पिछले महीने बिहार के अररिया ज़िले में एक ही हफ्ते के अंदर हिरासत में दो कैदियों की मौत हो गई। दोनों ही मृतक सोहराब खान उर्फ़ मुन्ना और मिथलेश राम आर्थिक रूप से कमज़ोर, अल्पसंख्यक या महादलित परिवार से हैं। ‘मैं मीडिया’ ने तीन साल पहले 2022 में ‘अररिया में हिरासत में मौतें, न्याय के इंतजार में पथराई आंखें‘ के नाम से एक विस्तृत रिपोर्ट चलाई थी। इसमें हमने 2020 से 2022 के बीच अररिया में ऐसे ही लगभग आधा दर्जन मौतों की कहानी सामने लाई थी, ये सभी भी अल्पसंख्यक या महादलित परिवार से थे। 13 मई, 2020 को मोहम्मद मुमताज़, 31 दिसंबर, 2020 को मोहम्मद अशफ़ाक़, 27 फरवरी, 2021 को इमरान, 14 जून, 2022 को नरेश धरकार और 16 जुलाई, 2022 को मोहम्मद सज्जाद इन कैदियों में शामिल थे।
सोहराब खान की रहस्यमय मौत
पलासी प्रखंड अंतर्गत भीखा पंचायत के बांसर गाँव के रहने वाले सोहराब खान उर्फ़ मुन्ना 2011-12 में अपने एक साथी से 20,000-25,000 लेनदेन के मामले जेल गया। कुछ महीनों जेल में रहने के बाद मामला कोर्ट में सेटल हो गया था। करीब 13 सालों के बाद उसी मामले में एक गैर-जमानती वारंट जारी कर उसे 17 अप्रैल को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया।
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पुलिस के अनुसार सोहराब खान की तबीयत अचानक खराब होने पर उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गिरफ्तारी के अगले ही दिन 18 अप्रैल, 2025 को अररिया मंडल कारा अधीक्षक सुजीत कुमार झा ने सोहराब के परिवार को एक पत्र लिख कर सूचित किया कि, “सोहराब की समुचित चिकित्सा हेतु कारा से सदर अस्पताल, अररिया में कारा के सुरक्षा कर्मियों के संरक्षण में भेजा जा रहा है।” लेकिन अगले दिन आई सरकारी पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगना बताया गया। परिवार ये मानने को तैयार नहीं है और न ही फांसी को लेकर कोई प्रमाण प्रशासन ने परिवार के समक्ष रखा है।
बिहार जेल नियमावली, 2012 के नियम 521 के अनुसार, आत्महत्या या हत्या की घटनाओं को रोकने के लिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि चाकू, टूटे कांच, रस्सी, ईंट जैसे खतरनाक सामान खुले में न रहें। नाइयों, दर्जियों व कार्यशालाओं के औजार काम के बाद गिनकर बंद किए जाएं। फिनाइल जैसी जहरीली चीजें कैदियों की पहुंच से दूर रखी जाएं।
मिथिलेश राम की बीमारी से मौत?
सोहराब की मौत से सिर्फ पांच दिन पहले ताराबाड़ी थाना क्षेत्र के रहने वाले सजायाफ्ता कैदी मितेश राम उर्फ मिथिलेश राम की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। अररिया ज़िले की जमुआ पंचायत स्थित फुलवारी गांव निवासी मिथिलेश राम जून 2023 से हत्या के मामले में उम्र कैदी की सज़ा काट रहा था।
पुलिस की मानें तो 13 अप्रैल 2025 को तबीयत बिगड़ने पर उसे अररिया सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मिथिलेश राम की पत्नी रूपा देवी का कहना है कि मौत से एक दिन पहले, 12 अप्रैल को वह जेल में अपने पति से मिलने गई थी। उस समय मिथिलेश सामान्य हालत में था और ठीक-ठाक बात कर रहा था। लेकिन अगली सुबह परिवार को जेल प्रशासन की ओर से उसकी मौत की सूचना मिली।
अगस्त 2017 में मिथिलेश राम पर 18 महीने के बच्चे की हत्या कर तालाब में फेंकने का आरोप लगा था। इस मामले में मिथिलेश के अलावा उसकी मां प्रमिला देवी और छोटा भाई श्रवण राम भी आरोपी थे। बाद में प्रमिला देवी की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी।
अररिया हाई कोर्ट ने 9 जून 2023 को इस मामले में आईपीसी की धारा 302/34, 201/34 और 365/34 के तहत आरोप तय किए। दोषी पाए जाने पर दोनों अभियुक्तों को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये जुर्माना, धारा 201 और 365 के तहत 7-7 साल कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सज़ा सुनाई गई।
मिथिलेश का परिवार शुरू से इन आरोपों को गलत बताता रहा है। मिथिलेश की पत्नी रूपा देवी का कहना है कि बच्चे की मौत तालाब में गिरने से हुई थी, लेकिन झूठी कहानी बनाकर पति को फंसाया गया।
हिन्दुस्तान अखबार में 14 अप्रैल को छपी खबर में जेल सुपरिटेंडेंट सुजीत कुमार झा ने बताया कि मिथलेश को जॉन्डिस, टीबी, और फेफड़ों में पानी भरने की शिकायत थी। इसके चलते उसे दो बार इलाज के लिए जीएमसीएच भागलपुर भेजा गया था। वर्तमान में मृतक का इलाज मंडल कारा के अस्पताल में चल रहा था।
सरकारी पोस्टमॉर्टेम रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण पुरानी लंबी बीमारी और कई अंगों का फेल हो जाना है। मिथिलेश राम के छोटे भाई कुंदन कुमार राम का आरोप है कि उनके भाई मिथलेश की मृत्यु जेल में ही हुई थी जबकि पुलिस ने अस्पताल लाकर उसे वहां मृत घोषित किया। वह इस मामले की जांच की मांग कर रहे हैं।
इन मामलों के बारे में प्रशासन से हमने कई सवाल पूछने चाहे, लेकिन करीब 20 दिनों के निरंतर प्रयास के बाद भी कोई अधिकारी कैमरे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुआ। उधर अररिया के मानवाधिकार कार्यकर्ता ज़िले में अल्पसंख्यक और महादलित कैदियों की हिरासत में बढ़ती मौतों से चिंतित हैं और इसको लेकर न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं।
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