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सिक्किम में तीस्ता ने मचाई तबाही, देसी-विदेशी 1200 पर्यटक फंसे, राहत अभियान युद्ध स्तर पर

सिक्किम में यूं तो कई दिनों से ही गाहे-बगाहे मौसमी बारिश हो रही थी लेकिन बीते बुधवार की रात लगातार हुई बारिश काल साबित हुई। एक ही रात में 220 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई। उसकी वजह से तीस्ता नदी खतरे के स्तर से भी ऊपर उफन गई। इसे इसी से समझा जा सकता है कि गहरी खाई में बहने वाली नदी कई जगहों पर राजमार्ग के बराबर आ गई। यहां तक कि कई सड़कों पर भी चढ़ गयी। पहाड़ों पर जगह-जगह भूस्खलन होने लगे।‌ कई घर नदी में समा गये।

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सिलीगुड़ी : सिक्किम व दार्जिलिंग की पहाड़ियों के बीच गहरी खाई में बहने वाली तीस्ता नदी ने दो दिनों की मूसलधार बारिश में विकराल रूप धारण करते हुए भीषण तबाही मचाई है। जगह-जगह पहाड़ी भूस्खलन हुआ है।

मंगन जिले में भूस्खलन से पक्सेप और अंभिथांग गांव में काफी तबाही हुई है। अब तक वहां छह लोगों के मरने की खबर है, जबकि कई घायल हो गए हैं। कई क्षेत्रों में सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति, खाद्य आपूर्ति और मोबाइल नेटवर्क बाधित हो गए हैं। तीस्ता नदी के किनारे के अनेक घर नदी में समा कर बह गए हैं।

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प्रशासन द्वारा सैकड़ों लोगों के घरों को खाली करा कर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। हजारों स्थानीय लोग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। भूस्खलन पीड़ित परिवारों के लिए प्रशासन द्वारा राहत शिविर चलाया जा रहा है। एनएच-10 कई जगहों पर टूट कर नदी में समा गया है।‌ इस वजह से यातायात बुरी तरह प्रभावित है।


अकेले उत्तरी सिक्किम में 1200 से अधिक देशी विदेशी पर्यटकों के भी फंसे होने की खबर है। पूरे सिक्किम के मामले में यह आंकड़ा और ज्यादा हो सकता है। शासन-प्रशासन द्वारा युद्धस्तर पर राहत अभियान चलाया जा रहा है। अब हेलिकॉप्टर सेवा लेने का भी प्रयास किया जा रहा है। राज्य की इस आकस्मिक आपदा को देखते हुए सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तामांग (गोले) भी अरुणाचल प्रदेश की नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह से वापस लौट आए हैं।‌

उन्होंने आपातकालीन उच्च स्तरीय बैठक कर वस्तुस्थिति की समीक्षा की है और अधिकारियों को युद्धस्तर पर राहत अभियान का निर्देश दिया है।

कैसे विकराल हुई तीस्ता?

सिक्किम में यूं तो कई दिनों से ही गाहे-बगाहे मौसमी बारिश हो रही थी लेकिन बीते बुधवार की रात लगातार हुई बारिश काल साबित हुई। एक ही रात में 220 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई। उसकी वजह से तीस्ता नदी खतरे के स्तर से भी ऊपर उफन गई। इसे इसी से समझा जा सकता है कि गहरी खाई में बहने वाली नदी कई जगहों पर राजमार्ग के बराबर आ गई। यहां तक कि कई सड़कों पर भी चढ़ गयी। पहाड़ों पर जगह-जगह भूस्खलन होने लगे।‌ कई घर नदी में समा गये।

a house collapsed due to flood in teesta river

सांकलांग में एक ब्रिज बह गया, जिस वजह से चुंगथांग और लाचुंग से आवागमन ठप हो गया है। आक्रामक तीस्ता ने कई सड़कों समेत सिक्किम की लाइफ लाइन एनएच-10 को भी तबाह‌ कर डाला है। कई जगहों पर प्रशासन ने वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है।

कालिम्पोंग में भी स्थिति नाजुक

सिक्किम से सटे पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र के कालिम्पोंग जिले में भी तीस्ता नदी किनारे के इलाकों विशेष कर तीस्ता बाजार इलाके का बुरा हाल हो गया है। वहां आवाजाही एकदम ठप हो गई है।

कालिम्पोंग के डीएम बालासुब्रमण्यन टी. ने आदेश जारी कर कई मार्गों पर अगले आदेश तक के लिए यातायात को प्रतिबंधित कर दिया है।

कौन-कौन मार्ग हैं बंद ?

एनएच-10 पर मल्ली से चित्रे के बीच बसों समेत सभी भारी वाहनों की आवाजाही पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी गई है। मल्ली से 29 माइल मार्ग पर भी सभी भारी मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर अगले आदेश तक के लिए रोक‌ है।‌

इसके साथ ही रवि झोरा, तीस्ता बाजार, पेशक से दार्जिलिंग मार्ग पर हर तरह के वाहनों की आवाजाही पर अगले आदेश तक के लिए पूर्णतः रोक है।

कालिम्पोंग के एसपी श्रीहरि पांडेय ने कहा है कि आपात परिस्थिति को देखते हुए एनएच-10 पर बड़े व भारी वाहनों की आवाजाही पर पूर्णत: रोक है। वहीं परिस्थिति को देख कर ही नियंत्रित रूप में छोटे वाहनों की आवाजाही की अनुमति दी जा रही है।

cars stuck due to flood in teesta river

क्या हैं वैकल्पिक उपाय?

कई मार्गों के बंद हो जाने के चलते प्रशासन द्वारा कुछ वैकल्पिक मार्ग सुझाए गए हैं।‌ सिक्किम के रंगपो से सिलीगुड़ी वाया मनसंग – 17 माइल – अलगढ़ा – लावा – गोरुबथान मार्ग पर केवल छोटे वाहनों की आवाजाही की अनुमति दी गई है।

वहीं, रेशी – पेदोंग – अलगढ़ा – लावा – गोरुबथान – सिलीगुड़ी मार्ग पर बसों समेत भारी व छोटे वाहनों को आवाजाही की अनुमति है। कालिम्पोंग से दार्जिलिंग व दार्जिलिंग से कालिम्पोंग जाने वाले वाहनों की आवाजाही 27 माइल – तीस्ता वैली हो कर करवाई जा रही है। इन वैकल्पिक मार्गों में लगभग 40-50 किलोमीटर की दूरी बढ़ जा रही है और समय भी डेढ़-दोगुना ज्यादा लग रहा है।

लौटे यात्रियों ने कहा- जीवनदान मिला

किसी तरह सिलीगुड़ी लौट पाए कई पर्यटकों ने कहा कि उन्हें लग रहा है कि उन्होंने नया जीवनदान पाया है। वे बड़ी दहशत में थे लेकिन अब सुरक्षित लौट कर जान में जान आई है।

गत दो दिनों के अंदर हालांकि अनेक पर्यटक भारी मुसीबतें उठा कर वापस लौट आए हैं लेकिन अभी भी अकेले उत्तरी सिक्किम में 1200 से अधिक देसी-विदेशी पर्यटक फंसे हुए हैं। राज्य पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार लाचुंग व चुंगथांग में 1200 से अधिक देसी और 15 विदेशी पर्यटक फंसे हुए हैं। उनमें 10 बांग्लादेश, तीन नेपाल और दो थाईलैंड के नागरिक हैं।

वहीं, सिक्किम की अन्य जगहों को देखें तो फंसे हुए पर्यटकों की संख्या और भी ज्यादा हो सकती है। शासन-प्रशासन उन सभी को सुरक्षित निकालने के प्रयास में है।

हवाई मार्ग से पर्यटकों को निकालने की योजना

मौसम में सुधार हुआ तो उत्तरी सिक्किम के लाचुंग और चुंगथांग से पर्यटकों को निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सड़क मार्ग को ठीक होने में अभी कम से कम पांच-सात दिन और लग सकते हैं, सो हेलिकॉप्टर सेवाएं लेने की कोशिश की जा रही है।

सिक्किम के मुख्य सचिव विजय भूषण पाठक ने कहा है कि फंसे हुए पर्यटकों को हवाई मार्ग से निकालने के लिए केंद्र सरकार से बातचीत की जा रही है।

राज्य सरकार ने हवाई निकासी के लिए वायुसेना के हेलिकॉप्टरों की मांग की है लेकिन वह भी मौसम की अनुकूलता पर ही निर्भर करेगा। वैकल्पिक रूप से सड़क मार्ग से निकासी की योजना बनाई गई है। अगले 5-7 दिनों में रोड कनेक्टिविटी बहाल होने की उम्मीद है।

उन्होंने बताया है कि छह-सात जगहों पर भूस्खलन की वजह से अभी भी सड़कों पर पहाड़ के पत्थर और मिट्टी का गिरना जारी है, जिसके चलते सड़कों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। सड़क यातायात बहाल होने में पांच से सात दिन लग सकते हैं।

उन्होंने पश्चिम बंगाल की ओर क्षतिग्रस्त एनएच-10 की मरम्मत कर उसे तत्काल खोले जाने की आवश्यकता पर भी बल दिया है।

अभी बिगड़ा ही रहेगा मौसम

उत्तरी सिक्किम के लिए आज भी मौसम की ‘रेड वार्निंग’ है।‌ उसके बाद चार-पांच दिन ‘ऑरेंज वार्निंग’ है। सिक्किम के निकटवर्ती उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार व कूचबिहार जिला क्षेत्रों के लिए भी आज व कल हेतु मौसम की ‘रेड वार्निंग’ है। इसके तहत भारी से बहुत भारी (7-20 सेमी) बारिश और अत्यधिक भारी बारिश (20 सेमी से अधिक) होने की संभावना है। वहीं, गरज के साथ बारिश और बिजली चमकने के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की गति से तेज हवा चलने की भी संभावना है।

वहीं, अगले चार-पांच दिनों के लिए ‘आरेंज वार्निंग’ है। इसके तहत कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी (7-20 सेमी) बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के सिक्किम क्षेत्र के निदेशक गोपीनाथ राहा ने यह जानकारी दी है।

उन्होंने बताया कि अभी कम से कम सप्ताह भर मौसम का मिजाज ऐसे ही बिगड़ा रहेगा। इसलिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।

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