बिहार लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अतुल प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि शिक्षक बहाली परीक्षा अपने निर्धारित तिथियों में होगी। सुप्रीम कोर्ट के बीएड डिग्रीधारियों पर दिए एक हालिया फैसले से ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि यह परीक्षा रद्द हो सकती है, या इनकी तिथियों में बदलाव हो सकता है। अपने एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बीएड डिग्रीधारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के पात्र नहीं हैं।
वर्ग (1-5) में बीएड डिग्रीधारी की पात्रता पर संशय बरकरार
अतुल प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि परीक्षा निर्धारित तिथियों को आयोजित की जाएगी और जो भी अभ्यर्थी इसमें आवेदन दिए हैं, वो सभी परीक्षा देने के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि आयोग आवेदन के समय किसी भी अभ्यर्थी की पात्रता संबंधी जांच नहीं करता है, स्वघोषणा के आधार पर अभ्यर्थी जो भी जानकारी देते हैं, उसी के आधार पर परीक्षा में बैठने की अनुमति मिलती है।
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अतुल प्रसाद ने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की पेज संख्या 45 में लिखा है कि राजस्थान सरकार ने बीएड डिग्रीधारियों से आवेदन न लेकर गलत किया था। क्योंकि उस समय एनसीटीई की गाइडलाइंस प्रभावी थी और जब तक गाइडलाइंस प्रभावी थी, तब तक उसको राज्य सरकार को मानना था। हमारे मामले में भी वही लागू होता है। जब हमने आवेदन आमंत्रित किया था, तब बीएड डिग्रीधारी योग्य और पात्र थे, उसी के आधार पर उन से आवेदन लिये गए। कोई भी वैधानिक संस्था द्वारा एक विधिवत आदेश जारी होता है तो वो तब तक प्रभावी होता है जब तक कि उसको रद्द न कर दिया जाये। इसका मतलब यह हुआ कि 11 तारीख से पहले यह आदेश प्रभावी था।”
उन्होंने साफ किया कि एक बार जिनको एडमिट कार्ड जारी हो जाता है वो परीक्षा में बैठ सकते हैं, और आयोग डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन के समय अभ्यर्थी द्वारा दिए गए दावों की जांच करते हैं।
“जो लोग नौकरी पा लिए, उनकी नौकरी भी सुरक्षित है। जिन लोगों ने परीक्षा में शामिल होने का अधिकार प्राप्त कर लिया, उनका अधिकार भी सुरक्षित है। इसका मतलब यह हुआ कि बीएड डिग्रीधारी इस परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। लेकिन यह अधिकार सिर्फ परीक्षा में शामिल होने का है, उनके (परीक्षा) फल पर उनका अधिकार अभी नहीं बना है। परीक्षा फल के अधिकार के संबंध में हमारे विज्ञापन में है कि एनसीटीई के परामर्श से राज्य सरकार जो निर्णय करेगी, वही मान्य होगा। हमलोग एनसीटीई से गाइडेड होते हैं। एनसीटीई के परामर्श पर राज्य सरकार का जो भी निर्णय होगा वो ही अंतिम निर्णय होगा। इसके अलावा इस बात पर भी बीएड डिग्रीधारी का परीक्षा फल निर्भर करेगा कि वो लोग सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे या नहीं?,” उन्होंने कहा।
परीक्षा परिणाम पर रोक लगी, तो नहीं खत्म होगा मौका
अतुल प्रसाद ने कहा कि अगर बीएड डिग्रीधारी परीक्षा में बैठे और उनके परीक्षा फल पर रोक लगा दी जाती है, तो ऐसी स्थिति में उनका तीन में से एक मौका खत्म नहीं होगा, बल्कि तीनों मौका बरकरार रहेगा। आयोग के अध्यक्ष ने साफ किया कि अगर बीएड डिग्रीधारी परीक्षा में बैठे और एनसीटीई के परामर्श पर राज्य सरकार ने फैसला लिया कि बीएड डिग्रीधारी प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के पात्र नहीं हैं तो ऐसी सूरत में ही तीनों मौका बरकरार रहेगा। उल्लेखनीय है कि बीपीएससी की इस परीक्षा में बैठने के लिए एक अभ्यर्थी को तीन मौका मिलेगा।
अतुल प्रसाद ने कहा कि बीपीएससी की शिक्षक बहाली परीक्षा में निगेटिव मार्किंग नहीं होगा। हालांकि जब विज्ञापन निकाला गया था तो उस वक्ता बताया गया था कि इस परीक्षा में निगेटिव मार्किंग का प्रावधान रहेगा। अतुल प्रसाद ने इस संबंध में कहा कि चूंकि बीपीएससी शिक्षक बहाली की परीक्षा पहली बार आयोजित कर रहा है, कोई मॉडल प्रश्न पत्र या परीक्षा से संबंधी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है, इसीलिए आयोग ने तय किया है कि इस साल परीक्षा में निगेटिव मार्किंग नहीं होगा। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार ने भी निगेटिव मार्किंग न रखने का अनुरोध किया था।
एक घंटा पूर्व ही बंद हो जाएगा सेंटर
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि परीक्षा केंद्र में परीक्षा समय के एक घंटा पूर्व ही परीक्षार्थियों का प्रवेश बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि सिर्फ एक घंटा पहले सेंटर नहीं पहुंचना है, बल्कि परीक्षा समय के ढाई से लेकर एक घंटा पूर्व तक ही परीक्षा कक्ष में परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। इसके अलावा परीक्षा केंद्रों के प्रवेश द्वार और परीक्षा कक्षों में भी कैमरा लगाया जाएगा। उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर परीक्षार्थियों को किसी भी कानून का उल्लंघन न करने की हिदायत दी है।
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