पटना की रहने वाली राफ़िया (बदला हुआ नाम) 25 जुलाई की दोपहर गांधी मैदान के गेट नंबर 10 पर प्रदर्शन करने पहुँची थीं। वह 12वीं की छात्रा हैं और आगे सरकारी नौकरी की तैयारी करेंगी, इसलिए उन्होंने 25 जुलाई के प्रदर्शन में शामिल होकर छात्रों का हौसला बढ़ाना मुनासिब समझा। वह कहती हैं, “इतना पेपर लीक हो रहा है, गरीब बच्चे सुसाइड कर रहे है। आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो, मेरा जीवन सुरक्षित हो, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दें, इन्हीं माँगों के साथ मैं प्रदर्शन में शामिल होने आई थी।”
लेकिन, बिना किसी उकसावा के पुलिस ने राफ़िया पर लाठीचार्ज कर दिया और लगभग 30 घंटे तक थाने में बिठाये रखा। 30 घंटे के बाद उनकी 10वीं कक्षा के सर्टिफिकेट और आधार कार्ड की फ़ोटोकॉपी लेकर थाने से छोड़ा गया।
Also Read Story
वह 25 जुलाई की घटना को याद करते हुए कहती हैं, “मैं नक़ाब पहन कर थी, तो एक महिला पुलिस ने मुझे इंगित कर कहा कि ये जो नक़ाब वाली है…यही प्रदर्शन करवा रही है। फ़ोर्स का एक जवान जो कमांडो था शायद, उसने मेरे मोबाइल फ़ोन से सारा वीडियो डिलीट करवा दिया। पुलिस वालों में दो लाठियाँ हम पर तोड़ दीं। इतना मारा है कि मैं चल फिर पाने की स्थिति में नहीं हूँ।”
राफ़िया और अन्य लोगों को एक बस में बिठाकर रुपसपुर थाने ले जाया गया, जहां वे लोग 30 घंटे तक रहे। इन 30 घंटों तक बच्चों के परिजन थाने-दर-थाने भटकते रहे। “मेरा फ़ोन बंद था, तो मेरे घर के लोग एक थाने से दूसरे थाने तक भटकते रहे। मुझे बहन का नंबर याद था, तो मैंने बहन को फ़ोन कर बताया कि रुपसपुर थाने में हूँ।”
दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 57 कहती है कि किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से ज़्यादा समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है, लेकिन राफ़िया व अन्य छात्रों के मामले में ऐसा नहीं हुआ। पुलिस ने इस धारा का उल्लंघन करते हुए 24 घंटे से ज़्यादा वक़्त तक थाने में रखा। इतना ही नहीं कई ऐसे लोगों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जो नाबालिग थे और प्रदर्शन से उनका कोई वास्ता नहीं था।
जुलॉजी में स्नातक कर रही पटना की एक छात्रा अपने दोस्त के साथ 25 जुलाई को गांधी मैदान के पास स्थित रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से स्टूडेंट लोन के लिए दस्तावेज निकलवाने गई थी, तभी पुलिस ने उसे और उसकी दोस्त को हिरासत में ले लिया।
नाम नहीं बताने की शर्त पर छात्रा ने कहा, “मेरी दोस्त को स्टूडेंट लोन लेना था, तो 25 जुलाई की दोपहर क़रीब दो बजे हमलोग आरबीआई बिल्डिंग के पास थे, तभी पुलिस ने हमलोगों को पकड़ लिया और पुलिस वैन में बिठाकर रुपसपुर थाने ले गई।”
उक्त छात्रा और उसकी दोस्त को पुलिस ने क़रीब 30 घंटों के बाद गांधी मैदान लाकर छोड़ दिया। छात्रा ने कहा कि उसके साथ कुल 26 लोग थे, जिन्हें हिरासत से छोड़ा गया। “पुलिस ने उक्त प्रदर्शन को लेकर बहुत सारे निर्दोष लोगों को पकड़ा था। मेरे सामने ही एक लड़की जो एक मॉल में काम करने जा रही थी, को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।”
वह नीट की भी तैयारी कर रही है और छात्रों के प्रदर्शन का समर्थन करती है, लेकिन उस दिन के प्रदर्शन में वह शामिल नहीं थी। प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की वजह पूछने पर छात्रा ने कहा, “अगर पुलिस मुझे गिरफ्तार कर लेती और एफआईआर हो जाती, तो जेल से निकलना मुश्किल होता क्योंकि क़ानून से बचने के लिए बड़े कनेक्शन होने चाहिए, इसलिए मैं प्रदर्शन में शामिल नहीं हुई।”
नाबालिगों को भी घंटों हिरासत में रखा
25 जुलाई की दोपहर को ही महज़ 13 साल के मो. इमरोज (बदला हुआ नाम) को पीरबहोर थाने की पुलिस ने गांधी मैदान से हिरासत में ले लिया था। लेकिन परिजनों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। शाम तक जब इमरोज घर नहीं लौटा, तो उनके पिता ने थानों का चक्कर लगाना शुरू किया। कई थानों की ख़ाक छानने के बाद आख़िरकार उन्हें पता चला कि पीरबहोर थाने में उसे रखा गया है।
26 जुलाई की रात पुलिस ने उसे छोड़ा। उसके पिता उसे थाने से घर लेकर आये। उन्होंने कहा कि थाने में 20-22 और बच्चे थे।
ग़ौरतलब हो कि नई दिल्ली के जंतर मंतर पर एक महीने से भी अधिक समय से युवाओं और छात्रों के ज़ोरदार प्रदर्शन की लपट बिहार भी पहुँची थी। यहाँ 22 जुलाई को राजधानी पटना समेत बिहार के कई शहरों में छात्रों व युवाओं ने प्रदर्शन किया। इसके बाद 25 जुलाई बिहार बंद का आह्वान किया गया और उस रोज़ भी छात्रों ने प्रदर्शन किया।

इन प्रदर्शनों में शामिल होने वाले छात्रों व युवाओं के ख़िलाफ़ अब पुलिस ने दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है। जिन शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किया, वहाँ की पुलिस छात्रों की सामूहिक गिरफ़्तारियाँ कर रही हैं, उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालकर लोगों से उनकी शिनाख्त करने पर ईनाम की घोषणा कर रही है। वहीं, बहुत से छात्रों को अलग अलग थानों में हिरासत में भी रखा गया है।
22 जुलाई को पटना में प्रदर्शन के संबंध में पटना पुलिस ने 22 एफआईआर दर्ज की और 55 लोगों को गिरफ्तार किया। इसके अलावा 60 लोगों की तस्वीरें सोशल पर जारी की।
25 जुलाई को आइसा ने बिहार बंद का आह्वान किया था। उससे ठीक एक दिन पहले पुलिस ने भाकपा (माले) के छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंड्स एसोसिएशन (आइसा) के अध्यक्ष धनंजय कुमार, आइसा के बिहार सचिव दीपंकर, आइसा की उपाध्यक्ष सबा आफ़रीन, पालीगंज के माले विधायक संदीप सौरभ समेत एक दर्जन से अधिक आइसा व भाकपा माले नेताओं को गिरफ्तार किया। कई नेताओं को घंटों थाने में बिठाये रखा गया।
उधर, 22 जुलाई को सचिवालय थाने में दर्ज एफआईआर में कुल 93 लोगों को नामज़द किया गया है, जिनमें कई आधा दर्जन यूट्यूबर भी शामिल हैं। उधर, 25 जुलाई को गांधी मैदान के पास प्रदर्शन को लेकर 144 नामज़द और 5000 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
26 जुलाई की देर रात हिरासत में लिये गये छात्रों में से 86 को मजिस्ट्रेट के आवास पर पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
छात्रों का केस लड़ रहे वकील शाश्वत ने कहा कि ऐसा लगता है कि मजिस्ट्रेट ने पहले ही फ़ैसला कर लिया था कि छात्रों को न्यायिक हिरासत में भेजना है, इसलिए वकीलों की एक भी बात उन्होंने नहीं सुनी और छात्रों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मजिस्ट्रेट ने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि उन्हें किन कारणों से गिरफ्तार किया गया है और न ही उन्होंने एफआईआर देखी।
गृह विभाग का ऐलान, केस होंगे वापस
इस बीच बिहार के गृह विभाग ने विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों पर किये गये सभी केस वापस लिये जाएँगे। एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर गृह विभाग ने कहा है कि 26 जुलाई की शाम 6 बजे से पहले तक बिहार राज्य के किसी भी हिस्से में नीट/यूजी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के संदर्भ में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल व्यक्तियों के विरुद्ध सरकार कोई दंडात्मक, प्रतिशोधात्मक अथवा प्रतिकूल क़ानूनी कार्रवाई नहीं करेगी।
प्रेस विज्ञप्ति में आगे कहा गया है कि 26 जुलाई की शाम 6 बजे के पूर्व व्यक्तियों के विरुद्ध दर्ज सभी प्राथमिकी, परिवाद या कारण बताओ नोटिस को वापस लेने के लिए विधिक प्रक्रिया तत्काल प्रारंभ की जाएगी और उक्त तिथि के पूर्व दर्ज कांडों में भविष्य में भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
सीमांचल की ज़मीनी ख़बरें सामने लाने में सहभागी बनें। ‘मैं मीडिया’ की सदस्यता लेने के लिए Support Us बटन पर क्लिक करें।



















