहा, “अगर यह बच्चे शिक्षा से नहीं जुड़ेंगे किसी असामाजिक कार्यों से जुड़ जाएंगे। यह बच्चे नशे में लग सकते हैं या बुरी आदतों में पढ़ सकते हैं, इसीलिए यह 3 दिन का तालिमी कारवां सीमांचल में निकला हुआ है ताकि जगह-जगह जाकर तालीम की अहमियत बताई जा सके”

वही कार्यक्रम में उपस्थित AIMIM विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा की मुबारक कापड़ी सीमांचल में शिक्षा का अलख जगाने तीन दिवसीय कार्यक्रम में भाग लेने पहुचे हैं। वे शिक्षा के प्रति छात्रौं, शिक्षकों, और अभिभावकों को अपने संबोधन से प्रेरणा दे रहे हैं। और इनकी वाणी से इस इलाके में शिक्षा का ग्राफ बेहतर होगा।
अख्तरुल ईमान ने आगे कहा कि मुबारक कापड़ी से प्रेरणा लेकर लोग अपने बच्चें के बेहतर भविष्य के बारे में सोचेंगे।

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अरीबा जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ग्रेजुएट और NFI की मल्टीमीडिया फेलो (2021) हैं। फिलहाल, वह ‘मैं मीडिया’ में वॉइस ओवर आर्टिस्ट और एंकर के रूप में कार्यरत हैं।

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