Sunday, May 15, 2022

असमय आंधी और बारिश से सीमांचल में फसलों की तबाही

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Umesh Kumar Ray
Umesh Kumar Ray started journalism from Kolkata and later came to Patna via Delhi. He received a fellowship from National Foundation for India in 2019 to study the effects of climate change in the Sundarbans. He has bylines in Down To Earth, Newslaundry, The Wire, The Quint, Caravan, Newsclick, Outlook Magazine, Gaon Connection, Madhyamam, BOOMLive, India Spend, EPW etc.

पूर्णिया जिले के चरैया गांव के किसानों के चेहरे पर मायूसी है। वे स्लेटी रंग के बादल से भरे आसमान को देखते हैं, तो कभी खेत में बारिश के पानी में भीग चुकी धान की कटी हुई फसल को। फिर भीगी हुई फसल को ही बोझा बांध लेते हैं और घर को रवाना हो जाते हैं, इस उम्मीद में कि गीली फसल को घर पर सुखा लेंगे, जिससे थोड़ा बहुत चावल निकल आएगा।

किसानों को थोड़ा भी अंदाज़ा नहीं था कि अक्टूबर के तीसरे हफ्ते में इतनी बारिश और बाढ़ आ जाएगी, इसलिए वे बेफिक्र थे और धान की फसल काटकर खेत में ही सूखने के लिए छोड़ दिया था।

पूर्णिया जैसी ही स्थिति किशनगंज और अररिया के साथ-साथ समस्तीपुर, सुपौल और बेगूसराय के किसानों की भी है। बारिश के कारण इन जिलों की फसल भी ख़राब हो गई है।

पूर्णिया जिले के चरैया गांव के रहने वाले मो. असलम बताते हैं,

“गांव के के 250 से 300 किसानों ने धान की फसल काटकर खेत में रखा हुआ था, लेकिन तीन चार दिनों से लगातार बारिश के कारण धान की बाली में अंकुर फूटने लगा है।

“किसानों के मुंह में चावल का निवाला जाने ही वाला था कि मौसम ने वो निवाला छीन लिया है। इलाके में बाढ़ का पानी भी घुस गया है और पानी का स्तर बढ़ता ही जा रहा है,”

असलम कहते हैं। 

अररिया के सिकटी प्रखंड के अंतर्गत बोकन्तरी पंचायत के किसान हीरालाल मंडल ने एक बीघे में धान की फसल लगाई थी, जो बारिश के पानी में डूब गई है। उन्होंने कहा कि अगर फसल बच जाती, तो करीब 6-7 क्विंटल चावल निकलता, लेकिन बारिश ने सब चौपट कर दिया।

उन्होंने कहा कि पूरे क्षेत्र में इस बार धान की फसल ठीक होने से किसानों को धान की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन कल से हो रहे बारिश तथा तेज हवाओं ने फसल को नुकसान पहुंचाया है।

अररिया जिले के पलासी ब्लॉक के लोखरा गांव के किसान संतोष कुमार ने छह एकड़ में दो तरह के धान की प्रजाति की खेती की थी। धान की एक प्रजाति तैयार थी और दूसरी प्रजाति में दाने आ रहे थे। असमय हुई बारिश और आंधी-तूफान ने दोनों फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। 

“मैंने दो एकड़ में जो धान लगाया था, वो पूरी तरह पक चुका था। एक दो दिन में हमलोग उसे काटने वाले थे। वहीं, चार एकड़ में जिस प्रजाति का धान लगाया था, उसमें दाने आ रहे थे। आंधी के कारण धान की फसल गिर गई है और खेतों में दो से तीन फीट पानी भर गया है,”

संतोष कुमार कहते हैं। 

वे आगे बताते हैं,

“इससे जो फसल पक चुकी है, उसका रंग मिट्टी में मिलकर खराब हो जाएगा और जिस फसल में दाना आ रहा है, उसके दाने में विकास नहीं होगा।”

कुल 6 एकड़ में धान की खेती के लिए संतोष ने लगभग एक लाख रुपए खर्च किये थे और इस बार अच्छी फसल की उम्मीद थी, लेकिन उनकी उम्मीद पर पानी फिर गया।

पूर्णिया जिले के बैसी प्रखंड के सुगवा महानंदपुर के निवासी अबुल कलाम ने 6 बीघा खेत में धान की फसल लगाई थी, लेकिन दो दिन से हो रही बारिश से उनकी फसल भी लगभग बर्बाद हो चुकी है। 

वे कहते हैं,

“इस बार हमारे यहां बाढ़ का उतना प्रभाव नहीं था। इसलिए उम्मीद कर रहे थे कि इस बार फसल को कोई नुकसान नहीं होगा। अक्टूबर में बारिश की कल्पना भी नहीं की थी, लेकिन अचानक बारिश और आंधी तूफान से फसल खराब हो गई।”

जिन किसानों ने धान को काटकर खेतों में छोड़ रखा था कि फसल सूख जाएगी, तो वे घर लाएंगे, इन किसानों की कटी हुई फसल पानी में चली गई। किसानों ने बताया कि खेत में पानी भर जाने से धान की फसल सड़ जाएगी।

पिछले दो दिनों से उत्तर बिहार और खासकर सीमांचल के जिलों में लगतार हो रही बारिश और आंधी तूफान ने क्षेत्र के हजारों किसानों के माथे पर बल ला दिया है। ये क्षेत्र बाढ़ प्रवण इलाकों में आता है, जिस कारण कमोबेश हर साल यहां किसानों को नुकसान हो जाता है। बाढ़ के बाद भी जो फसल बच जाती है, वही किसानों की कमाई होती है, लेकिन इस बार अचानक से आई बारिश ने किसानों को ज्यादा नुकसान कर दिया है। 

बारिश के कारण कई इलाकों में नये सिरे से बाढ़ के हालात बन गये हैं।

इधर, सीमांचल के जिलों के साथ-साथ नेपाल के तराई इलाकों में भी भारी बारिश हुई है, जिससे पूर्णिया के बायसी प्रखंड में कनकई, महानंदा और परमान नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। 

24 घंटे में बिहार में सामान्य से 226% अधिक बारिश

पटना मौसम विज्ञान केंद्र के एक मौसम विज्ञानी ने बताया कि दक्षिणी मध्यप्रदेश में निम्न दबाव और झारखंड तथा गंगातटीय पश्चिम बंगाल में चक्रवातीय सर्कुलेशन बनने से उत्तरी बिहार और खासकर सीमांचल के जिलों में भरी बारिश हुई है। उन्होंने बताया कि इस सीजन में इतनी अधिक बारिश अप्रत्याशित है।

पिछले 24 घंटों में सीमांचल के जिले अररिया, किशनगंज, पूर्णिया के अलावा सुपौल, समस्तीपुर और बेगूसराय में भी भारी बारिश हुई है। पूरे बिहार में इस दौरान 182.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 226 प्रतिशत अधिक है। 

पटना मौसमविज्ञान केंद्र से मिले आंकड़ों के मुताबिक, अररिया में पिछले 24 घंटों में 122.4 मिलीमीटर और किशनगंज में 121.2 मिलीमीटर बारिश हुई है। 

फॉरबिसगंज वेदर स्टेशन पर बीते 24 घंटो में 257.4 मिलीमीटर, सिकटी में 134.4 मिलीमीटर, किशनगंज के तैयबपुर वेदर स्टेशन में 142.2 मिलीमीटर, बहादुरगंज स्टेशन में 142 मिलीमीटर, ठाकुरगंज में 120 मिलीमीटर, चारघरिया स्टेशन में 117 मिलीमीटर और पूर्णिया जिले के ढेगराहाट वेदर स्टेशन में 120 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।

सुपौल के निर्मली में 248 मिलीमीटर और समस्तीपुर जिले के हसनपुर स्टेशन में 235 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।   

जलवायु परिवर्तन का खतरा सीमांचल में ज्यादा

सीमांचल के किसानों ने कहा कि अक्टूबर में और वह भी आखिरी हफ्तों में इतनी बारिश सीमांचल के लिए नई घटना है। उनका कहना है कि सीमांचल में बाढ़ तो अक्सर आती है, लेकिन वो जून, जुलाई और अगस्त में आती है तथा सितंबर व अक्टूबर के शुरू में चली जाती है। बिहार में मॉनसून की विदाई भी अक्टूबर के पहले हफ्ते में ही हो जाती है, इसलिए अक्टूबर में सामान्य तौर पर कम बारिश होती है। लेकिन इस बार दो दिनों में ही सीमांचल के जिलों मे भारी बारिश दर्ज की गई है।

हालांकि, इस बारिश का जलवायु परिवर्तन से सीधा कोई संपर्क है या नहीं, पता नहीं। लेकिन, जिस तरह तमाम शोधों में सीमांचल के जिलों को जलवायु परिवर्तन के मामले में संवेदनशील बताया गया है, उससे साफ है कि आने वाले समय में इन जिलों में बाढ़, भारी बारिश, जलजमाव जैसी समस्याएं बढ़ेंगी। इससे खेतीबारी को भारी नुकसान होगा, जिससे रोजगार के लिए शहरों की तरफ पलायन में तेजी आएगी।

जानकार बताते हैं कि नेपाल के हिमालयी क्षेत्रों में जहां बर्फबारी होनी चाहिए, वहां भारी बारिश हो रही है और नेपाल से निकलने वाली ज्यादातर नदियां उत्तरी बिहार में आती है, इसलिए नेपाल में मौसमी गतिविधियां उत्तरी बिहार को काफी प्रभावित करेंगी।

Water level rising
फोटो: सीमांचल में उफान पर नदियाँ

बाढ़ से भी हुई थी भारी क्षति

उल्लेखनीय हो कि पिछले दो-तीन महीनों में आई बाढ़ के कारण बिहार के सीमांचल के जिले समेत 30 जिलों में 6,63,776 हेक्टेयर में लगी फसलों को नुकसान पहुंचा था। वहीं, बाढ़ और अल्पवृष्टि के चलते 17 जिलों के किसान 141,227 हेक्टेयर में खेती ही नहीं कर पाये थे।

किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए बिहार सरकार ने 550 करोड़ रुपए मंजूर किये हैं। इस साल सरकार ने उन किसानों को भी मुआवजा देने का निर्णय लिया है, जो बुआई नहीं कर पाये थे। इसके लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपए मंजूर किये।

इधर, बारिश और आंधी से नुकसान झेलने वाले किसानों ने भी मुआवजे की मांग की है। सीमांचल के जदयू नेता ने इस आशय को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र भी लिखा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को आला अधिकारियों के साथ बैठक कर बारिश से हुई क्षति की समीक्षा बैठक की। वहीं, कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही खेतों में जाकर पहले को हुई क्षति का आकलन किया जाएगा और मुआवजे की घोषणा होगी।

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